Saturday, March 10, 2018

गुनगुनाने दो..धड़कनों को...

वे उन दोनों की शुरुआती मुलाकातों वाले दिन थे. लड़की खामोश सी रहती थी, वैसे तो वो बातें खूब करती थी, लेकिन लड़के के सामने हमेशा चुप सी रहती थी. लड़का बेहद बातूनी था. फिल्मों और किताबों का दीवाना था लड़का. लड़की को लेकिन किताबों और फिल्मों में कोई खास दिलचस्पी नही थी. उसे तो कुकिंग का शौक था. एक से बढ़कर एक पकवान बनाया करती थी वो. स्वीट डिस बनाने में लड़की ने महारथ हासिल की हुई थी. वो बढ़िया से बढ़िया स्वीट डिश लड़के के लिए बना कर लाती थी. लड़का उसके हाथों के बने स्वीट डिशज़ का दीवाना था, लेकिन लड़के को हमेशा लगता कि लड़की की बनाई स्वीट डिश से भी ज्यादा मिठास खुद उस लड़की में है. लड़का जब भी ये बात लड़की से कहता, वो हमेशा ब्लश करने लगती और टॉपिक बदल कर कोइ दूसरी बात करने की कोशिश करने लगती.

ऐसा नही था कि लड़का सिर्फ किताबी या फिल्मी कीड़ा था, लड़की की तरह वो भी कुकिंग का शौक रखता था, लेकिन बात अगर स्वीट डिश की हो तो सिवाए गुलाब जामुन और गाजर हलवा के वो कुछ भी बनाना नही जानता था. वहीं लड़की ऐसी ऐसी डिश बना देती थी जिसका लड़के ने नाम तक नही सुना था. लड़की हमेशा लड़के से नए और यूनिक स्वीट डिश का जिक्र करती. लड़का हैरान सा होकर बस लड़की को देखते रहता, सोचते रहता कि इस लड़की को इतना सब कहाँ से पता है?

लड़का अक्सर लड़की से कहता, कि तुम्हारे आने से मेरी ज़िंदगी मे बहार तो आयी है, लेकिन साथ ही साथ मिठास भी भरपूर आई है. तुम इतनी मीठी जो हो. अपने स्वीट डिश से भी ज्यादा मीठी.

लड़का फिर एक सवाल पूछता लड़की से, बताओ ज़रा, इतनी स्वीटनेस कहाँ से लायी तुम? किसी चाशनी वाले कुँए में कूद गयी थी क्या?

लड़के की इस सवाल से लड़की शरमा सी जाती. उसके गाल एकदम सुर्ख लाल हो जाते थे. लड़की को अपने लाल हुए गाल पसंद नहीं थे. वो अक्सर कहती लड़के से अपने लाल गालों की शिकायत करती. वो कहती, “जानते हो, रंगों का पर्व होली मैं इसलिए नहीं खेलना चाहती कि रंग और गुलाल के चक्कर में मेरे गाल और लाल हो जाते हैं.”

लड़की की इस बात पर लड़का कहता, तुम्हारे यही सुर्ख लाल गाल तो तुम्हारी ख़ूबसूरती को बढ़ा देते हैं, सिर्फ इन्हीं की वजह से तुम बाकी लड़कियों से अलग हो.

इस बात पर लड़की की आँखें थोड़ी झुक सी जाती. वो समझ नहीं पाती कि लड़के की ऐसी तारीफों का क्या जवाब दे वो . हमेशा एक “थैंक यू” कह कर चुप हो जाती.

लड़का उसे “मैंने प्यार किया” फिल्म के डाइअलॉग को थोड़ा मॉडिफाई कर के उसे छेड़ता - “प्यार में मैडम, नो सॉरी और नो थैंक यू...”

लड़की इस डाइअलॉग पर खिलखिला उठती.

वे दोनों हर शाम मिलते थे, देर तक बैठ कर वो खूब बातें करते थे. आदत से मजबूर, लड़का अक्सर फिल्मों या किताबों का जिक्र छेड़ देता. लड़की इस बात पर लड़के को टोकती नहीं, कि वो हमेशा फिल्मों की बात क्यों करने लगता है, बल्कि वो लड़के की बातों में दिलचस्पी लेने लगती. कभी कभी लड़का गानों का जिक्र छेड़ देता. लड़का गानों का जिक्र जानबूझ कर छेड़ता. वो जानता था कि गानों के जिक्र से लड़की गुनगुनायेगी, और लड़के को लड़की का यूँ गुनगुनाना बहुत पसंद था. लड़के और लड़की का ये गाना-गुनगुनाना कुछ कुछ अन्ताक्षरी जैसा ही होता, बस इसमें कोई नियम और हार-जीत नहीं थे.

एक ऐसी ही खूबसूरत शाम थी. दोनों एक दुसरे का हाथ थामे शहर के सनसेट पॉइंट पर खड़े थे. खूब ठंडी हवा चल रही थी और मौसम बेहद रोमांटिक था. लड़के के मन में कुछ शरारत सूझी और उसनें लड़की को झटके से अपने बेहद करीब खींच लिया, और एक गाने के बोल गुनगुनाने लगा -

ये रतजगे, लम्बी रातों के दिल ना लागे क्या करूं?
ये सिलसिले, दिल की बातों के जादू चले क्या करूं

बिखरा ज़ुल्फ़ें सो जाऊं, दिल चाहे कहीं खो जाऊं
मदहोश दिल की धड़कन ...चुप सी ये तन्हाई

लड़के के इस ‘मूव’ से लड़की एकदम चौंक सी गयी, लेकिन हैरत की जगह, एक मुस्कान उसके चेहरे पर सिमट आई थी. लड़के के गाने के जवाब में, उसका हाथ थामे वो भी गुनगुनाने लगी –

ख्वाब आँखों में अब नहीं आते / अब तो पलकों में तुम समाये हो
हर घड़ी साथ-साथ रहते हो / दिल की दुनिया में घर बसाये हो
दिल की दुनिया में घर बसाये हो...
तेरी हर बात पे हम ऐतबार करते हैं
ऐ सनम हम तो सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं..

लड़की के इस संगीतमय जवाब से लड़के का चेहरा खिल उठा. अब उसकी बारी थी. ऐसे सिचुएशन में लड़के को लड़की के लिए गाने सेलेक्ट करने में कभी सोचना नहीं पड़ता था. ख़ास लड़की के लिए डेडिकेटेड गानों की तो लड़के के पास ना खत्म होने वाली लिस्ट थी. लड़के ने इस बार लड़की का हाथ अपने हाथों में लेकर गुनगुनाना शुरू किया -

मिले होंगे राधा कृष्ण, यहीं किसी वन में,
प्रेम माधुरी उनकी बसी है पवन में
और भी पास आ गए हम इस दिव्य वातावरण में...
एक मन दिया है, कितने सौगातें अभी हैं बाकी,
बौछार एक पड़ी है, बरसातें अभी हैं बाकी...

इस बार लड़की भी शायद अगला गाना लेकर पहले से तैयार थी. हवा में उड़ते अपनी जुल्फों को लड़की ने दोनों हाथों से समेटा, ढलते सूरज की तरफ देखते हुए गुनगुनाने लगी -

शमा को पिघलने का अरमान क्यूँ है
पतंगे को जलने का अरमान क्यूँ है
इसी शौक का इम्तिहान जिंदगी है...
मोहब्बत जिसे बक्श दे जिंदगानी
नहीं मौत पर ख़त्म उसकी कहानी

कैसे जिया जाए..इश्क़ बिन
नहीं कोई इंसान मोहब्बत से खाली
हर एक रूह प्यासी हर एक दिल सावनी

मोहब्बत जहाँ है वहाँ जिंदगी है..
मोहब्बत ना हो तो कहाँ जिंदगी है...
तोसे नैना लागे मिली रौशनी...

लड़की ने लड़के की आँखों में ऐसे देखा, जैसे उससे कुछ पूछ रही हो. जैसे इस गाने का मतलब लड़के के आँखों में वो तलाश रही हो. लड़का, जिसके पास हमेशा लड़की के सवाल का जवाब मौजूद रहता था, इस बार वो भी खामोश था.

लड़की ने कुछ ऐसे लहजे में ये गाना गया था कि लड़का थोड़ा ‘स्पीचलेस’ जैसा हो गया था. कुछ देर तक दोनों में से किसी ने कुछ नहीं कहा. बस सामने खुले आकाश को देखते रहे.

कुछ सोच कर लड़का अचानक मुस्कुराया, और फिर उसनें लड़की को अपने और पास खींचा. इस बार अपने बिलकुल करीब.. ऐसे कि लड़की उसके बाहोँ में आ गिरी. लड़की का चेहरा लड़के के चेहरे के एकदम पास आ गया. लड़के ने लड़की के काँपते होटों को देखा, और फिर उसकी आँखों में आखेँ डाल गुनगुनाने लगा –

Would you tremble if I touched your lips?
Or would you laugh? Oh, please tell me this
Now would you die for the one you love?
Oh hold me in your arms tonight

I can be your hero baby
I can kiss away the pain
I will stand by you forever
You can take my breath away

इस बार लड़के ने सिर्फ चंद लाइन नहीं, बल्कि इस पूरे गाने को गुनगुनाया था. लड़की जो स्वीट डिश के साथ साथ शरमाने में भी महारथ हासिल किये थी, इस बार उसकी पलकें ऐसे झुकी कि उठने का नाम नहीं ली रही थी. उसके होठ अब भी काँप रहे थे, लड़के ने अपने दोनों हाथों से उसके चेहरे को ऊपर उठाया, और फिर बहुत धीमे से उसके माथे को चूम लिया.


शाम ढल चुकी थी, और लड़की को वापस घर जाना था. लेकिन ना लड़की को, ना ही लड़के को वापस जाने की कोई जल्दी थी. लड़की ने अपना सर लड़के के कंधे पर टिका दिया, और अपनी उँगलियों में सगाई की अंगूठी को देख देख बहुत हलके आवाज़ में गुनगुनाने लगी -

एक दिन आप यूँ हमको मिल जाएंगे
फूल ही फूल राहों में खिल जाएंगे
मैंने सोचा न था...

एक दिन ज़िंदगी इतनी होगी हसीं
झूमेगा आसमां, गाएगी ये ज़मीं
मैंने सोचा न था ..

दिल की डाली पे कलियाँ सी खिलने लगी
जब निगाहें निगाहों से मिलने लगी
एक दिन इस तरह होश खो जाएंगे
पास आए तो मदहोश हो जाएंगे
मैंने सोचा न था ....

4 comments:

  1. गुनगुनाने दो.... खिलखिलाने दो..

    वाह :)

    ReplyDelete
  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  3. ब्लॉग बुलेटिन के जरिए आप तक ना पहुँचती तो खूबसूरत अहसासों से भरी ये कहानियाँ पढ़ने का मौका गँवा देती । आज ही आपकी बहुत सी कहानियाँ पढ़ गई....बेहतरीन हैं।

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति
    आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete

आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया