Saturday, December 31, 2016

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वर्ड्स - दिज वर्ड्स आर आल आई हैव टू टेक योर हार्ट अवे

दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में वो एक छोटा सा कैफे था जो तुम्हें काफी पसंद था. शायद दिल्ली का सबसे पसंदीदा कैफे था तुम्हारा. उस कैफे से तुम्हारी दोस्ती कॉलेज के वक़्त से ही हो गयी थी और तब से ही वो कैफे दिल्ली में तुम्हारा अड्डा बन गया था. जाने कितनी शैतानियाँ की हैं तुमनें इस कैफे में और जाने कितने तुम्हारे खुफिया मिसन की प्लानिंग और एक्सक्यूशन भी इसी कैफे में हुए थे. कई खतरनाक आइडियाज भी तुम्हें इसी कैफे में आये थे, जिनकी वजह से हर बार मैं मुसीबत में फँस जाया करता था. मुझे याद है कॉलेज के बाद के दिनों में भी जब कभी तुम दिल्ली में रहती, तो पूरा पूरा दिन तुम इस कैफे में बिता देती थी. घर में तुम्हारे पैर टिकते कहाँ थे? इस कैफे को ही एक तरह से तुमने अपना घर बना लिया था. कैफे की तीन चीज़ें तुम्हें काफी पसंद थी - यहाँ कोने में मैगजींस और कुछ किताबें रखे होते थे कि अगर आप अकेले हैं तो कुछ देर के लिए इन्हें पढ़ सकते हैं, कुछ ख़ास कस्टमर्स के लिए काउंटर पर लूडो और चेस भी उपलब्ध मिल जाते थे और कैफे में बजता संगीत जो तुम्हें सबसे ज्यादा पसंद था. कैफे के काउंटर के ठीक पीछे सिर्फ दो कुर्सी और एक टेबल लगी रहती थी, और तुम्हें वहाँ बैठना पसंद था.. इस कैफे की एक और बात थी जो तुम्हें बड़ी अच्छी लगती थी...हालाँकि वो बात मुझे उतनी अच्छी नहीं लगती थी. इस कैफे में जितनी बार भी तुम्हारे साथ मैंने चेस और लूडो खेला है उतनी बार तुमसे हारा हूँ मैं...मुझे तो अब तक याद है कैसे तुम पूरे टसन में राजकुमार स्टाइल डाइअलॉग मारती थी.... “जानी...ये मेरा इलाका है...यहाँ मुझे हराना मुमकिन ही नहीं...नामुमकिन है.”

कैफे का मालिक जिसका नाम रणवीर था, वो भी तुम्हें बड़े अच्छे से पहचान गया था. तुम्हें उसके म्यूजिक का टेस्ट काफी पसंद था. कैफे में बजता म्यूजिक तुम्हें बड़ा ‘सोल्फुल’ लगता था. रणवीर को तुमने एक निकनेम दे दिया था ‘डेविड’, जो किसी मशहूर डीजे का नाम था. तुम अक्सर कहती थी कि रणवीर भी डेविड जैसे मैजिकल गाने सुनाता है हमें. रणवीर से तो तुम्हारी खूब गहरी दोस्ती भी हो गयी थी, और तुम्हारे ही जरिये मेरी भी उससे दोस्ती हो गयी थी. रणवीर से तुम्हारी दोस्ती का किस्सा भी अजीब है. एक दिन जाने तुम्हें क्या सूझी, तुम मुझसे कहने लगी, चलो हम और तुम मिलकर एक ऐसा ही कैफे शुरू करते हैं और जब तक मैं तुम्हारे इस बात का कुछ जवाब दे पाता या तुम्हें कुछ समझा पाता, तुम काउंटर पर चली गयी थी और रणवीर से बातें करने लगी थी कि कैसे हम एक कैफे शुरू कर सकते हैं. तुम्हारी हरकतों और बदमाशियों से अनजान वो तुम्हें एक क्युरीअस आन्ट्रप्रनर समझ कर तुम्हें सब जानकारियां भी दे रहा था...और तुम..तुम तो ऐसे उसकी बातों पर सिर हिला रही थी जैसे तुम्हें उसकी सभी बातें समझ में आ रही हों. मैं जब काउंटर पर आया था तो मेरे प्रति तुम्हारा बर्ताव भी ऐसा था कि रणवीर को जरूर ये लगा होगा कि मैं तुम्हारा कोई असिस्टेंट हूँ. उस दिन के बाद तो तुम महीनों तक जिद पर अड़ गयी थी कि हम दोनों को एक कैफे शुरू करना ही चाहिए. बड़ी मुश्किल से तुम्हारी ये जिद छुट पायी थी.

इस कैफे में कभी कभी तुम अजीबोगरीब हरकतें भी करने लगती थी. तुम्हें याद है कैसे तुम यहाँ बैठे बैठे ही अक्सर किसी ‘नोस्टालजिक जर्नी’ पर चली जाया करती थी? वो दिन तो याद है न तुम्हें जब मेरी पढ़ाई खत्म हुई थी और मैं दिल्ली तुमसे मिलने आया था. तुम बहुत खुश थी उस दिन, हम करीब छः महीने बाद जो मिल रहे थे. ग्रीन पार्क के मेट्रो स्टेशन पहुँच कर जब मैंने तुम्हें फोन किया और ये जानना चाहा कि तुम कैफे पहुँची हो या नहीं, तो तुमने फोन पर मुझे बड़ा अजीब जवाब दिया था जो मुझे उस समय तो बिलकुल समझ में नहीं आया था..तुमने कहा था “मैं कैफे में ही बैठी हूँ और अब लौट रही हूँ..तुम आओ तब तक मैं भी लौट आऊँगी..”

मैं तो कुछ देर तक यही सोचता रहा कि तुम्हारा जवाब कितना कान्ट्रडिक्टरी है.. तुम्हारे बोलने का क्या अर्थ समझूँ मैं? तुम कैफे में बैठी हो और लौट भी रही हो? ये कैसे मुमकिन है? मेरी इस क्युरीआसटी को शांत भी तुमने ही किया था. तुमने उलाहना भरे स्वर में कहा था “तुम तो थे नहीं दिल्ली में और मैं यहाँ अकेली थी...क्या करती मैं? किसे परेशान करती? किसके साथ घुमती? अकेले तो कॉफ़ी पीने में भी मज़ा नहीं आता है..तो एक दिन यहाँ बैठे बैठे मैंने अपनी एक स्पेशल पावर्स का इस्तेमाल किया और आँखें बंद कर के उन दिनों में जाने लगी जब हम और तुम साथ घूमते थे, जब तुम थोड़े कम नालायक थे.”

स्पेशल पावर्स? तुम्हारे पास स्पेशल पावर्स भी है? मैंने तुमसे पूछा था, और फिर तुमने कुछ ऐसे मुझे घूर के देखा था कि आगे कोई बात पूछने की मुझमें हिम्मत ही बाकी नहीं रही.

तुमने इस कैफे को एक तरह से अपना घर ही बना लिया था. जहाँ पर हम तुम अक्सर बैठते थे, उस टेबल के चारों तरफ तुम्हारी सभी चीज़ें ऐसे बिखरी रहती थी जैसे वो कैफे का कोना नहीं बल्कि तुम्हारे ड्राइंग रूम का कोई कोना है.. तुम्हारा जैकेट, तुम्हारे सनग्लास, हेयरक्लिप्स, दस्ताने, तुम्हारी किताबें, डायरी, कैमरा, मोबाइल और तुम्हारे चॉकलेट्स..टेबल के चारों तरफ तुम्हारी चीज़ें बिखरी रहती और अक्सर टेबल पर सर रख कर तुम यहीं सो भी जाया करती थी. उस दिन भी मैं जब तुमसे मिलने आया तुम शायद अपने नोस्टालजिक जर्नी से थक गयी थी और वहीँ टेबल पर सर रख कर सो रही थी.

मेरे आते ही तुम झटके से उठी गयी थी. मैं तो बड़े एहतियात से कुर्सी पर बैठा था कि जरा सा भी आवाज़ न हो और तुम्हारी नींद में कोई खलल न पड़े लेकिन फिर भी हलकी आवाज़ हुई और तुम एकदम हड़बड़ा के उठ गयी थी. कुछ पल तो तुम ऐसे घूरते रही थी कि जैसे मुझे तुमने पहचाना ही न हो..और फिर अगले ही पल टेबल पर रखे अपने पर्स को उठा के तुमने मेरे चेहरे पे दे मारा था और गुस्से में कहा था ”तमीज नहीं है नालायक.. ऐसे कोई डराता है क्या आकर?”. मैंने फ़ौरन तुमसे माफ़ी माँग ली थी और भगवान का शुक्र अदा किया कि तुम्हारे हाथ में टेबल पर रखा वो कॉफ़ी का मग नहीं आया वरना मेरे शक्ल की जाने क्या हालत होती.

तुम उस दिन बड़े अच्छे मूड में थी और मुझे तुरंत माफ़ भी कर दिया था. लेकिन उस दिन मेरी किस्मत में तुमसे और डांट खाना लिखा था. उस नालायक रणवीर ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी. जाने कहाँ से कैफे में उसने बॉयजोन का मशहूर एल्बम ‘अ डिफरेंट बीट’ कैफे में प्ले कर दिया था. वैसे तो इसके सभी गाने तुम्हारे फेवरिट थे लेकिन एक गाना ख़ास कर के तुम्हें पसंद था..’ वर्ड्स...दिज वर्ड्स आर आल आई हैव टू टेक योर हार्ट अवे...’.

उधर इस गाने की धुन तुम्हारे कानों में पड़ी नहीं कि तुम एकदम इक्साइटेड सी हो गयी और एकदम मेरे पास आकर बैठ गयी..”कितना खूबसूरत गाना है न...याद है तुम्हें ये गाना..मैं अक्सर गाया करती थी पहले न?” तुमने मुझसे पूछा था.

मेरी हालत थोड़ी ख़राब हो गयी. वो गाना उस समय मुझे सच में याद नहीं था. बड़े दिनों बाद भी तो सुन रहा था. मुझे ये भी नहीं याद था कि मैंने ये गाना तुम्हें कभी गाते हुए सुना भी है. मैं जानता था कि ‘ना’ में जवाब देना मेरे लिए बहुत हानिकारक साबित होगा लेकिन ‘हाँ’ में जवाब दे देना और बाद में इस गाने पर पूछे किसी सवाल को न बता पाना उससे भी ज्यादा हानिकारक होता. तो मैंने हिम्मत कर के बात थोड़ा घुमा कर तुम्हें कहा था...”ऐक्चूअली पूरा गाना तो याद नहीं है..काफी पहले सुना था न...”

तुम तो लेकिन मेरे बहाने और मेरे झूठ को भी एक सेकण्ड में पकड़ लिया करती थी. “तुम्हें बिलकुल याद नहीं है ये गाना न?” तुमने गुस्से में मुझसे पूछा था. मैंने सिर हिला के ना में जवाब दिया था.

बस फिर क्या था. तुम कुछ देर तक तो गुस्से और हैरत में मेरी तरफ देखती रह गयी. दोनों हाथ हवा में खड़े कर दिए थे तुमने जिससे मुझे और डर लगने लगा था कि कहीं इस कैफे में मेरी पिटाई न हो जाए. लेकिन तुमनें बस गुस्से और डांट से ही काम चला लिया था “मैंने तुम्हें इसका कैसेट भी दिया था.. सुने भी थे क्या उस कैसेट को कभी या उसका आचार बना के खा गए थे?”

मैं एकदम सकते में आ गया था. समझ गया था मेरे उस “ना” ने अपना कमाल कर दिया है और मैं तैयार था कि आज तो अच्छी सजा झेलनी पड़ेगी.

“और कितने गुनाह करोगे दोस्त? कैसे करोगे प्रायश्चित इन सब गुनाहों का?” तुमने मुझसे ऐसे पूछा था जैसे एक गाने को भूल जाना दुनिया का सबसे बड़ा अपराध हो. मैं चुप ही रहा. ऐसे मौकों पर तुम्हारे सामने मैं सफाई देने से बचता हूँ. अक्सर ऐसा हुआ है कि सफाई देने में मेरे मुहँ से कुछ और उलटी बात ही निकल गयी है और मुझे और डांट पड़ जाती थी. फिर भी मैंने सफाई देने की कोशिश की...धीरे से तुमसे कहा “अरे यार मुझे अंग्रेजी गाने वैसे भी ज्यादा समझ में नहीं आते न..इसलिए शायद याद नहीं आ रहा हो...”

तुम कुछ देर वैसे ही गुस्से में मुझे देखती रही. फिर पीछे मुड़ कर रणवीर से कहा, “भैया इस एल्म्बम को फिर से प्ले कर देंगे? रिपीट मोड में...मुझे इस इडियट को कुछ समझाना है........प्लीज़”. रणवीर तुम्हारी ऐसी हरकतों को अब जान गया था इसलिए उसने भी मुस्कुरा के हाँ कहा दिया.

एक मास्टरनी की तरह मेरी तरफ देखकर तुमने कहा था, बहुत पढ़ लिए इंजीनियरिंग तुम, "अब चलो मैं तुम्हें ज़िन्दगी की पढाई कराती हूँ, लव नोट्स देती हूँ तुम्हें. जेब से अपनी कलम निकालो और नोट करते जाओ जो भी मैं समझा रही हूँ तुम्हें..”.

मैंने मुहँ बना कर थोड़ी असहमति जताने की कोशिश की थी लेकिन तुम फिर गुस्सा हो गयी... “मेरे यही लव नोट्स ज़िन्दगी में काम आने वाले हैं..तुम्हारी वो इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं...समझे?? तो पे अटेन्सन....” पूरे डेढ़ घंटे तक मेरी क्लास चली थी उस दिन और करीब तीन बार वो एल्बम रिपीट मोड में प्ले हुआ था उस दिन.

मुझे तो बस ये लग रहा था कि चलो मेरा कसूर तो जो था सो था, लेकिन बाकी कैफे में बैठने वालों का क्या कसूर था कि उन्हें एक ही एल्बम डेढ़-दो घंटे तक तक सुनना पड़ा था. खैर, ये सब पूछने की तुमसे हिम्मत न तो तब थी और ना अब है.

शाम काफी हो गयी थी, और तुम्हारे घर से दीदी ने कॉल कर दिया था. वो तुम्हें जल्दी घर लौटने के लिए कह रही थी. दीदी का कॉल उस दिन मेरे लिए लाइफ-सेव्यर था..वरना मेरी क्लास कैफे बंद होने तक चलती रहती.

कैफे से निकलते वक़्त भी तुमने कमाल कर दिया था. चलते चलते तुमने रणवीर से पूछा था..”आपको बुरा तो नहीं लगा न भैया? मैंने एक एल्बम इतनी देर तक प्ले करवाया..?” रणवीर भी कम बदमाश नहीं था. वो मेरी ऐसी हालत पे जरूर हँसता होगा. उसने मुस्कुराते हुए कहा “अरे बिलकुल नहीं..”.

तुम तो लेकिन तुम ठहरी.. एकदम अन्प्रिडिक्टबल. कब क्या कर दो? कब किसे क्या कह दो ये तो तुम कभी सोचती भी नहीं थी. तुमने रणवीर से कहा “असल में यू नो बात क्या है.. इसकी इंजीनियरिंग पूरी हो गयी और पढ़ाई का असर तो देखिये इसपर कैसा हुआ है? अव्वल दर्जे का नालायक हो गया है ये लड़का. जवानी में देखो बोरिंग सा हुआ जा रहा है..रोमांटिक गाने नहीं सुनता...और देखो तो इसे ये गाना भी याद नहीं था. तो मैं चाहती थी इसे सुनाऊं ये गाना.. कुछ तो सीखे ये लड़का इस गाने से और....और, और......इसी कैफे में उस साइड टेबल पर रोमांटिक गाने सुनते हुए मुझे प्रपोज कर सके...ताकि आपका ये कैफे इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए. तो यू सी, बहुत जरूरी था ये एल्बम लगातार प्ले करवाना. कल भी आउंगी, आपके पास तो इतने रोमांटिक अल्बम है, उसमे से ही कोई प्ले कर दीजियेगा और मैं कल फिर से कोशिश करुँगी कि ये थोड़ा तो इंटरेस्टिंग और रोमांटिक बने...और....”

“और तुम्हें प्रपोज कर सके? है न?” रणवीर ने तुम्हारी बात पूरी कर दी थी...और तुम्हारे जगह शर्म से मेरे गाल लाल हो गए थे.

"हाँ..हाँ...हाँ..बिलकूल. तुमने एकदम इक्साइटेड होकर कहा था." रणवीर भी तुम्हारी इस बदमाशी में पार्टनर बन गया था. उसने भी आगे बढ़ के तुम्हारा हौसला और बढ़ा दिया था और कहा था “कल आओ तुम और इसको भी लेकर आओ इस कैफे में...और जब तक तुम्हें कल ये प्रपोज न कर दे तब तक इसे इस कैफे में ही हम दोनों बंदी बना कर रखेंगे.”

तुम खुश थी...एकदम एकदम विजयी मुस्कान देते हुए, अपने कॉलर को पूरे टसन में ऊपर उठाते हुए मुझे चिढ़ा रही थी.. “देख लिया न मेरी ताकत को? मेरी पहुँच को? ये मेरा शहर है...और ये मेरा इलाका है जानी, यहाँ तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता...”


उस दिन के बाद से देखो वो गाना अब मुझे जबानी याद है. 

Smile an ever lasting smile
A smile can bring you near to me
Don't ever let me find you gone
'Cause that would bring a tear to me
This world has lost its glory
Let's start a brand new story
Now my love
You think that I don't even mean
A single word I say

It's only words
And words are all I have
To take your heart away

Talk in ever lasting words
And dedicate them all to me
And I will give you all my life
I'm here if you should call to me
You think that I don't even mean
A single word I say

It's only words
And words are all I have
To take your heart away

This world has lost its glory
Let's start a brand new story
Now my love
You think that I don't even mean
A single word I say

It's only words
And words are all I have
To take your heart away

3 comments:

  1. It's only words
    And words are all I have
    To take your heart away
    और देखो तो...I have lost all d words I had...
    यानि नालायक तो तुम सच में इतने हो कि ऐसे लिख के अच्छे भले इंसान को इतना मंत्रमुग्ध कर डालो कि वो भूल ही जाए कि उसको कहना क्या है ☺��

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  2. बहुत खूब ऐसे ही लिखते रहो। हम आपके फैन है और
    हमेंशा रहेंगे आप अपने फैन्स को अच्छी अच्छी पोस्ट देकर खुश रखना....

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  3. दिल को छू लन वाले शब्द ......................... कहानी स ज्यादा कविता लगीं
    पहली बार आपके ब्लाँग पर आया हूं पर आपको पढ़ने के बाद आते रहना होगा
    http://savanxxx.blogspot.in

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया