Tuesday, December 25, 2018

आ कहीं दूर चले जाएं हम, दूर इतना कि हमें छू न सके कोई ग़म

लड़की की कल्पना भी उसके जैसी ही क्यूट और यूनिक से थे. उसके सपनों और ख्वाहिशों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ सभी कुछ मुमकिन था. वो दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग और बेहद खूबसूरत थी. लड़की अपनी इस इमैजनेटिव दुनिया को लेकर हमेशा बड़ी सीरियस रहती थी. उसे अपने अजीबोगरीब और वाइल्ड ख्वाहिशों पर पूरा विश्वास था. वो लड़के को जब भी अपना कोई सपना सुनाती, तो ये जरूर कहती, “देखना एक न एक दिन ये जरूर होगा”. लड़का वैसे तो उसकी कई बातों को मजाक में उड़ा दिया करता था लेकिन वो लड़की की इन इल्लॉजिकल बातों पर हमेशा चुप सा रहता था, जैसे कि उसे भी लड़की की ही तरह उसकी इमैजनेटिव दुनिया पर पूरा यकीन हो.

दुनिया में लड़का ही एकमात्र ऐसा शख्स था जिसके सामने लड़की बिना हिचके अपने मन की सभी परते खोल दिया करती थी. उसे ये यकीन था कि बाकी लोगों की तरह लड़का कभी ये नहीं कहेगा कि ये क्या बचकानी बातें कर रही हो तुम. शायद इस वजह से ही लड़की अपनी सभी छोटी-बड़ी, लॉजिकल और इल्लॉजिकल ख्वाहिशें लड़के से बिना सोचे-समझे बड़े आराम से कह दिया करती थी.

वो दिसम्बर का ही कोई दिन रहा होगा. दोनों बैठे थे शहर के एक रेस्टोरेंट में. लड़की एक बात को लेकर बड़ी एक्साइटेड थी. उसने पिछली रात एक नयी अंग्रेजी सीरीज देखी थी जिसमें नायक एक ऐसे कमरे की छानबीन करता है जिसके दरवाज़े को खोलते ही इंसान ऑल्टर्नेट यूनिवर्स में चला जाता है और फिर वहां से वापस नहीं लौटता.

उस सीरियल के बारे में लड़के को बताते हुए लड़की ने कहा, “जानते हो ये सीरियल तो अभी आया है, लेकिन मेरी ऐसी एक कल्पना बहुत पहले की है. मैं तो अब भी जब कभी सो कर उठती हूँ और अपने कमरे के बाथरूम में जाती हूँ तो मुझे हमेशा लगता है कि बाथरूम के दीवारों में कोई सीक्रेट दरवाज़ा खुलेगा, और उस दरवाज़े के दूसरी तरफ कोई अनजानी दुनिया होगी और मैं उस दुनिया में जाऊँगी, लेकिन वहां जाने से पहले इस दुनिया में अपना कोई क्लोन छोड जाऊँगी. मेरा वो क्लोन यहाँ मेरा सब काम करेगा, कॉलेज जाएगा, मेरे असाइनमेंट बनाएगा, खेलेगा, खायेगा, घूमने जाएगा, तुम्हारे साथ बैठ कर कॉफ़ी पिएगा और किसी को पता नहीं चलेगा कि मैं यहाँ पर नहीं हूँ.

मैं नयी नयी दुनिया घूमूँगी, नए नए ग्रहों के प्राणियों से दोस्ती करुँगी और फिर वहाँ से घूम फिर कर जब वापस इस दुनिया में आऊँगी उस सीक्रेट दरवाज़े से, तो अपने क्लोन को अपने अन्दर ही समा लूँगी, और किसी को पता नहीं चलेगा कि मैं यहाँ नहीं थी और किसी दूसरी दुनिया की सैर कर रही थी.

तुम्हें पता है, मेरी वो इस दुनिया के जैसी नहीं है. बिलकुल अलग और बेहद ही खूबसूरत दुनिया है वो, जहाँ बर्फ के फाहे गिरते रहते हैं हमेशा और खूब अच्छी कॉफ़ी और चॉकलेट्स मिलते हैं. वहाँ के लोग भी यहाँ जैसे नहीं हैं. यहाँ तो कितने धर्म हैं न, उधर उस दुनिया में सिर्फ प्यार ही एकमात्र धर्म है लोगों का और वे सब खूब प्यार से एक दुसरे के साथ रहते हैं, हमेशा.

“तुम भी चलोगे क्या मेरे साथ कभी घूमने वहाँ?” - लड़की ने लड़के को टोकते हुए कहा.

लड़का मुस्कुराने लगा... “हाँ जरूर.. लेकिन हम अगर वापस नहीं आ पाए तो? मान लो लौटते वक़्त उस दरवाज़े ने काम करना बंद कर दिया तो? हम उसी दूसरी दुनिया में अटके रह गए तो?”

तो? नो बिग डील!! तुम क्या इस दुनिया को मिस करोगे? मैं तो एक रत्ती मिस नहीं करुँगी. और वैसे भी तुम अगर मेरे साथ रहोगे तो मैं तो ख़ुशी ख़ुशी उस दुनिया में उम्र भर अटके रहने के लिए तैयार हूँ. इस दुनिया में तो देखो हमारा साथ कहाँ तक मुमकिन है, लेकिन उस दुनिया में देखना तुम, हमें कोई अलग नहीं करेगा. मैंने कहा न तुमसे, वहाँ प्यार ही एक मात्र धर्म है, और प्यार करने वाले इंसानों को वहाँ बहुत एहमियत दी जाती है. तुम्हें क्या अपने माँ की चिंता है? अरे उनकी चिंता मत करो, उनके पास तुम्हारा क्लोन रहेगा न. और उन्हें कभी पता नहीं चलेगा कि तुम उनके साथ नहीं हो, और तुम चाहो तो उस दुनिया की एडवांस्ड सर्वेलन्स सिस्टम से अपने घर पर नज़र भी रख सकते हो. उनकी टेक्नोलॉजी यहाँ से काफी एडवांस्ड है, सच में...अब बोलो, चलोगे?

लड़का कुछ पल को तो कुछ बोल ही नहीं सका. बस टकटकी लगाये लड़की को देख रहा था, और लड़की अब तक उसके जवाब का इंतजार कर रही थी जैसे मानो उन्हें सच में दूसरी दुनिया में जाना ही हो.

हाँ, चलो चलते हैं... लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा.

लेकिन लड़के को वापस जवाब देने के बजाये वो अचानक चुप सी हो गयी. कुछ देर यूँ ही कहीं अनजानी सी जगह पर उसकी नज़रें टिकी रही, फिर बिना कुछ बोले वह अपनी डायरी में कुछ लिखने लगी. लड़का अब भी बस उसे देखे जा रहा था. वो समझ गया था, इस समय उसके साथ होकर भी वह कहीं बहुत दूर अपनी दुनिया में गुम हो चुकी थी.

डायरी लिखते लिखते वो बहुत हल्के से कुछ बोल भी रही थी. लड़के ने उससे कुछ पूछने की कोशिश की तो बहुत स्ट्रिक्ट नज़रों से उसे घूर कर उसने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया...हार कर लड़के ने शांत रहने में ही अपनी भलाई समझी.

सहसा लड़की फिर चहकी, "हो गया सब इंतज़ाम...अब बस बता देना कब चलना है मेरे साथ..."

लड़का जानता था, उससे कुछ भी पूछना बेकार है. लड़की जिस मूड में थी, वो लाख कोशिश कर ले तो भी वह उसे कुछ नहीं बताएगी...इस लिए वह बस चुपचाप लड़की को कॉफ़ी का सिप लेते देख रहा था. कैफ़े में एक गाना बज रहा था जिसे धीमे धीमे लड़की भी गुनगुना रही थी...


आ कहीं दूर चले जाएं हम
दूर इतना कि हमें छू न सके कोई ग़म

फूलों और कलियों से महके हुए इक जंगल में
इक हसीं झील के साहिल पे हमारा घर हो
ओस में भीगी हुई घास पे हम चलते हों
रंग और नूर में डूबा हुआ हर मंज़र हो..