Monday, March 12, 2012

// // 19 comments

आखिरी मुलाकात

अभिनव और स्नेहा के बीच जो रिश्ता था उसे सबसे अच्छी तरह अभिनव की छोटी बहन रिया ही समझ सकती थी और शायद इसलिए जब दोनों को अलग होना पड़ा तो सबसे ज्यादा तकलीफ रिया को ही हुई थी.रिया की बहुत ईच्छा थी की वो स्नेहा से आखिरी बार मिल सके.एक हफ्ते पहले स्नेहा सिर्फ एक दिन के लिए शहर आई थी अभिनव से मिलने.रिया को जैसे ही ये खबर मिली की स्नेहा आने वाली है, उसने तय कर लिया था की उससे वो भी मिलेगी.लेकिन अचानक तबियत खराब हो जाने की वजह से रिया स्नेहा से नहीं मिल पायी.उस शाम जब अभिनव स्नेहा से मिल कर वापस आया तो चुप-चाप सा अपने कमरे में बैठा हुआ था.वो उदास भी था और खुश भी.उदास इसलिए था की ये स्नेहा से उसकी आखिरी मुलाकात थी, और खुश इसलिए था की ये आखिरी मुलाकात बेहद यादगार और खूबसूरत थी.जब से अभिनव घर आया, तब से ही रिया उससे स्नेहा के बारे में पूछना चाह रही थी, लेकिन उस शाम रिया ने अभिनव से कुछ नहीं पूछा.वो जानती थी की ये शाम अभिनव अकेले बिताना चाहता है.अगले सुबह जब रिया अभिनव के लिए चाय लेकर आई, तब उसका सबसे पहला सवाल स्नेहा के बारे में ही था.

अभिनव और रिया भाई बहन थे, लेकिन एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त भी और स्नेहा से जुड़ी लगभग हर बात अभिनव रिया को बताता था.स्नेहा से हुई मुलाकात के बारे में भी अभिनव ने रिया को सब कुछ बताया ..बातों ही बातों में अभिनव ने ये रिया को बताया की स्नेहा कुछ दिनों के लिए अपने नेटिव शहर जाने वाली है.चुकि स्नेहा का शहर कोई ज्यादा दूर नहीं था इसलिए रिया ये खबर सुनते ही स्नेहा के शहर जाने की जिद  करने लगी.अभिनव चाहता तो रिया की इस जिद को टाल भी सकता था, लेकिन शायद अंदर ही अंदर वो खुद भी चाहता था की स्नेहा से एक और मुलाक़ात हो.स्नेहा की ये ख्वाहिश भी थी की अभिनव उसके शहर आये और उसके साथ उसका शहर घुमे.अभिनव भी चाहता था की स्नेहा के जाने से पहले वो एक बार उसके शहर जाए..वो उस मोहल्ले को भी देखना चाहता था जहाँ की हर छोटी सी छोटी बात स्नेहा उसे बताया करती थी.अब रिया के जिद के वजह से ही सही, उसके सामने स्नेहा के शहर जाने का मौका था जिसे वो गंवाना नहीं चाहता था.

रिया और स्नेहा के बीच अच्छी दोस्ती भी थी तो रिया को उसके स्केजुल की पूरी खबर थी.लेकिन अभिनव और रिया दोनों में से किसी ने स्नेहा को कुछ भी नहीं बताया था, दोनों स्नेहा को एक ऐसा सरप्राईज देना चाहते थे जिसे वो उम्र भर याद रखे.तीन दिन बाद अभिनव और रिया स्नेहा के शहर पहुंचे..वे देर शाम वहाँ पहुंचे.अभिनव के एक दो परिचित उस शहर में रहते थे लेकिन उसने होटल में ही रुकना मुनासिब समझा.रिया शाम से ही स्नेहा से मिलने की जिद पकड़ बैठी थी, लेकिन अभिनव ने उसे समझाया और कहा की हम अगली सुबह ही उससे मिलने जायेंगे और पूरा दिन उसके साथ ही बिताएंगे.

अगले दिन सुबह जब दोनों स्नेहा के घर के लिए निकल रहे थे तो उन्हें होटल के मैनेजर से पता चला की आज पुरे शहर में चक्का जाम है.कहीं कोई भी सवारी नहीं मिलेगी.एक रिक्शा तक नहीं, नाही कोई प्राईवेट टैक्सी.मैनेजर ने अभिनव को सलाह दिया की आज होटल में ही रुक जाएँ.इधर रिया अभिनव को कोस रही थी की वो कल शाम ही क्यों नहीं स्नेहा के घर जाने को तैयार हो गया.अभिनव भी थोड़ा परेसान सा हो गया.उसे ये पता था की अगले दिन सुबह स्नेहा की फ्लाईट है और बस एक ही दिन उसके पास है.उसने स्नेहा का एड्रेस होटल मैनेजर को दिखाया तो मालुम चला की स्नेहा का घर होटल से करीब तीन-चार किलोमीटर की दुरी पे है.दोनों ने तय किया इतने दूर आकार वे खाली हाथ नहीं लौटने वाले,और दोनों स्नेहा के घर पैदल ही निकल गए.

होटल मैनेजर ने उन्हें स्नेहा के घर जाने का रास्ता अच्छे से समझा तो दिया था लेकिन फिर भी उन्हें काफी पूछताछ करनी पड़ रही थी.अभिनव मन ही मन सोच रहा था कितनी कन्फ्यूजिंग गलियां हैं और स्नेहा इन्ही गलियों की तारीफ़ किया करती थी.अभिनव और रिया दोनों बातें करते हुए जा रहे थे.बातें स्नेहा से ही सम्बंधित हो रही थी.अभिनव हमेशा स्नेहा से जुड़ी खट्टी-मीठी यादें रिया को बताते रहता था, और रिया भी इन बातों को सुन बहुत खुश होती थी.दोनों बातें करते करते बहुत दूर तक निकल आये थे.एक मोड़ पे पहुँचते ही सहसा अभिनव के पांव ठिठक गए.रिया ने मुड़कर उसे देखा,और पूछा क्या हुआ?रुक क्यों गए?अभिनव ने एक दुकान की तरफ इशारा करते हुए कहा - ये देखो, "बिस्वास स्वीट्स", यहाँ से अब स्नेहा का घर पास में ही है..इस दूकान के बारे में वो हमेशा बात करती थी..यहाँ के रसगुल्ले की वो खूब तारीफ़ करती थी..अभिनव वहीँ उसी दूकान के सामने कुछ पल खड़ा रहा, और मुड़कर रिया को कहता है, देखो सामने जो गली जाती है न, बस उसी में सबसे आखिर वाला मकान है उसका.

दोनों स्नेहा के घर के आगे खड़े थे.एक नज़र देखने से अभिनव को ऐसा लगा जैसे वो कई बार इस घर में आ चूका है.ये अलग बात थी की वो पहली बार यहाँ आया था.स्नेहा ने अपने घर और मोहल्ले के बारे में इतना कुछ बताया था की उसे हर चीज़ जानी-पहचानी सी लग रही थी.स्नेहा पहली मंजिल पे रहती थी.अभिनव को ये देख बेहद आश्चर्य हुआ की पहली मंजिल पर जाने वाली लोहे की घुमावदार सीढियां एकदम वैसी ही हैं जैसी उसके एक करीबी दोस्त के घर हुआ करती थी, लेकिन स्नेहा ने उससे आजतक कभी इन घुमावदार सीढ़ियों का जिक्र क्यों नहीं किया? जबकि स्नेहा ये अच्छे से जानती थी की अभिनव को घुमावदार लोहे की सीढियां हमेशा से अच्छे लगते हैं और उसे वो अपने दोस्त के घर की घुमावदार सीढ़ियों पर हुए कितने ही दिलचस्प किस्सों को सुनाया करता था.

रिया और अभिनव पहली मंजिल पर पहुंचे तो देखा की वहाँ एक बड़ा सा ताला लटका था.दोनों एक दूसरे को देखने लगे.रिया को बेहद आश्चर्य हुआ.उसने यहाँ आने से पहले कन्फर्म कर लिया था की स्नेहा आज के दिन घर में ही रहेगी.अभिनव ने कहा - हो सकता है की कहीं बाहर कुछ काम से गयी हो. रिया ने स्नेहा को कॉल किया,तो उसका मोबाइल भी बंद पड़ा था.अभिनव नीचे किरायेदार से पूछताछ करने उतरा.पता चला की स्नेहा अपने मामा के घर गयी हुई है और शायद वहीँ से वो वापस चली भी जायेगी.दोनों परेसान हो गए.उसके मामा का घर कहाँ था, ना तो उन्हें ये पता था और नाही स्नेहा का फोन लग रहा था.दोनों बेहद उदास, वापस जाने ही वाले थे की एकाएक अभिनव को याद आया की स्नेहा हमेशा अपनी एक सहेली "निवेदिता" का जिक्र करती थी, जो उसके किरायेदार की बेटी है.अभिनव ने स्नेहा से कहा की वो जाकर एक बार किरायेदार की बेटी को बाहर बुलाये.निवेदिता बाहर आई.वो अभिनव को देखते ही पहचान गयी.

निवेदिता से मालुम चला की स्नेहा के मामा की तबियत अचानक खराब हो जाने के वजह से वो दो दिन से अपने मामा के पास ही है और वो वहीँ से वापस भी चली जायेगी.निवेदिता ने कहा की स्नेहा की बहन का फोन नंबर उसके पास है, और वे चाहे तो उसे फोन कर के खबर कर सकती है.अभिनव ने निवेदिता को फोन करने को कहा.निवेदिता जैसे ही फोन लगाने जा रही थी की तभी अभिनव ने उसे रोका.अभिनव ने निवेदिता से आग्रह किया की स्नेहा को वो सिर्फ ये बताये की रिया अकेले आई हुई है.वो चाहता था की स्नेहा के सामने वो एकाएक जाए.निवेदिता ने स्नेहा को फोन किया और ठीक वैसा ही कहा जैसा अभिनव ने उसे कहने के लिए कहा था.स्नेहा ने जब ये सुना कि रिया अकेली आई है, तो एक पल तो उसे विश्वास नहीं हुआ.जब उसने रिया की आवाज़ सुनी तब जाकर उसे यकीन हुआ.स्नेहा ने फोन पर रिया को थोड़ा डांटा भी..की वो अकेले ऐसे क्यों आ गयी?रिया ने उसे बताया की कुछ जरूरी काम के सिलसिले में वो अपने चाचा के साथ आई थी और आज का दिन खाली था तो उसने सोचा की उससे मिल लूँ.स्नेहा ने पूछा की वो घर तक किसके साथ आई है, तो उसने कहा की उसके चाचा उसे यहाँ तक छोड़ गए थे.

स्नेहा ने रिया से कहा की आज तो उसका आना मुमकिन नहीं है, सवारी का कोई भरोषा नहीं और उसका भाई भी घर में नहीं है जो उसे वहाँ पहुंचा सके.स्नेहा ने निवेदिता से बात की.स्नेहा ने निवेदिता से कहा था की सामने जो ऑटो वाले मुखर्जी चचा रहते हैं,अगर वो घर पे हों तो वो रिया को स्नेहा के मामा के घर तक पहुंचा सकते हैं..निविदेता ने जाकर मुखर्जी चचा से बात की और वो जाने को राजी हो गए.रिया और अभिनव दोनों उस ऑटो-रिक्शे में बैठ गए.स्नेहा ने रिया से कहा था की सीधा उसके मामा के घर ही आ जाए,लेकिन रिया ने जिद की कहीं बाहर मिलने की.स्नेहा ने कहा की उसके मामा के एपार्टमेंट के ठीक सामने एक कॉफी शॉप है, वे वहाँ मिल सकते है.

अभिनव और रिया की सरप्राईज पर तो वैसे ही पानी फिर चूका था.ये सरप्राईज वैसा नहीं था जैसा उन्होंने सोचा था.शायद इसलिए भी अभिनव ने निवेदिता से कहा की वो बस रिया के आने की ही खबर स्नेहा को दे.शायद वो चाह रहा था की कम से कम एक स्ट्रोंग सरप्राइज तो स्नेहा को मिलना ही चाहिए.अभिनव ने रिक्शे वाले चचा से कहा की स्नेहा के मामा के घर वाली सड़क आने के पहले ही वो उसे बता दें ताकि वो पहले ही ऑटो से उतर जाए.अभिनव ने दूर से ही देख लिया की स्नेहा अपने अपार्टमेंट के गेट के बाहर खड़ी है.वो हरी साड़ी में थी और बेहद खूबसूरत दिख रही थी.इतनी दूर से भी अभिनव उसे अच्छे से देख पा रहा था.

जैसे ही रिया रिक्शे से उतरी स्नेहा ने उसे गले लगा लिया.बीच सड़क पे दोनों ऐसे गले मिल रही थीं जैसे वर्षों की बिछड़ी बहनें हों.दोनों पास वाले कॉफी शॉप में चली गयीं.अभिनव भी उस कॉफी के पास पहुंचा.अभिनव ने तो पहले सोचा की वो कॉफी शॉप के बाहर ही थोड़ी देर इंतज़ार करेगा, लेकिन उसने देखा की जहाँ रिया और स्नेहा बैठी हुई थी, उसके ठीक सामने वाली टेबल खाली थी और वो उसपर जाकर बैठ सकता था.वो स्नेहा के पीछे वाली टेबल थी और स्नेहा उसे देख नहीं पाती.अभिनव वहाँ जाकर चुपचाप बैठ गया.

स्नेहा रिया को बहुत सारी बातें बता रही थी..ऐसी बातें जो उसने शायद किसी से अब तक नहीं कही थी.परिवार की परेशानियाँ,मजबूरियां और उलझनें.रिया के दिल में भी बहुत सी बातें थी, जिसे वो स्नेहा से कह रही थी.अभिनव ने महसूस किया की रिया और स्नेहा दोनों बातें करते वक्त काफी भावुक हो गयीं और दोनों के शब्द अटक अटक कर बाहर आ रहे थे.

स्नेहा,रिया और अभिनव तीनो ये अच्छे से जानते थे की ये जो हालात हैं इसका जिम्मेदार कोई नहीं है लेकिन जो भी हुआ उससे इन तीनो की जिंदगी पे एक गहरा असर पड़ा.अभिनव को यूँ तो पता था की उसकी छोटी बहन उसे कितना प्यार करती है, लेकिन उसे अंदाजा बिलकुल भी नहीं था की वो अभिनव और स्नेहा को लेकर इस संजीदा बातें भी कर सकती है..रिया ने स्नेहा को बताया, की जब उसे पता चला की वो हमेशा के लिए अभिनव से दूर हो रही है, तो वो उस रात अपने कमरे में खूब रोयी थी.उसने स्नेहा से कहा की वो हमेशा उसे अपनी भाभी के रूप में ही देखती थी..इसलिए हमेशा उसने स्नेहा को "बी डॉट बी" कह कर बुलाया."बी डॉट बी" था तो एक तरह का मजाक ही लेकिन वो इसकी आदी हो चुकी थी और जब स्नेहा ने उससे रिक्वेस्ट किया की उसे इस नाम से ना बुलाये तो रिया को बहुत दुःख हुआ था.उस शाम वो बेहद उदास थी, और पूरी रात उसे नींद नहीं आई थी.रिया ने ऐसी कई बातें स्नेहा को बताई.रिया ने स्नेहा से कहा की अभिनव किसी से कुछ भी नहीं कहता.वो खुश रहता तो है, लेकिन उसे लगता है की ये बस बनावटी खुशी है, जो सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए है.

स्नेहा ने भी रिया को बहुत सी बातें बतायी.कुछ बातें ऐसी थी जिसे वो किसी से नहीं कह पायी थी,अभिनव से भी नहीं.लेकिन उसने वो सारी बातें उस दिन रिया से कह डाली..स्नेहा ने रिया से कहा की जब उसने सबसे पहले उसे "बी डॉट बी" कह के बुलाया था, तो पहले तो उसे कुछ समझ नहीं आया.उसे लगा की वो उसका मजाक उड़ा रही है, लेकिन जब रिया ने उसे बताया की "बी डॉट बी" का मतलब भाभी(BhaBhi) है, तो उसके आँखों में आंसू आ गए थे.स्नेहा ने रिया से कहा की वो एकमात्र ऐसी लड़की थी जिसने उसे भाभी कह के बुलाया था,और उसे बेहद खुशी हुई थी..उसका दिल झूम उठा था.वो "बी डॉट बी" के नाम में खुद को बेहद कम्फर्टेबल महसूस करने लगी थी, और उसे धीरे धीरे ये यकीन हो चला था की रिया युहीं उसे हमेशा "बी डॉट बी" बुलाते रहेगी..फिर जब वक्त ने करवट ली और उसे अभिनव से दूर जाना पड़ा तो उसे इस "बी डॉट बी" से चिढ़ सी होने लगी.ये नाम उसे परेसान करने लगा.तभी उसने रिया से कहा की इस नाम से उसे ना बुलाया करे.उस शाम जब उसने रिया से ये बात कही, तो वो भी काफी उदास थी और रात भर बेचैन रही.स्नेहा ने रिया से कहा - ये भी अजीब है न..हम दोनों दो अलग अलग शहरों में एक ही समय एक ही कारण से रात भर रोते रहे थे और दोनों में किसी को इस बात की खबर भी नहीं थी.

स्नेहा ने रिया से कहा की अभिनव हमेशा चुप रहता है और किसी से कुछ भी नही कहता.उसके दोस्त भी एक्का दुक्का ही हैं..और वो जल्दी किसी पे विश्वास भी नहीं करता.ऐसे में बस एक वही है जो उसे पूरी तरह संभाल सकती है.उसे अभी एक दोस्त की सख्त जरूरत है, जो उसे समझ सके,उसका दर्द बाँट सके और वो वैसे दोस्त की कमी बेतरह महसूस कर रहा होगा.जब तक वो थी उसके जिंदगी में, तब तक उसने उसे कभी किसी की कमी महसूस होने नहीं दी.लेकिन अब वो नहीं है और वो बेहद अकेला महसूस कर रहा होगा.स्नेहा ने रिया से कहा की अक्सर रातों में उसकी नींद इस सोच से टूटती है की अभिनव कैसा होगा..कहीं वो जाग तो नहीं रहा होगा?वो खुश होगा या उदास? स्नेहा ने कहा की ऐसी कई सारी बातें उसे हमेशा परेसान करती है.उसने कहा की जब भी वो किसी बुक-स्टोर जाती है तो अक्सर सोचती है की अगर अभिनव उसके साथ होता तो वो उसे हर किताब के बारे में विस्तार से बताता..चाहे उसे सुनना हो या न हो..वो कहता की देखो, ये किताब इन्होने लिखी है..इसमें ये खास बातें हैं..ये किताब उन्होंने लिखी है..वैगरह वैगरह..स्नेहा ने रिया से कहा - "अगर सच पूछो तो जब कभी मैं कोई बेवकूफी वाली हरकतें करती हूँ तो उस वक्त सबसे ज्यादा कमी अभिनव की ही महसूस होती है, एक वही तो था जो मेरी बेवकूफियों पर खूब हँसता था, मुझे चिढ़ाता था और कभी कभी मुझे बहुत डांटता भी था,और यही वो पल होते हैं जब मैं खुद को बेहद तनहा,उदास और टुटा हुआ सा पाती हूँ".ये कहते कहते स्नेहा की आवाज़ बिखर गयी.उसके आँखों से आंसू आ गए.पास बैठा हुआ अभिनव ये सब सुन स्तब्ध सा था.

अभिनव बहुत देर से खुद को रोके हुए था, लेकिन अब उसका खुद पे काबू कर पाना नामुमकिन था.उसने पीछे से स्नेहा के सर पर अपना हाथ रख दिया.स्नेहा अचानक से पीछे मुड़ी और कुछ पल उसके तरफ अविश्वास से देखते रही..

अभि....नव....अभिनव...ओह गौड अभिनव..इट्स यु...?? ओह शिट अभि..इट्स रिअली यु..

स्नेहा खुद को रोक नहीं पायी और उसके गले लग गयी.अभिनव की आँखें भी नम हो गयीं.कुछ पल वो अभिनव के बाहों में रही और फिर खुद को संभालते हुए कहती है - मुझे यकीन था की तुम भी रिया के साथ जरूर आये होगे और ये घटिया सा हर्ट-एटैक जैसा सरप्राईज देने का ख्याल भी तुम्हारा ही होगा...यु नो व्हाट..तुम बहुत गंदे हो..छुप छुप कर हमारी बातें सुन रहे थे...आई जस्ट हेट यु..गो अवे..

स्नेहा ने अभिनव को पीछे धक्का दे दिया.अभिनव ने प्यार से स्नेहा का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा की अगर मैं छुप छुप कर तुम्हारी बातें न सुनता तो मुझे इतनी प्यारी प्यारी मासूम बातें कैसे मालुम चलती?चलो अब अपने शहर की कॉफी पिलाओ..बड़ा अपना शहर का नाम जपते फिरती हो....स्नेहा मुस्कुराने लगी.

तीनो एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे.


कुछ देर तीनो खामोश रहे..बिना कुछ कहे,एक दूसरे को देखते हुए अपनी कॉफी खत्म की और देर शाम तक तीनो वहीँ बैठे रहे.तीनो के लिए ये एक यादगार मुलाकात थी.

अभिनव और रिया जब वापस जा रहे थे तो स्नेहा ने उनसे कहा - "तुम दोनों मुझे हमेशा याद रखना, अगर कभी मुझे भूले तो देख लेना..सपने में आकार मैं तुम दोनों के पुरे बाल नोच खाऊँगी" --- यही स्नेहा का मैजिक था..उसकी ऐसी बातें इंसान को गहरे उदासी से भी खींच ले आती थी, और फिर ये तो एक यादगार लम्हा था..जो हमेशा के लिए उनके दिलों में फ्रीज़ होके रह गया.

19 comments:

  1. :):) ..अच्छी है ....कहानी .

    ReplyDelete
  2. aap to sir faaltu men keh rhe the ki bekar kahani hai..mujhe ye to maalum nai ki kahani ko achha ya bura kahne ke kya parameters hote hain but mujhe to ye kahani pasand aai...sweet si hai.....

    take care
    neha

    ReplyDelete
  3. wowwwwwww
    i just read starting but will read whole soon

    and there are so many things for mr to check
    in vacations first thing will be this blog :D

    ReplyDelete
  4. excellent ... inspirational ..! :)

    ReplyDelete
  5. बहुत बढ़िया अभिषेक भाई!!!!अच्छी लगी कहानी

    ReplyDelete
  6. बहुत खुबसूरत कहानी , शुरू से अंत तक निरंतर बंधे रखती है

    ReplyDelete
  7. सुंदरता से एहसासों का वर्णन किया है ...!!अच्छी कहानी है ...!!
    लिखते रहें ....शुभकामनायें ...

    ReplyDelete
  8. अच्छी और लंबी कहानी !

    ReplyDelete
  9. ये कहानी दिल में फ्रिज हो गई...भिया..

    ReplyDelete
  10. such freezed moments live on!
    nice reading it:)

    ReplyDelete
  11. excellent........
    enjoyed a lot!!!
    anu

    ReplyDelete
  12. कहानी अच्छी है...पर मन में एक बैचैनी सी छोड़ गई कि आखिर दोनो प्यार करने वाले जुदा क्यों हो रहे...?
    इस प्यारी मासूम सी कहानी के लिए बधाई...।
    प्रियंका

    ReplyDelete
  13. Yar abhi ji ye kya ek kisi jara si badi ghanta ko kahani bana dete ho very boring story

    ReplyDelete

आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया