Monday, January 12, 2015

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कुछ पल...तुम्हारे नाम...

जो लड़का देखता था

वो दिसम्बर की एक सर्द सुबह थी. जिधर देखो घना कोहरा...लड़के ने खिड़की से बाहर झाँका और खुश हो गया. उसक पसन्दीदा वातावरण था. टी.वी की न्यूज़ एंकर लाख कहती रहे, घने कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लड़के की दिली तमन्ना थी कि आने वाले दो-तीन दिन यूँ ही रहें...घने कोहरे में डूबी सड़कें, पेड़-पौधे...और उनको चीरती दूर से आ रही किसी मोटर की मद्धिम सी हेडलाइट.

लड़के ने एक बार फिर घड़ी पर निगाह डाली. सुबह के साढ़े आठ बज रहे थे. यानि लड़की से उसकी मुलाकात में मात्र 25 घण्टों का फ़ासला...और कुछ सौ किलोमीटर की दूरी... कल के बारे में सोच कर ही उसके दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी. क्या करेगा वो कल, जब महीनों बाद उसकी ज़िन्दगी उसके सामने होगी...? वो तो जो करेगा, सो करेगा, पर लड़की कैसे और क्या करेगी, सोच के उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान खिल गई...पगली है वो तो...

हाँ सच में, पागल ही तो थी वो दुनिया की सबसे ज़्यादा भोली और मासूम लड़की...। दुनिया के लिए वह चाहे जो भी हो, उसके लिए हमेशा किसी बच्चे-सी मासूम ही रहेगी. उसकी हरकतें, ख़्वाहिशें, बातें, शिकायतें...उसकी उम्र की लड़कियों के मुकाबले वो कोरा पागलपन होगा, पर वो ऐसी ही थी...कम-से-कम उसके सामने वो अपने असली रूप में होती थी...हमेशा...

लड़की की नज़र से

जिस दिन से लड़के ने उसे बताया, मिलने को तैयार रहना, तुम्हारे शहर आ रहा हूँ...लड़की के मानो पंख लग गए थे. लड़के ने टिकट कन्फ़र्म होते ही सबसे पहले उसे ही सूचना दी थी. अपनी आदत के मुताबिक लड़की ने उसी समय उससे आने और जाने की दोनो ट्रेनों की पूरी डिटेल्स मँगवा ली थी. लड़के को कभी कभी हल्की कोफ़्त भी होती थी...वो कहीं भी जाए...मीलों दूर बैठी वो आखिर कर क्या लेगी...? क्या ड्राइवर के माथे पर दोनाली टिका कर बोलेगी, ट्रेन जल्दी-जल्दी...बिना रुके चलाने को...? या फ़िर बाकी की सब ट्रेनें रुकवा कर उसके लिए लाइन क्लीयर करवाएगी. पर उसकी बहुत सारी बचकानी ज़िदों की तरह वो हमेशा उसकी ये ज़िद भी मान जाता था...चुपचाप...

लड़की को भी वैसे तो कोहरा बहुत पसन्द था, पर जाने क्यों अबकी उसकी ख़्वाहिश थी कि जब लड़का उसके पास आए, आकाश में तेज़ धूप खिली रहे...पूरे दिन...

"मैं तुम्हारे साथ उस खिली धूप में छत पर बैठना चाहती हूँ..." लड़की ने जब कहा तो लड़का हल्का चौंक गया,'छत...? माने...? अबकी तुम बाहर नहीं मिलोगी क्या...?'

लड़की उसके सामने नहीं थी, पर वो जानता था, उसकी बात सुन कर उसने उसी यूनिक तरीके से मुँह बिचकाया होगा,‘आर यू आउट ऑफ़ योर माइंड ऑर वॉट, मिस्टर...? भूल गए, उस पूरे हफ़्ते घर में बस मैं और दी ही रहेंगे...पूरी फ़ैमिली निखिल भैय्या की शादी में शहर से बाहर रहेगी न...'

लड़के के दिल की धड़कन ये सोचने मात्र से बढ़ सी गई थी. सहसा लड़की भी खामोश हो गई थी... दोनो की चुप्पी भी मानो कितना कुछ कह रही थी. लड़की ने दिन गिने थे...मात्र पच्चीस दिन...और एक बार फ़िर कुछ लम्हें...कुछ घण्टे सिर्फ़ उन दोनो के...लड़की ने मन-ही-मन हिसाब लगाना शुरू कर दिया था....अब की मिलेगी तो क्या-क्या कहना है उसे लड़के से...सब कुछ उसने अपने मन की डायरी में नोट करना शुरू कर दिया था. लड़का तो अपने पास किसी भी रूप में ये सब बातें नोट कर भी लेता था, पर लड़की चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकती थी. घर पर किसी ने भी पढ़ लिया तो उसके बाद जो भयानक तूफ़ान आता, उसकी कल्पना मात्र से वह सिहर उठती थी. उसका जो भी हो, उसे परवाह नहीं थी, पर लड़के पर राई भर भी बात आए, ये उसे बिल्कुल गवारा नहीं था.

यूँ तो लड़का कभी उसकी किसी भी बात से इरीटेट नहीं होता था, या कम-से-कम उसे तो यही जताता था, पर जाने क्यों अब उससे ही जाने-अन्जाने ऐसी ग़लतियाँ होने लगी थी जिसे करने के साथ ही उसे अहसास हो जाता था कि उसकी वो ग़लती शायद माफ़ी के क़ाबिल नहीं... लड़के की जगह कोई और होता तो उसे कभी माफ़ न करता, पर वो तो बस वो ही था न...लड़की को दिल के किसी कोने में एक ढाँढस रहता था कि ज़िन्दगी में अगर कभी वह सच में ऐसा कुछ ग़लत कर बैठी, तो और कोई उसके साथ हो न हो, लड़का तब भी मजबूती से उसके साथ खड़ा नज़र आएगा. अबकी बार उसके पहले नम्बर पर उन सब गलतियों के लिए लड़के को एक्स्प्लनेशन देना था.

गिनते-गिनते आखिर वो दिन आ ही गया। रात में खुशी के मारे लड़की की नींद कई बार टूटी, पर सुबह वह हर दिन से ज़्यादा तरोताज़ा थी. भगवान भी जैसे उसके साथ थे, तभी तो बहुत खिल कर धूप निकली थी...कई दिन के छाए कोहरे के बाद...अचानक ही... लड़की ने चुपके से दुआ माँगी...लड़के की ज़िन्दगी में भी अभी जो कोहरा छाया है, वो भी ऐसे ही छँट जाए...

कॉलबेल बाद में बजी, चेहरे पर हज़ार वॉट की मुस्कान लिए हुए लड़की ने दरवाज़ा पहले खोल दिया. लड़का दो पल अपलक उसे देखता रह गया. 'मिस्टर...यूँ ही देखते रहने का इरादा है या अपनी एक इच्छा भी पूरी करोगे...?' कहते हुए जब तक वह कुछ समझ पाता, लड़की ने एक झटके से उसे अपनी बाँहों में भरा और जाने क्या फ़ुसफ़ुसाते हुए अलग भी हो गई...लड़का लाख पूछता रह गया, पर लड़की ने उसकी बात पूरी तौर से इग्नोर कर दी... वो कैसे बताती कि उसके इस अप्रत्याशित हरकत से हतप्रभ रह गए लड़के से उसने कहा था, 'Hold me back...tightly...You Stupid...'

लड़के को आया देख कर दी भी बाहर आ गई थी. उनसे बात करते हुए जितनी बार लड़के की निगाह लड़की से टकराई, वो उसे अपलक ताके जा रही थी...मानो उसकी मौजूदगी के हर पल को वो हमेशा के लिए अपनी यादों में फ़्रीज़ कर लेना चाहती हो. लड़का हमेशा की तरह सब समझ रहा था...उसकी न रुकने वाली बेतहाशा हँसी...उसकी वो हल्की सी मुस्कान...और उन सबके पीछे कहीं बहुत गहरे छिपे उसके आँसू...

लड़के को तो जैसे महारत हासिल थी उसका मन पढ़ने में...वो लाख कोशिश कर लेती कि उससे बात या मैसेज करते समय वो अपने मनोभाव छुपा ले, पर हर बार चोरी पकड़ी जाती. ऐसे में लड़की का फ़ेवरिट डायलॉग होता,'बताओ मिस्टर...ये तुमने अपना कैमरा छुपाया कहाँ है...? आखिर तुमको पता कैसे चल जाता है सब असलियत...’ जवाब में लड़का बस्स...क्यूँ बताऊँ...कह कर बात ऐसे पलट देता कि बातें खत्म होते-होते लड़की सब कुछ भूल कर बस खिलखिला रही होती. लड़की ने बहुत कोशिश की कि वो भी ये कला सीख जाए...जब कभी लड़का यूँ उदास हो, वो उसको भी हँसा सके...पर ऐसा हो कहाँ पाता था. लड़का हमेशा कहता था कि वो उसकी हर बात जानती है, पर फिर भी लड़के की उदासी के पलों में अक्सर उसे महसूस होता...उन दोनो के बीच कोई तो पारदर्शी दीवार थी...जिसके उस पार लड़के के दुःख थे और जहाँ उसका पहुँच पाना लड़के ने जानबूझ कर प्रतिबन्धित कर रखा है...

थोड़ी देर उनके पास बैठ कर...चाय-नाश्ता करवा कर दी ऑफ़िस चली गई थी. दी को उन दोनो पर पूरा भरोसा था. अकेले रहने के बावजूद दोनो अपनी सीमा से बाहर नहीं जाएँगे, ये वो बहुत अच्छे से जानती-मानती थी. घर से बाहर तो लड़की अनगिनत बार लड़के के साथ अकेली रही थी, पर घर की चारदीवारी में उसके साथ बिल्कुल अकेले रहने का यह पहला मौका था. कुछ देर वे दोनो ही एक अजीब सी खामोशी में घिरे बैठे रहे...फिर लड़की ने ही चुप्पी तोड़ी थी, 'सुनो साहब...ये न समझना कि तुम मेरे घर आए हो तो नवाबों की तरह बैठे रहोगे और मैं दौड़ दौड़ कर तुम्हारी चाकरी करूँगी...तुमको भी सब काम में मेरा हाथ बँटाना पड़ेगा...Is that clear...?'

लड़की और भी जाने क्या-क्या हिदायतें दिए जा रही थी, पर लड़का बस मन्द-मन्द मुस्कराता हुआ उसे अपलक देखे जा रहा था, मानो वो कोई बच्ची हो और वो उसकी तोतली ज़बान सुन कर आनन्दित हो रहा हो. लड़की सहसा चिढ़ गई, 'ऐसे न देखो मिस्टर...मैं तुमसे बड़ी हूँ...रिमेम्बर...?'  ये भी लड़की की अजीब सी सनक थी, उससे बड़ा बनने की...। इसके लिए उसने एक अजीब फ़ण्डा बनाया हुआ था,’तुम 87 में पैदा हुए हो...मैं 88 में...हुई न तुमसे एक साल बड़ी...? चलो, अब से आइन्दा इज्ज़त से पेश आना मेरे साथ...।' लड़का भी पलटवार करता,'अच्छाऽऽऽ...एक भी बात या हरकत बता दो अपनी जिससे साबित होता हो कि तुम बड़ी हो गई हो...बच्ची नहीं हो अब भी...?’ और लड़की बहुत याद करने पर भी एक बात ऐसी नहीं बता पाती थी, जो उसने लड़के के सामने समझदारी से की हो... ऐसे में वो बुरा सा मुँह बना कर रूठ जाती और फिर लड़के को ही मनाना पड़ता उसको...एक बच्ची की तरह...

लड़की उस दिन भी अपने उसी फ़ुलटूश बचकाने मूड में थी... ‘चलो जीऽऽऽ...भगवान जब मेरे सपने आज पूरे कर ही रहा है, तो छत पर चल कर धूप भी सेंकते हैं तुम्हारे साथ...’ लड़की लड़के का हाथ पकड़ कर उसे लगभग खींचते हुए छत पर ले गई...वहाँ भी उसकी बतकही में कोई कमी नहीं आई थी, पर जाने कैसे, किस मोड़ पर बात लड़की के जीवन के कुछ दुःखद पलों पर चली गई, दोनो ही नहीं जान पाए... लड़की नहीं चाहती थी कि सब कुछ जानने-समझने के बावजूद उस खूबसूरत से दिन...उन मधुर पलों में लड़का उसके आँसू देख कर ज़रा भी उदास हो...इस लिए जैसे ही भागने के लिए वो उठी, लड़के ने तेज़ी से उसका हाथ थाम उसे अपने सीने से लगा लिया. लड़की ने बहुत हल्का-सा विरोध किया, पर अन्दर-ही-अन्दर वो यही चाह रही थी. अपने सीने से कस कर चिपकी सुबकती लड़की के बालों में प्यार से हाथ फिराते लड़का सिर्फ़ यही दोहरा रहा था,’Its Okay Sweetheart...सब ठीक हो जाएगा...’

कुछ पलों में शान्त होकर भी लड़की वैसे ही उसके गले में बाँहें डाले आँखें बन्द किए खामोश बैठी रही. वो मन-ही-मन बुदबुदा रही थी,’भगवान जी...मुझे कभी इन बाँहों के घेरे से अलग न करना... कितना सकून...कितनी सुरक्षा है इनमें...। and you mister...Listen...Just hold me tightly, You Idiot..'


बिना कुछ भी सुने...बिना कुछ भी जाने...और बिना कुछ भी सोचे...लड़के ने भी अपनी आँखें मूँदी और मन में बोला...आमीन !!

11 comments:

  1. wowwwww....so beautiful :) Loved this post a lot....a lottttt :) :) :)
    Keep writing Abhishek jii....

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  2. मज़ा आ गया अबिशेक जी ...
    हमेशा की तरह ताज़ा .. एक सांस में पढने वाले पल ...

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  3. Awwwwwww......soooovery cute abhishek :)

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