Sunday, April 8, 2012

ट्रैफिक के शोर में प्यार के तीन शब्द

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कितना अजीब होता है न, कभी कभी एक छोटी सी बात यादों के कितने तहे खोल जाती है.वे बातें जो लगभग हम भूल चुके होते हैं, या भूलने का ढोंग कर रहे होते हैं,अचानक बिना कोई वार्निंग दिए सामने आ जाती हैं.सड़क पर चलते हुए किसी जाने पहचाने गाने की धुन का सुनाई देना, किसी की खिलखिलाती हुई हंसी या किसी फ्लावर शॉप में बिक रहे जामुनी रंग के खूबसूरत फूल..हरेक  छोटी सी छोटी बात कभी कभी यादों का ऐसा तूफ़ान साथ ले आती है, की जिससे बचने की कोई गुंजाईश नहीं होती.फिर दिन,महीने बीत जाते हैं उन बातों और यादों में.कभी सोचता हूँ तो कितना अजीब लगता है की किसी अनजान महिला के हाथों की मेहँदी और हरी चूडियाँ,खुद को किस तरह टाईम मशीन में बिठा के वापस उन दिनों में ले जाते हैं, जो बेहद खूबसूरत दिन थे.और जहाँ से वापसी का रास्ता बड़ा मुश्किल से मिलता है.

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वे शुरू वसंत के दिन थे.लड़का और लड़की, दोनों को ये वसंत का मौसम बड़ा अच्छा लगता था.गर्मियों और सर्दियों का कम्बाइन्ड इफेक्ट जैसा कुछ होता है इस मौसम में.ये लड़की उन दिनों कहा करती थी.सर्दियाँ खत्म नहीं हुई थी और शाम में हलकी धुंध सड़कों पे हो जाया करती थी.वे दोनों देर शाम तक साथ रहते..या तो पार्क में बैठे रहते या फिर सड़कों पे घूमते.सड़कें बेहद व्यस्त रहती.लेकिन दोनों उसी सड़क के चक्कर काटते रहते.लड़के ने उन दिनों एक खेल शुरू किया था जिसकी खबर सिर्फ उसे थी, लड़की को उसने इस खेल के बारे में कुछ नहीं बताया था..वैसे उन दिनों इस खेल के अलावा भी बहुत कुछ ऐसा था जिसकी खबर सिर्फ उस लड़के को थी,लड़की को नहीं.व्यस्त सड़कों पे चलते हुए जब भी कोई तेज रफ़्तार की गाड़ी होर्न बजाते हुए पास से गुज़रती, तो लड़का उस लड़की को चुपके से 'आई लव यु' कहता.ये 'आई लव यु' इतना धीमे होता की ट्रैफिक और गाड़ियों के शोर के नीचे दब के रह जाता और खुद उस लड़के को भी सुनाई नहीं देता की उसने क्या कहा.लड़का जब भी लड़की से प्यार के ये तीन शब्द कहता तो उसे कम से कम इस बात की खुशी रहती की उसने अपने दिल की बात कह दी है.लेकिन लड़का जब भी लड़की से ये तीन शब्द कहता,लड़की हमेशा बड़े विस्मय से उसके तरफ देखती, और उस समय उसके चेहरे का भाव भी कुछ इस तरह का होता की लड़के को एक पल ये भ्रम होता लड़की सब जानती है, उसके दिमाग में क्या चल रहा, वो कौन सी बात उससे छुपा रहा है और उसने वे तीन शब्द भी सुन लिए जिसे वो खुद भी नहीं सुन पाया था.लड़की जब उससे पूछती की उसने क्या कहा तो लड़का कुछ भी बहाना बना देता था.लेकिन उसे हमेशा लगता की लड़की को सब पता है..जबकि लड़की को कुछ भी पता नहीं रहता, ये मात्र उसका वहम था.

फिर कुछ साल गुज़रे, लड़की को अब लड़के की सभी बातें मालुम हैं और वो भी लड़के से प्यार करने लगी है...एक सर्दियों की शाम आई..वे पुराने दिनों की तरह ही सड़कों पे चल रहे थे, की अचानक लड़के को अपने उस खेल की याद आई.उसने फिर से गाड़ियों के शोर के बीच लड़की से 'आई लव यु' कहा.हमेशा की तरह लड़की ने जब उससे पूछा की उसने क्या कहा, तो लड़के ने इस बार जवाब में कहा "मैंने तुम्हे आई लव यु कहा".लड़की इस जवाब के लिए तैयार नहीं थी और एक पल तो उसे लगा की वो क्या करे..वो शरमाने लगी और बस एक 'धत्त' कह कर लड़के को अपने से अलग धकेल दिया..लड़के ने फिर उससे कहा - 'पता है पहले जब हम युहीं सड़कों पे घुमा करते थे तो मैं अक्सर ट्रैफिक के शोर में तुम्हे 'आई लव यु' कहता था, लेकिन तुम सुन नहीं पाती थी और मैं अपनी बेवकूफी पे खुश हो जाया करता था'.लड़की को अब समझ में ही नहीं आ रहा था की वो इस बात का क्या जवाब दे...इस बार वो कुछ भी नहीं कह सकी.'धत्त' भी नहीं, बस उसकी नज़रें नीची हो गयी, और चेहरा बिलकुल सुर्ख लाल.लड़के ने पहली बार उसका चेहरा शर्म से लाल होते देखा था.

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