Wednesday, July 15, 2015

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मीट क्यूट

“मीट क्यूट?”
“हाँ मीट क्यूट...”
“क्या बोल रही हो? ऐसा कोई भी शब्द नहीं है..”
“है...है ऐसा शब्द.. तुम्हें क्या पता.
याद है हमारी शुरुआत की कुछ मुलाकातें?”
“हाँ याद है..”
“जानते हो, वैसी मुलाकातें दो प्यार करने वालों की, जब दोनों पहली बार मिलते हैं एक दूसरे से. अंजान रहते हैं एक दूसरे से और वो पहली ना भूलने वाली प्यारी और यादगार मुलाकातें होती हैं, जब दोनों को लगता है दोनों एक दूसरे की तरफ किसी डोर से खिंचे  चले जा रहे हैं. वो मीट क्यूट होता है. हम दोनों की शुरू की कुछ मुलाकातें ऐसी ही थी.
 We didn’t run into each other, but somehow there was an invisible string pulling us closer. That sweet romantic moments like us…in which two individuals come together in most fascinating circumstances, dreamy, destined-to-fall-in-love-and-be-together-forever sort of way is the meet cute.”

“ये फिर से तुम्हारे मन की कोई बदमाशी है क्या? तुम्हारा कोई लॉजिक?”

“साहब ये बकवास नहीं है. कुछ पढ़ा लिखा कीजिये. इस मीट क्यूट पर जमाने से लोगों को विश्वास है. कितनी फ़िल्में बनी हैं बस इस एक शब्द पर, कितनी  किताबों में इसका जिक्र है...और तुम हो कि कुछ पता ही नहीं. ये बहुत प्यारा होता है. मीट क्यूट. तुम्हें सुनना है हमारे कौन कौन से मीट क्यूट हुए थे?”
“हाँ, सुनाओ..”
“तो सुनो...वैसे तो बहुत सी मुलाकातें थी, लेकिन ख़ास कर के पहली चार मुलाक़ात जिसके बाद हम एक दूसरे के करीब आये वो तुम्हें बताती हूँ. हमारे वे मीट क्यूट मोमेंट्स.”
हमारी सबसे पहली मुलाक़ात याद है तुम्हें? तुम उस टेक्नीकल सेमिनार प्रेजेंटेशन में पहला पुरस्कार जीते थे और मैं उसी दिन एक दूसरे इवेंट, सिंगिंग काम्पिटिशन में चौथे स्थान पे आई थी, मुझे कोई पुरस्कार नहीं मिल सका था. मैं थोड़ी निराश और उदास थी. हम एक दोस्त के जरिये पहली बार मिले थे, पहली बार तुम्हारे बारे में पता चला था मुझे और पहली बार हम एक दूसरे से बात किये थे. तुमने मुझसे पूछा, कि तुम्हारा इवेंट कैसा रहा. मैंने जवाब दिया था, अच्छा होता इवेंट तो तुम्हारे पास जितनी बड़ी ट्रॉफी  है, उतनी बड़ी ट्रॉफी  मेरे पास भी होती. तुम शायद समझ गए थे मेरे कहने का मतलब. तुमने अपनी ट्रॉफी  मुझे देते हुए कहा था...किसने कहा तुमने कुछ नहीं जीता, ये लो तुम्हारा पुरस्कार और इसे अपने पास ही रखो. इन लोगों को कोई अक्ल नहीं किसकी आवाज़ सुरीली है और किसकी घिसी हुई, और ये जज बने फिरते हैं. मेरे लिए तो तुम ही विनर हो”.
सच में, कितने प्यारे तरीके से तुमने कहा था मुझसे, मैं तो उस वक़्त जैसे निहाल ही हो गयी थी. तुमने फिर मुझे अपनी ट्रॉफी  थमाई, और बड़े प्यार से मेरी तरफ देखा. हमने अनजाने ही एक दूसरे का हाथ थाम लिया था. यू नो, वो हमारा पहला मीट क्यूट था. 

फिर दूसरी मुलाक़ात.. दूसरी मुलाक़ात याद है तुम्हें? कुछ दिन बाद ही हुई थी हमारी दूसरी मुलाक़ात. मुलाकातें तो वैसे हर दिन होती थी, तुम मुझे देखते थे और मैं तुम्हें. तुम बुद्धू थे, बोलते नहीं थे कुछ और मैं सोचती रहती थी ये कब बात करने आएगा. उस दिन भी तो तुम कितने डरे हुए से थे न, और मैने तुम्हें परेशान भी तो कर दिया था. याद है न तुम्हें. कॉलेज ऑफिस में हमारी मुलाकात थी वो. शनिवार का दिन था. बहुत कम लोग उस दिन कॉलेज आते थे, और ऑफिस स्टाफ भी आम तौर पे गायब ही रहते थे. मैं एक कांउटर पे खड़ी थी, तुम अन्दर आये और चुपचाप मेरे पीछे खड़े हो गए, बुद्धू इतने थे कि चुप से रहे तुम बिलकुल. बस मुझे चुपचाप देख रहे थे, और मैं हर बार की तरह यही सोच रही थी, ये बेवकूफ बात क्यों नहीं कर रहा. हम दोनों ही अकेले थे वहाँ ,, कोई भी नहीं था. लेकिन तुम बिलकुल चुप से मेरे पीछे खड़े रहे. काउंटर स्टाफ जब अचानक दाखिल हुआ ऑफिस में तो तुमने  हड़बड़ी में जेब से कुछ निकालते वक़्त खुल्ले पैसे नीचे गिरा दिए थे. तुम्हें लगा वो पैसे मेरे पर्स से गिरे हैं, और तुमने कहा “सुनो, तुम्हारे पैसे नीचे गिरे हैं...”. मैंने एकदम टफ लुक देते हुए ये जताते हुए कि लाइन मारने का ये तरीका बहुत पुराना है, कहा था... “मेरे पैसे नहीं हैं, खुद गिराते हो पैसे और खुद मुझसे कहते हो कि तुम्हारे पैसे गिरें...ह्म्म्म?” तुम एकदम डर से गए थे. नहीं नहीं...कहते रह गए तुम और मैं अपनी इस बदमाशी पर मन ही मन खूब हँस रही थी. कुछ देर बाद घर वापसी के लिए मैं उसी कॉलेज बस में बैठ गयी जिसमें तुम बैठे थे. मैंने पहले ही तुम्हें देख लिया था कौन से बस में तुम बैठे हो. पूरी बस खाली थी फिर भी तुम्हारे बगल में ही आकर मैं बैठ गयी थी. थोड़ा अफ़सोस भी था मुझे कि तुम्हें बेवजह परेशान कर दिया, तुमसे बस में सॉरी कहा. तुम कोई किताब पढ़ रहे थे 
मैंने तुमसे पूछा “ये कौन सी किताब पढ़ रहे हो तुम?” 
तुमने कहा “प्यार की किताब पढ़ रहा हूँ...तुम भी पढ़ना”.
“प्यार की किताब पढ़ना मतलब? कहना क्या चाहते हो तुम?” मैंने फिर से एक टफ लुक देते हुए तुमसे कहा था? तुम फिर एकदम से हड़बड़ा गए.
“अरेररे..मेरे कहने का मतलब था रोमांटिक नॉवेल है ये ‘द नोटबुक’ नाम है इसका...सॉरी तुम्हें कुछ गलत लगा हो तो”
तुम एकदम से सफाई देने लगे थे मुझे, कितने क्यूट लग रहे थे तुम ऐसे सफाई देते हुए और मुझे लगातार हँसी आ रही थी. मैंने फिर तुम्हें कहा, चिल यार..मैं बस मजाक कर रही थी. तुम भी फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कराने लगे थे. वो हमारा दूसरा मीट क्यूट था. 

इन दोनों मुलाकातों के बाद वैसे तो हमारी बातचीत होने लगी थी, लेकिन ज्यादा नहीं. हमारी अच्छी और पक्की दोस्ती किस दिन शुरू हुई थी ये याद है तुम्हें? तुम्हारे जन्मदिन से एक दिन पहले का दिन था वो. यही जुलाई का महीना था और उस दिन भी बारिश हो रही थी जैसे आज हो रही है. तुम उस दिन कॉलेज की सीढ़ियों पर अकेले बैठे थे और मेरी वापसी की बस छूट गयी थी. छूट क्या गयी थी, तुम्हें बैठे देख सीढ़ियों पर मैंने जान बूझकर बस छोड़ दिया था. सोचा,  देखती हूँ तुम मुझसे बात करते हो या नहीं. मुझे अपने पास बुलाते हो या नहीं. शुक्र था उस दिन तुमने टोका मुझे, “बस छूट गयी तुम्हारी...” तुमने पूछा था मुझसे, और मैंने तुम्हारे पास आकर कहा था “जान बूझकर छोड़ी है बस, तुमसे बात करने के लिए...” और मैं भी सीढ़ियों पर तुम्हारे पास आकर बैठ गयी. तुम्हारे लिए जन्मदिन का तोहफा पहले से मेरे बैग में रखा था, उसे मैंने तुम्हें दिया, तुमने पूछा मुझसे, तुम्हें कैसे पता मेरा जन्मदिन कल है? मैंने कहा था, आपके बारे में सब पता है हुज़ूर...और उसी पेन से जो मैंने तुम्हें तोहफे में दिया था, तुम्हारी हथेलियों पर लिख दिया था - हैप्पी बर्थडे टू यू, फ्रॉम योर स्वीट फ्रेंड. अपना नाम भी तुम्हारी हथेलियों पर लिखा था मैंने. तुम मुसकुरा दिए थे मेरी तरफ देख कर और कहा था मुझसे, “थैंक यु”. मुझे आज तक समझ नहीं आया वो थैंक यु किसके लिए था? तोहफे के लिए या तुम्हारी हथेलियों पर मैंने अपना नाम लिखा था उसके लिए...जिसके लिए भी था, वो हमारा तीसरा मीट क्यूट था. 

और चौथी मुलाक़ात..वो तो बेहद रूमानी सी थी. हम दोनों एक ही मार्केट में थे. एक ही दुकान में. तुम पहले से उस दुकान में थे और मैं वहां आ गयी...एंड लेट मी रीमाइन्ड यू अगेन, मैं तुम्हें फ़ॉलो नहीं कर रही थी, ये खुशफहमी जाने क्यों तुम्हें आज तक बनी रह गयी. बस होते गया ऐसा कि जिस जगह तुम थे वहीं मैं आ जाती थी. किस्मत यू  नो..किस्मत. दुकान से निकलते ही बारिश शुरू हो गयी. मैं अपना छाता लिए सड़क के किनारे आकर ऑटो के इंतजार में खड़ी हो गयी. तुम कुछ देर बाद दुकान से निकले, और स्टाइल मारते हुए अपने बाइक से मेरे पास आकर खड़े हो गए. “ऑटो नहीं मिलेगी...छोड़ दूँ तुम्हें घर?” तुमने पूछा था, और मैं तो हैरानी में तुम्हें बस देखती  रह गयी. ये गज़ब कैसे हो गया आज? तुम इतना हिचकते थे बात करने में और तुमने ही आकर पूछा. मैं भी झट से बाइक पर तुम्हारे पीछे बैठ गयी. 

देखो, तुम बारिश में भीग कर जाते, तुम्हारे पास बाइक थी, छाता नहीं. मेरे पास छाता था लेकिन घर जाने के लिए सवारी नहीं मिल रही थी. तुम मिल गए मुझे, तुमने ही आकर पूछा, और मैं तुम्हारे साथ बाइक पर बैठ गयी. मेरे लिए तो एकदम परफेक्ट मोमेंट था वो. पूरे रास्ते मैं बारिशों वाले गाने गाते आ रही थी और तुम मुस्करा रहे थे, मुड़ मुड़ के बहाने से मेरी तरफ देख रहे थे. मैंने तुमसे कहा जब आगे देखकर चलाईये हुज़ूर, कहीं एक्सीडेंट न हो जाए. तुमने जवाब दिया था “तुम्हें कुछ भी नहीं होने दूंगा, घबराओ मत”. हम चाचा के दुकान पे भी रुके थे और बारिश में भीगते हुए चाय पिये थे. चंदू के दुकान के भुट्टे भी खाए थे हमनें. मेरे लिए वो बारिश डेट थी तुम्हारे साथ. तुम पहली बार मेरे से इतना खुल के बात कर रहे थे और मैं तो बस मन ही मन खुश ही हुई जा रही थी. कितना रूमानी दिन था न वो. हमारा चौथा मीट क्यूट. 

जानते हो, अगर सोचो तो हमारी हर मुलाक़ात अब तक एक मीट क्यूट ही था. कितनी अच्छी यादें हैं न हर मुलाकात की. हम बेहद खुशनसीब हैं...पता है यहाँ लोगों को एक मीट क्यूट नहीं मिल पाता और हमारे देख लो कितने मीट क्यूट हुए हैं. जैसे सच्चा प्यार हर किसी को नहीं मिल पाता न, वो सोलमेट जैसा प्यार. ठीक वैसे ही मीट क्यूट सबके लिए नहीं होते, लेकिन हमारे लिए थे और वो भी इतने सारे...हमारे सभी मीट क्यूट...स्वीमीट क्यूट मुलाकातें.. 

स्वीमीट क्यूट मुलाकातें ? 

हाँ.. स्वीमीट क्यूट मुलाकातें. कितनी मीठी मुलाकतें होती हैं हमारी...तो वो सभी मीठी मुलाकतें को हम क्या कहेंगे न? स्वीमीट क्यूट(Sweemeet Cute) मुलाकातें ही न...!

5 comments:

  1. पता है यहाँ लोगों को एक मीट क्यूट नहीं मिल पाता और हमारे देख लो कितने मीट क्यूट हुए हैं. जैसे सच्चा प्यार हर किसी को नहीं मिल पाता न, वो सोलमेट जैसा प्यार. ठीक वैसे ही मीट क्यूट सबके लिए नहीं होते, लेकिन हमारे लिए थे और वो भी इतने सारे...हमारे सभी मीट क्यूट...स्वीमीट क्यूट मुलाकातें..

    सच्ची रे...:*
    btw...i m loving it...<3

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ४ का चक्कर - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. एक मुस्कान तैर गयी चहरे पर :)
    मीट क्यूट :)

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया