Sunday, January 22, 2012

वो लड़की जो खुश रहना जानती थी

ऐसा तो नहीं था की उसने उससे खूबसूरत लड़की पहले नहीं देखी थी, लेकिन उसके चेहरे में जरूर कुछ ऐसा था जिससे उसकी नज़र उसके चेहरे से हटती ही नहीं थी.लड़की की मासूम भोली और अनोखी हंसी लड़के के दिल को एक अजीब सा सुकून देती थी.वो जब भी हँसती तो उसे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की लगती.लड़की की हंसी से लड़के के आसपास की पूरी दुनिया खिल उठती थी.लड़का मन ही मन ये दुआ भी करता की लड़की बस ऐसे ही हँसती मुस्कुराती रहे, हमेशा.

लड़के और लड़की की प्रेम कहानी भी लड़की की हंसी की तरह ही एकदम अनोखी थी.दोनों अलग अलग देशों में रहते थे.अलग अलग देशों में रहते हुए भी दोनों के बीच एक अटूट रिश्ता था.कभी कभी तो दोनों को ऐसा लगता की दोनों में कुछ भी दूरियां नहीं हैं और दोनों हर पल साथ हैं.ऐसा नहीं की शुरू से ही दोनों में इतनी दूरियां थी.दोनों पहले एक ही शहर में रहते थे.लड़का का वो शहर अपना था, और लड़की कुछ समय के लिए उस अजनबी शहर में रहने आई थी.पता नहीं कैसे दोनों में दोस्ती हो गयी, और दोस्ती हुई भी तो ऐसी की आसपास के लोग लड़के-लड़की की दोस्ती से जल-भून जाते.जब तक लड़का और लड़की एक ही शहर में रहे, तब तक लड़के ने लड़की से कुछ नहीं कहा.लड़की हमेशा उसे अपना सबसे अच्छा दोस्त समझती रही और लड़का उससे दीवानों की तरह मोहब्बत करता रहा.अनचाहे कारणों से जब लड़की को विदेश जाना पड़ा तब भी लड़का उससे कुछ नहीं कह सका.फिर एक समय ऐसा आया की लड़के ने लड़की से अपने प्रेम का इजहार किया, इजहार भी लड़की की हंसी के जैसा ही अनोखा था.लड़की एक हाँ के सिवाय कुछ भी नहीं कह सकी.जब से दोनों के बीच इजहार-इकरार हुआ तब से दोनों कभी साथ नहीं रहे.जब कभी लड़की अपने वतन लौटती तब दोनों की मुलाकात हो पाती.लड़के ने जब से लड़की से अपनी दिल की बात कही तब से अब तक छः साल हो चुके हैं और इन छः सालों में दोनों की मुलाकात सिर्फ अड़तालीस दिन हो पायी.अड़तालीस दिनों में दोनों बस नब्बे घंटे ही एक दूसरे के साथ रहे.

लड़के को लड़की की बहुत सी बातें विचित्र सी जान पड़ती.सबसे पहले तो लड़की की हंसी.लड़के को लगता की लड़की के हंसी के पीछे कोई बहुत गहरा रहस्य छिपा है, जिसे कभी कोई जान नहीं सकता.खुद वो लड़की भी नहीं.लड़के को अक्सर ये भ्रम भी होता की लड़की तितलियों और चीटियों से बातें करना जानती है.लड़के ने कितनी ही बार लड़की को उनसे बातें करते देखा है.लड़की खुश रहती थी, बहुत खुश..इतना की लड़का भी ये सोचता की कोई भी इंसान इतना खुश आखिर कैसे रह सकता है.लड़की हमेशा कहती की "इतना खुश रहो की आसपास वाले तुम्हे देख के जल-भून जाए की आखिर कोई इतना खुश कैसे रह सकता है".लड़की की बातें भी लड़की के हंसी के जैसी ही अनोखी और जुदा थी.लड़की कहा करती थी की 'इंसान को कभी उदास नहीं रहना चाहिए.उदास रहने से चेहरा भी मुरझा जाता है और इंसान की खूबसूरती भी नहीं रहती.इंसान को हमेशा खुश रहना चाहिए, खुश रहने से चेहरा खिला खिला सा लगता है'.

लड़के के जब संघर्ष के दिन चल रहे थे और कुछ लोगों के बर्ताब ने उसे एकदम निराश और हताश कर दिया तब गिने चुने चार पांच लोग ही थे जो लड़के को हौसला देते रहे.उनमे से एक वो लड़की थी.लड़का दिन भर अपने घर में चुपचाप रहता, और शाम को बाहर निकलता.जिस शाम लड़के को काम नहीं भी रहता, उस शाम भी वो निकलता, सिर्फ उस लड़की से मिलने के लिए.रोज लड़की से एक घंटे की मुलाकात लड़के के दिल को तसल्ली देती की सब ठीक हो जाएगा.शाम के वो पल लड़के के सबसे खूबसूरत पल होते थे और उसे हर शाम लगता की ये पल यहीं ठहर जाए, बस वो लड़की की आँखों में, उसकी बातों में कहीं खो जाए.वो सारी दुनिया से बेखबर हो जाता, अपनी सारी तकलीफ और दर्द को पीछे छोड़ वो एक बहुत ही खूबसूरत सी दुनिया में चला जाता.

लड़की भी लड़के का बहुत ख्याल रखती.लड़के को लगता की लड़की बिलकुल उसकी माँ की तरह उसका ख्याल रखती है.लड़के के खर्चे से लेकर उसकी पढ़ाई तक का हर हिसाब लड़की रखती.लड़की जहाँ देखती की लड़का फ़ालतू के चीज़ों में अपनी पॉकेट मनी उड़ा रहा है तो वो नाराज़ हो जाती और लड़के को खूब डांटती.लड़के को हमेशा ये लगता की उसके दो गार्डीअन हैं.घर में उसकी माँ और बाहर वो लड़की.शायद इसी वजह से जब कुछ सालों बाद लड़का पढ़ाई के लिए दूसरे शहर गया तब वो एकाएक बहुत अकेला सा हो गया.ना तो उसकी माँ उसके साथ थी और नाही वो लड़की.

लड़के ने लड़की को हमेशा खुश ही देखा.दुःख के मौसमों में भी लड़की के चेहरे पे मुस्कान सदा बनी रही.लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां भी आयीं की लड़की की हंसी एकदम गायब हो गयी.लड़का तब बड़ा चिंतित हो गया.उसने कभी लड़की को दुखी नहीं देखा और जब एक दिन लड़की को उसने उस हालत में देखा तो अंदर ही अंदर टूट सा गया.वो उस दिन खूब रोया भी.उसके मन में सिर्फ एक ही ख्याल आया की भगवान को अगर दुःख ही देना था तो मुझे देते, उस बेचारी लड़की को क्यों?लड़का उस दिन को कभी नहीं भूल सकता जब उसने पहली बार लड़की की उदास आँखें देखी थी जब पहली बार लड़की उसके कंधे पर सर रख कर रोई थी.

लड़के और लड़की अब भी एक दूसरे से बहुत दूर रहते हैं और अब तो दोनों एक दूसरे से बात भी नहीं कर पाते.ऐसे में अक्सर शामों में या फिर बारिशों में या फिर जाड़ों की गुनगुनी धुप में लड़के को लड़की की हंसी अचानक से याद आ जाती है और सड़कों पर चलते चलते वो अचानक मुस्कुराने लगता है, गुनगुनाने लगता है..बाकी लोगों से बेफिक्र, बेपरवाह..कभी किसी अजनबी लड़की की नीली जूतियों,पीले दुप्पट्टे या लंबे बालों पर लड़के की नज़र जाती है तो उसे वो लड़की बेतरह याद आ जाती है.लड़के को तो लड़की को याद करने के बस बहाने चाहिए होते हैं और वो उसे बड़े आसानी से मिल भी जाते हैं.आसपास के लोग अक्सर लड़के की हरकतों से उसे कोई दीवाना समझते हैं लेकिन लड़के को इस बात की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है, वो तो बस यादों के मौसम में डूबे रहने के और उस लड़की को याद करने के बहाने खोजता फिरता है जो खुश रहना जानती थी.

   | जब तू मुस्कुराती है, बिजली भी शरमाती है
     पलकें जब उठाती है, दुनिया ठहर जाती है..