Friday, October 19, 2012

लिखने की वजहें...


लड़का जब भी अपनी खुद की कहानियों से उबने लगता, जब उसे ये लगता की इन कहानियों को लिखकर कुछ भी हासिल नहीं होने वाला, ये बकवास बातें लिखना सिर्फ उसका पागलपन है और जब कभी वो फैसला करता की "अब ये बकवास बातें और नहीं लिखूंगा", ठीक उसी वक़्त ये बकवास बातें लिखने की उसे कोई न कोई वजह मिल ही जाती थी...

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लोग मशगूल थे सब शादी में
रस्में मंडप में चल रही थीं उधर,
दूर उस लॉन की सरगोशी में
तन्हाँ बैठे हुए थे हम दोनों
और अचानक बजी गाने की धुन
तुम उठी, उठके नाचने भी लगी,
मुझको तो नाचना आता ही नहीं.
तुमने पीछा शुरू किया मेरा
मैं तो बस गोल-गोल भागा फिरा
ऐसे जैसे न पकड़ पाओ मुझे.
और फिर रुक गयीं अचानक तुम
हंसके बोली कि बड़े बुद्धू हो
मन्त्र पंडित जी पढ़ रहे थे वहाँ
और हम गोल-गोल घूमें यहाँ.
देख लो सात पे रुकी हूँ मैं
कोई वादा नहीं लिया मैंने
मैं बिना शर्त बस तुम्हारी हूँ
अपनी मम्मी से कहके घर रख लो!

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एक पॉडकास्ट : तुम्हारे ख़त 


(पॉडकास्ट का टेक्स्ट पढने के लिए इस लिंक पर जाएँ
पॉडकास्ट क्रेडिट : अर्चना चाओजी