Tuesday, September 18, 2012

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तुम बिन -२-



उसके पास दुनिया के कई खूबसूरत शहरों के बारे में कई ऐसी ऐसी जानकारियां थी की लड़का हमेशा उसके इस ज्ञान से आश्चर्यचकित हो जाता था.जितने शहरों के बारे में वो लड़के को बताती, उनमे से किसी भी शहर के बारे में लड़के के पास कोई जानकारी नहीं होती थी.उसने एक शाम लड़के को एक लिस्ट दिखाई थी जिसमे उन शहरों के नाम थे जहाँ वो जाना चाहती थी.उसने जब लड़के से पूछा की उस लिस्ट में उसका सबसे फेवरिट शहर कौन सा है, तो लड़का थोडा चौंक सा गया...उसे समझ में नहीं आया कि वो क्या जवाब दे...बहुत गहराई से सोचने के बाद लड़के ने "ज़ुरिक" कहा(वो भी सिर्फ इसलिए की यश चोपरा की फ़िल्में अधिकतर "स्विटज़र्लंड" में ही शूट होती थीं).लड़के के इस जवाब से लड़की बहुत खुश हो गयी.ज़ुरिक जाने की ईच्छा लड़की को भी बहुत थी.दोनों ने उस शाम एक पैक्ट बनाया की उस लिस्ट को वो दोनों हमेशा अपडेट करते रहेंगे और जितने भी शहरों के नाम उस लिस्ट में हैं, वहां वे दोनों जायेंगे.दोनों नादान और नासमझ थे.दोनों को ये यकीन था की ऐसा जरूर होगा और दोनों लिस्ट में शामिल हर शहर एकसाथ घूमेंगे.

उन्ही दिनों इन्टरनेट शहर में नया नया आया था और जगह जगह नए साइबर कैफे खुल गए थे.लड़के ने एक साइबर कैफे में जाकर इन्टरनेट इस्तेमाल करना सीखा था.वो हर शाम लड़की के साथ अपने मोहल्ले के एक साइबर कैफे में जाता.वहां दोनों बैठकर लड़की के लिस्ट में जितने शहर थे, उनके बारे में जानकारी इकठ्ठा करते.टुरिज़म वेबसाईट पर लड़की को किसी शहर की कोई तस्वीर अगर अच्छी लग जाती तो वो उस तस्वीर का प्रिंट निकलवा लेती थी.लड़की जब भी किसी तस्वीर का प्रिंट निकलवाती तो उस तस्वीर पर लड़के से दस्तखत ले लेती और खुद भी छोटा सा कोई 'कोट' लिखकर वहां दस्तखत कर देती थी.वो इन तस्वीरों को अपने डायरीनुमा एक फोल्डर में रख लेती थी.उन दोनों ने एक शाम एक दुसरे से प्रोमिस किया था की जितने जगहों की तस्वीरें उनके पास हैं, वहां वे दोनों साथ जायेंगे और उन जगहों पर जाकर दोनों वहां की तस्वीरों पर फिर से दस्तखत करेंगे.

उन दिनों एक बहुत ही प्यारी फिल्म आई थी -तुम बिन.दोनों ने ये फिल्म एक साथ देखि थी.उस फिल्म में कैनेडा का एक शहर कैलगरी की सुन्दरता देख दोनों मंत्रमुग्ध थे.दो घंटे की फिल्म के दौरान दोनों के ज़ेहन में  फिल्म की कहानी, किरदार, गाने और कैलगरी इस कदर बस गया था की दोनों हर शाम प्लानिंग करते की वे वहां जायेंगे और उन्ही सब जगहों पे घूमेंगे जहाँ शेखर और पिया घूमते थे.'बार्ले मिल' में जाकर कॉफ़ी पियेंगे और "डॉगीवुड" गिफ्ट स्टोर में जाकर दोनों एक दुसरे के लिए तोहफे खरीदेंगे.क्रिसलर के उसी कन्वर्टबल गाड़ी('98 Sebring) में बैठकर उस 'लेक' के किनारे जायेंगे, जहाँ पर फिल्म का एक बेहद खूबसूरत गाना फिल्माया गया था.उस लेक के किनारे बैठकर लेक की उस पर तस्वीर पर अपने दस्तखत करेंगे जिसका प्रिंटआउट लड़की ने इन्टरनेट से निकलवाया था.



बहुत सालों बाद जब लड़की अपना वादा तोड़ते हुए कैलगरी चली गयी, तो उसने वहां से लड़के को फोन किया.फोन करने का मकसद को लड़के को जलना था, लेकिन फोन पर बात करते करते वो खुद ही बेहद भावुक हो गयी, कहने लगी की वहां दोनों ने साथ जाने का सपना देखा था जो शायद अब कभी पूरा नहीं होगा..उसने लड़के से ये भी कहा की वो अपने साथ वो तस्वीर भी लेती आई थी जिसे वर्षों पहले उन दोनों ने अपने शहर के किसी साइबर कैफे से निकलवाया था.लड़की ने लड़के से कहा "इत्तेफाक तो देखो ज़रा, हम दोनों ने जिस दिन तस्वीर पर दस्तखत किये थे, ठीक उसके दस साल दस दिन बाद मैं यहाँ पर आई हूँ, लेकिन अकेले.लेक के किनारे बैठकर बहुत देर तक बहुत कुछ सोचती रही और उस तस्वीर को देखती रही, ये लेक ठीक वैसा ही दीखता है जैसा हमने दस साल पहले तस्वीरों में देखा था.मैंने अपने बैग से वो तस्वीर तो दस्तखत करने के लिए ही निकाले थे लेकिन पता नहीं दिल में क्या ख्याल आया की मैंने उस तस्वीर के टुकड़े टुकड़े कर उसे फाड़ कर वहीँ फेंक दिया..लड़की की आवाज़ में एक भींगा सा कम्पन आने लगा था...वो खामोश हो गयीं थी...फोन की दूसरी तरफ लड़का स्तब्ध सा उसकी ख़ामोशी और उसके आंसुओं को सुन रहा था.उस रात और उसके बाद कई रातें लगातार लड़का सो नहीं सका...

आज भी रातों को लड़के की नींद अचानक से टूट जाती है और उसके कानों में लड़की के वे शब्द गूंजते रहते हैं - "उस तस्वीर के टुकड़े टुकड़े कर उसे फाड़ कर वहीँ फेंक दिया"



तुम बिन 

12 comments:

  1. काश ये सपने सच भी हो जाते पर अमूमन सपने ठीक वैसे ही सच नहीं हुआ करते जैसा हम देखते हैं बल्कि वो किसी और तरह से हमारे सामने हमारी हकिक़त बन कर आते हैं.

    दोस्तों मेरी आपसे येही गुजारिश है की अपने जिंदगी से न निराश हों अपने सपनो की वजह से. हमारा उनसे सामना होगा जरूर पर रब जाने किस शकल में.

    उम्मीद पर दुनिया कायम है.

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  2. काश ये सपने सच हो जाते..

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  3. तस्वीर के टुकड़ों के साथ पता नहीं लड़की ने क्या क्या फैंक दिया होगा ...
    पर बेचारा वो लड़का ... जो सो नहीं पाया अनेक दिन ... क्या अब सो पाता है वो ...

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  4. gahan ehsaas .....
    bahut khoobsoorat likha hai ...

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  5. वत्स!! फिल्म इजाज़त में पागलपन की इन्तिहाँ देखी थी... सोचा था, इससे ज़्यादा कोई पागल नहीं हो सकता और यहाँ तक सोच पाना गुलज़ार साहब के ही बस की बात है.. आज तुम्हारे इस पागलपन ने स्पीचलेस कर दिया!!पूरी पोस्ट एक लंबी नज़्म की तरह है!!

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  6. बढ़िया लिखा है !!अच्छी फिल्म बन सकती हैः)

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  7. प्लान बनाये तो मुकम्मल न हुए कोई बात नही। सपने देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है ।

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