Monday, October 30, 2017

तुम्हारे नाम पर एक कविता - प्रियंका गुप्ता की तीन कवितायें

आज बेहद ख़ास दिन है मेरे लिए. आज जन्मदिन है मेरी दीदी, प्रियंका गुप्ता का. इस ब्लॉग से वो मेरे से ज्यादा जुड़ी हुई हैं. वो नहीं होती तो शायद ये ब्लॉग बहुत पहले बंद हो चुका होता. आज उनके जन्मदिन पर उन्हीं की तीन अप्रकाशित कविताएँ यहाँ साझा कर रहा हूँ.. 

1.  चलो कुछ देर खामोश बैठते हैं 

चलो,
कुछ देर खामोश बैठते हैं
और सुनते हैं
हमारे दिलों के
धड़कनों  को;
या फिर
दूर से आती किसी ट्रेन की
सीटी की गूँज
और उसके साथ
अपने पाँव के नीचे
हल्के से थरथराती
ज़मीन का कम्पन;
सुनना हो तो सुनो
घर के पिछवाड़े बने
उस छोटे से बगीचे में
एक अनदेखे कोने में छिपे
झींगुरों का संगीत;
और अगर कुछ देर फुरसत हो
तो सुन सकते हो
नदियों को गुनगुनाते हुए;
तुम जब चाहो तब
सुन सकते हो इनमें से कुछ भी
अपनी पसंद के हिसाब से
पर कभी कोशिश करना
अपनी पूरी ताकत लगा के सुनने की
मेरे अबोली अनगिनत आवाज़ें...।

2. चलो लौट चलते हैं फिर 

चलो,
लौट चलते हैं फिर
उसी दोराहे पर
जहाँ से अलग हुए थे
हमारे रास्ते
बदल गईं थीं
हमारी मंजिलें
चलो,
थोड़ा और पीछे चला जाए
कुछ दूर साथ चलते हुए
मिल जाएँ फिर से कहीं
किसी दोस्त से अजनबी की तरह
जिनके बीच खामोशियाँ हों
पर अबोला नहीं
चलो,
एक बार फिर
विदा लेते हुए
वादा करें कोई
और
एक बार फिर
भूल जाएँ
उन्हें निभाना...।

3. तुम्हारे नाम पर एक कविता 

मैं रचूँगा
तुम्हारे नाम पर एक कविता
उकेरूँगा अपने मन के भाव
कह दूँगा सब अनकहा
और फिर
बिना नाम की उस कविता को
कर दूँगा
तुम्हारे नाम
क्योंकि
मैं रहूँ न रहूँ
कविता हमेशा रहेगी
तुम्हारे नाम के साथ...|



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