Monday, October 15, 2012

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मिस्टिरीअस अक्टूबर -२-


वे अक्टूबर के दिन थे जब वो छुट्टियाँ बिताने शहर आई हुई थी.उन्ही दिनों मेरे एक करीबी रिश्तेदार की शादी तय हुई.मेरी ईच्छा थी की उस शादी में वो भी शामिल हो.मुझे पता था की वो शुरू में नखरे दिखायेगी, लेकिन फिर भी मैं उसे मना लूँगा.मैंने तय किया की शादी का कार्ड देने मैं उसके घर जाऊँगा और उसके माता-पिता के हाथ में ही कार्ड दूंगा.कार्ड देने जब उसके घर जा रहा था, तो बेवजह ये सोच कर घबरा रहा था की उसके माता-पिता क्या सोचेंगे.उन्होंने बल्कि बहुत आराम से उसे शादी में शामिल होने की अनुमति दे दी.जब उसके घर से वापस आ रहा था, वो मुझे छोड़ने बाहर की गली तक साथ आई.उसने मुझे याद दिलाया की मैं उसके घर ठीक तीन साल बाद आ रहा हूँ.तीन साल पहले जब उसके घर आया था तो उसकी दीदी से मैंने वादा किया था की अपने परिवार के अगली शादी में उन्हें जरूर बुलाऊंगा.ये बात मुझे भी याद थी...लेकिन मैंने जान-बुझकर इस बात का जिक्र नहीं किया था..चलते वक़्त उसने मुझसे कहा "तुम अगर इस शादी में ना भी बुलाते मुझे, तो भी मैं जरूर आती".


मैंने उसे शादी के दिन शाम में आने को कहा था लेकिन वो सुबह ही पहुँच गयी थी..मैं छत पर कुछ तैयारियों में व्यस्त था की उसकी गाड़ी आते दिखाई दी...और मैं दौड़ते हुए उसे रिसीव करने नीचे गेट के पास पहुंचा.गेट के पास कुछ मेहमान और मेरे कुछ रिश्तेदार कुर्सियां डाल कर बैठे हुए थे.वहीँ पास में मेरी माँ और भाभी खड़ी थीं.मेरी भाभी से वो पहले भी एक बार मिल चुकी थी.गाड़ी से उतरते ही उसकी नज़र मेरी माँ पर गयी.उसने मेरे कानों में कहा "सुनो जनाब, आंटी वहां खड़ी हैं...अब बताओ अगर ऐसे में तुमको मैं अभी एक 'किस' कर लूँ, तो सोचो तुम्हारा क्या हाल होगा".ये कहने के बाद वो बिलकुल बेपरवाह तरीके से हंसने लगी..उसकी इस बेपरवाह हंसी से वहां बैठे कुछ रिश्तेदार हम दोनों को शक की नज़रों से देखने लगे..मेरी कुछ बहनें जो वहां खड़ी थी, उन्होंने कानाफूसी भी शुरू कर दी "लगता है ये भैया की गर्लफ्रेंड है".

माँ और भाभी हमारे पास आयीं तो मैंने उसका परिचय माँ से करवाया...मैंने कहा "ये मेरी सबसे अच्छी दोस्त है"....माँ ने जब पूछा "ये तुम्हारी सबसे अच्छी दोस्त तुम्हारे साथ कॉलेज में पढ़ती है या स्कुल की दोस्त है?" तो जबतक मैं माँ के इस प्रश्न का कुछ जवाब दे पाता, पीछे से भाभी ने एक जबरदस्त गुगली फेंक दिया "अरे ये झूठ बोल रहे हैं, इनकी दोस्त वोस्त नहीं है...ये आपकी होने वाली बहु है...प्यार करते हैं ये जनाब इनसे".  भाभी का ये गुगली इतना स्ट्रोंग था की उसके तो होश ही उड़ गए थे और मुझे भी चक्कर सा आ गया था...हम दोनों भाभी के इस गुगली से बिलकुल क्लीन बोल्ड हो गए थे.मैं भाभी के तरफ गुस्से से देखने लगा लेकिन फिर भी उनकी बातों का मैंने कोई विरोध नहीं किया...शुक्र इस बात का था की भाभी के इस गुगली को माँ ने सिरिअसली नहीं लिया और वो भी हंसने लगीं...

उसे देख जहाँ एक तरह कुछ लोग हैरान थे और उसे मेरी गर्लफ्रेंड मान लिए थे वहीँ दूसरी तरफ मेरी सभी बहनें उससे मिलकर बेहद खुश थीं..मेरी बहनों को खुश करने के लिए उसने कोई कसर भी नहीं छोड़ा था, सबके लिए वो कुछ न कुछ तोहफे लायी थी.उसकी चुलबुली हरकतों ने मेरी बहनों के साथ साथ मेरे परिवार में सबका दिल जीत लिया था..वो घर के कामों में मेरी बहनों का हाथ बटाने लगी.चाय भी उसने ही सबके लिए बनाई....और तब मुझे सही में यकीन हो गया की उसे चाय बनाने आती है.शो-ऑफ़ करना और खुद की तारीफ़ करना उसे सबसे ज्यादा पसंद है...मेरी बहनों और भाभियों को उसने ये बता दिया था की उसने हाथों में मेहँदी लगाने का कोई कोर्स किया हुआ है...फिर क्या था, घर की सभी लड़कियां उसे घेर के बैठ गयीं और उससे मेहँदी लगवाने लगीं....वो घर में इस कदर हिल मिल गयी थी की कुछ लोग तो उसे घर का ही कोई सदस्य समझने लगे थे...शाम में बारात निकलने के कुछ देर पहले जब उसे कुछ फुर्सत मिली तो मेरे पास आकर बैठ गयी...कहने लगी मुझसे "तुम्हारी फैमली कितनी प्यारी सी है, काश मैं हमेशा के लिए तुम्हारे इस परिवार का एक हिस्सा बन जाऊं".मैं कुछ भी नहीं कह सका, सिर्फ उसे देखता रहा..

बारात में वो शुरू में ही मुझसे खफा हो गयी...उसने कह रखा था की पुरे बारात के दौरान मैं उसके साथ ही रहूँ...लेकिन मैं अपने बड़े मामा के साथ सबसे पीछे चल रहा था..इसकी मुख्य वजह ये थी की बारात में मेरी बहनें परिवार के सभी सदस्यों को खींच ला रही थीं नाचने के लिए और मुझे और मामा को इससे बचना था, इसलिए हम दोनों बारातियों से थोड़ी दुरी बनाकर चल रहे थे.वो पुरे बेफिक्री में मेरी बहनों के साथ नाच रही थी और जब न तब मुझे देख कर गुस्से में अजीब अजीब सी शक्लें बना रही थी और लगातार इशारों से मुझे नाचने के लिए बुला भी रही थी...लेकिन मैं अपनी जगह से हिला भी नहीं..वैसे मुझे उसे नाचते हुए देखने का बड़ा मन था, लेकिन कोई नाचने के लिए खींच लेगा, इसका डर ज्यादा था...इसलिए मैंने अपने मन पर बड़ी मुस्किल से काबू किया.

मेरी सभी बहने उसके बारे में मेरे से इतना सुन चुकीं थी, की सबको उससे ढेर सारी बातें करनी थीं...हम लोगों ने प्लान बनाया की शादी की रस्में जब शुरू होंगी, तो हम सब लॉन के एक कोने में अपनी महफ़िल सजा लेंगे, और वो महफ़िल पूरी रात चलेगी.हम सबने वही किया भी...लॉन के एक कोने में हम जाकर बैठ गए और पूरी रात बातों और मजाकों का सिलसिला चलता रहा...उस महफ़िल में वैसे तो ज़्यादातर मेरी टांग-खींचाई ही होती रही, लेकिन उस रात हम सबने अपने ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत पल जिये थे.करीब तीन घंटे हम सब बातें करते रहे और उसके बाद मेरी बहनों को शादी के कुछ रस्मों के लिए जाना पड़ा.वो भी मेरी बहनों के साथ जा रही थी, लेकिन मैंने उसे रोक लिया...

कुछ देर हम दोनों खामोश से बैठ रहें..बैकग्राउंड से कुछ पुराने गानों की आवाज़ आ रही थी...

"ये सब गाने कितने बार सुनती रहती हूँ, लेकिन ऐसे शादी के पंडालों में जब ये गाने बजते हैं तो कुछ अलग सा लगता है न", उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा.

"हाँ, मुझे याद है जब मेरी मौसी की शादी हुई थी बहुत साल पहले, तब मैं अक्सर 'डेक' वालों के पास चला जाता था इंस्ट्रकसन देने के लिए की कौन से गाने बजने चाहिए"..

"ह्म्म्म" उसने मेरी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.वो कुछ सोचने लगी :

"अच्छा ये बताओ, तुम्हे याद है...उन दिनों जब जाड़ों की सुबह हम कंप्यूटर क्लासेज के बाद चचा की दुकान पे चाय पीते थे, तो चचा के 'डेक' में भी ऐसे गाने बजते थे...मुझे वैसा ही कुछ फील आ रहा है"...बैकग्राउंड में बज रहे गानों की तर्ज पे वो बैठे बैठे ही झुमने लगी थी...."आओ न, लेट्स डांस टू दिस सॉंग"..उसने मुझे खींचते हुए कहा...

"पागल मत बनो.." मैंने उसे थोड़ा डांट सा दिया..

"ओफ्हो...तुम सच में बोरिंग हो....अच्छा बताओ तुम नाचने से घबराते क्यों हो...आज बारात में नाचने क्यों नहीं आये, पता है मैं कित्ता गुस्सा हुई थी...देखो तो मेरे हाथ अभी तक लाल हैं गुस्से से"  उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मुझे दिखाया.

"अच्छा, हाथ लाल हो गए, मैंने तो सुना था की चेहरा लाल होता है गुस्से से"

"सुनो मिस्टर, बात को मोड़ो मत...चेहरा क्या, हाथ पैर सब लाल हो जाते हैं गुस्से से.....अच्छा जल्दी बताओ तुम आज नाचे क्यों नहीं बाराती मे"

"अरे, मुझे नाचना अच्छा नहीं लगता...अनकम्फर्टेबल महसूस करता हूँ..बस इसलिए".. मैंने सफाई देने की कोशिश की लेकिन मेरे इस सफाई पर वो हंसने लगी...कहने लगी "हाँ, तुम्हारे चेहरे से तो वो पता ही चल रहा था..कितने डरे हुए से लग रहे थे तुम...और तुम्हारे मामा भी...मेरा तो दिल किया तुम दोनों को जबरदस्ती पकड़ के नचा दूँ...लेकिन...."

लेकिन क्या...तुम आ जाती...और हमें भी नाचने के लिए जबरदस्ती खींच ही लेती जैसे तुमने मेरी मौसी को खींचा था...कम से कम इसी बहाने परिवार के बाकी लोगों को मुझे और मामा को नाचते हुए देखने का मौका तो मिलता...

"हाँ वो तो ठीक है लेकिन मेरी उस संस्कारी लड़की के टैग का क्या होता जो तुम्हारे परिवार वालों ने आज दिया है मुझे...सब को लगता की लड़की तो बिगड़ी हुई है केवल सबको नचाते रहती है....पता है कितना बेशकीमती होता है ये संस्कारी और सुशिल लड़की का टैग.... "

नहीं, कम से कम तुम्हारे बारे में तो ऐसा कोई भी नहीं सोचता...ये मैं जानता हूँ... "मैंने पुरे विश्वास के साथ कहा.

"अच्छा...लेकिन तुम ये कैसे जानते हो ?" उसने पूछा..

"बस ऐसे ही....कुछ है कारण, किसी और दिन बताऊंगा"  (मैंने बात को टालने के लिए ये कह दिया था..लेकिन कारण मैं जानता था..उसकी इतनी बातें मैंने अपनी दोनों भाभी, मामी और मौसी को बताई थी की मेरे आधे घरवाले उससे बहुत अच्छी तरह से वाकिफ हो गए थे. )

"अच्छा, ये शादी बहुत ख़ास है न तुम्हारे परिवार के लिए..देखो, तुम्हारे घर के सभी लोग नाच रहे थे...

"हाँ, पता है ये एक जेनरेसन की आखिरी शादी है...तो खास तो होनी ही है...

"ओह अच्छा...हाँ...फिर तो बहुत ही स्पेशल शादी है, और शादी को ख़ास बनाने की एक और वजह है देखो....मैं...मैं आई हूँ न इस शादी में... " अपनी तारीफ़ करने का वो एक मौका भी नहीं छोडती थी..और उसकी इस बेवकूफी भरी बातों पर मुझे हमेशा बहुत प्यार आता..

"पता है तुम्हारी फैमली मुझे बिलकुल उस फिल्म की फैमली की तरह लगती है, जो तुम्हे और तुम्हारी बहनों को सबसे ज्यादा पसंद है".

अच्छा, ऐसा तुम्हे क्यों लगा?

"देखे नहीं सब कैसे एक दुसरे को जबरदस्ती खींच ला रहे थे नाचने के लिए...ख़ुशी झलक रही थी सबके चेहरे से...और फिर कैसे गोलगप्पे के स्टाल पर सब एक दुसरे को जबरदस्ती एक के बाद एक गोलगप्पे खिला रहे थे...मेरे भी मुहं में आठ दस गोलगप्पे ठूंस दिए गए थे...पता नहीं किन किन लोगों ने खिलाया मुझे...याद भी नहीं.."  वो कुछ सोचने लगी, शायद ये याद करने की कोशिश कर रही हो की किस किस ने उसे गोलगप्पे खिलाये थे.

"हाँ, थोड़ी पागल सी फैमली है मेरी...लेकिन कुछ साल पहले अगर मेरे परिवार के किसी फक्सन में शामिल होती शायद तुम्हे कुछ और पागलपन देखने को मिलते...कुछ रिश्तेदार थोड़े अलग से रहने लगे हैं आजकल..." मैंने कहा.

"तुम्हे याद है, जब तुम हमारे घर आये थे विडियो कैसेट लेकर...तुम्हारे जाने के बाद दीदी ने ऐसा कुछ गेस किया था..वो कहती थी की तुम्हारे घर के पुरानी शादियों में जो ख़ुशी दिखती थी, वो तुम्हारे परिवार के इधर के शादियों में देखने को नहीं मिलती....दीदी कहतीं थी...." वो कहते कहते रुक सी गयी...अचानक अपनी दीदी का जो उसने जिक्र छेड़ दिया था, उसके लिए मैं भी बिलकुल तैयार नहीं था, और एकाएक हम दोनों के बीच एक सन्नाटा सा छा गया...

उसकी आँखें अचानक से नम हो गयीं थी... उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया...कहने लगी " माफ़ कर देना तुम मुझे...कम से कम आज के दिन मुझे ऐसे उदास होकर रोना नहीं चाहिए...अच्छा शगुन नहीं होता"

उसकी ये बेवजह का गिल्ट और मुझसे ऐसे माफ़ी माँगना मुझे अच्छा नहीं लगा...और मैंने उसके आंसू पोछते हुए उसे थोड़ा डांटते हुए कहा "कैसी बातें करती हो तुम...आज के दिन तो हम दोनों को उन्हें याद करना चाहिए..उनके बिना तो आज के दिन का कोई महत्त्व ही नहीं है"

"हाँ जानती हूँ मैं...जब मैं सुबह आ रही थी न यहाँ, तो पुरे रास्ते मुझे दीदी की बहुत याद आई.." वो कुछ और कहना चाह रही थी लेकिन कहते कहते बीच में ही वो रुक गयी...कुछ देर तक हम दोनों चुप ही बैठे रहे...बिलकुल खामोश

हम दोनों के बीच पसरी उस ख़ामोशी को तोड़ने के लिए और बातों का रुख मोड़ने के लिए मैंने कहा उससे...."पता है तुम्हे, इस हरी साड़ी में तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो आज...मोहल्ले के सभी लड़के आज सिर्फ तुम्हे ही देख रहे थे....." वो इस बात पर मुस्कुराने लगी...अपनी तारीफ़ सुनने के बाद तो वो वैसे भी मुस्कुराने ही लगती है...फिर अपने ट्रेडमार्क अंदाज़ में उसने कहा "तुम मुझे क्या कह रहे हो...देखो तो लेदर जैकेट,जींस और इस कूल से कैप में तुम कितने मस्त दिख रहे हो..और वो पीली साड़ी वाली गन्दी सी लड़की तुमपर बहुत लाईन मार रही थी...मैं शुरू से उसे नोटिस कर रही थी" उसके चेहरे पर उसकी ट्रेडमार्क हंसी और उसके जलन वाले एक्स्प्रेसन वापस लौट आये थे...जिससे मुझे बड़ी राहत सी मिली..

मैंने जानबूझकर उसे चिढ़ाने के लिए कहा "पीली साड़ी वाली?? अच्छा, मैंने तो उसपर ध्यान ही नहीं दिया...रुको जाकर बात करता हूँ..."

"हहं,...ध्यान नहीं दिया??????......अरे जनाब, लड़के लोग तो लड़कियों पर खूब ध्यान देते हैं....तुम कोई प्लूटो से थोड़े ही आये हो...जो अलग होगे...चुपचाप बैठे रहो..."

हम दोनों कुछ देर तक एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते रहे और अजीब अजीब से शक्लों में एक दुसरे को चिढाते रहे...ये अजीब शक्लें बनाकर एक दुसरे से सवाल जवाब करने का और एक दुसरे को चिढ़ाने का खेल भी मुझे इसी लड़की ने सिखाया था....तब तक सुबह भी हो गयी थी और शादी की रस्में भी खत्म हो गयीं थी.मेरी बहनें भी तब तक हम दोनों के पास आकर बैठ गयीं थी और सुबह की पहली चाय भी हमारे टेबल पर आ गयी थी....बैकग्राउंड में एक गाना बज रहा था, मैंने इशारों में उसे वो गाना सुनने के लिए कहा...उसने सुन कर अपनी आँखों से जवाब दिया था...."हमेशा याद रखूंगी..."

ये लम्हे ये पल हम बरसो याद करेंगे...



11 comments:

  1. भाई, मैं तुम्हारी जगह हॉट तो कमेन्ट का ऑप्शन रखता ही नहीं...

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  2. kuchh afsaane khamoshi se byan hote hai aur khamosh hi sune jaate hai

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  3. तुम्हारा ये पोस्ट पढते वक्त बक एक ही ख्याल मेरे दिल-ओ-दिमाग में चलता रहा मैं बिलकुल गुम सा था....अपने खायालो में!!!!

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  4. लोग मशगूल थे सब शादी में
    रस्में मंडप में चल रही थीं उधर,
    दूर उस लॉन की सरगोशी में
    तन्हाँ बैठे हुए थे हम दोनों
    और अचानक बजी गाने की धुन
    तुम उठी, उठके नाचने भी लगी,
    मुझको तो नाचना आता ही नहीं.
    तुमने पीछा शुरू किया मेरा
    मैं तो बस गोल-गोल भागा फिरा
    ऐसे जैसे न पकड़ पाओ मुझो.
    और फिर रुक गयीं अचानक तुम
    हंसके बोली कि बड़े बुद्धू हो
    मन्त्र पंडित जी पढ़ रहे थे वहाँ
    और हम गोल-गोल घूमें यहाँ.
    देख लो सात पे रुकी हूँ मैं
    कोई वादा नहीं लिया मैंने
    मैं बिना शर्त बस तुम्हारी हूँ
    अपनी मम्मी से कहके घर रख लो!

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    1. S-p-e-e-c-h-l-e-s-s!!! :)

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    2. ह्म्म्म!!..अभि...!

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  5. वह चुलबुली लड़की दिखती रही पूरी पोस्ट पढ़ने तक...सजीव चित्रण किया है|

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  6. हमेशा की तरह बहुत सुन्दर मनभावन...
    :-)भावनाओं से ओत प्रोत....

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  7. अपने खूबसूरत ट्रेडमार्क अंदाज़ को यूँ ही बनाए रखो ..ढेरों शुभकामनाये और आशीष..

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया