Wednesday, January 11, 2012

उसकी नज़रों में कोई जादू था


जब उसकी तबियत खराब हो जाती थी तो वो बिलकुल चुप हो जाता था.किसी से भी कुछ बात नहीं करता.घर के बच्चों की वही शरारती बातें जिसे वो बहुत पसंद करता था, वे बातें भी उसका मन नहीं बहला पाती थीं... .तबियत बहुत ज्यादा खराब होने पर वो किसी से कुछ नहीं कहता.बुखार में जब उसका पूरा शरीर जल रहा होता तो भी वो अंतिम समय तक किसी से कुछ भी नहीं कहता था.वो किसी से तब तक कुछ नहीं कहता जब तक बुखार या फिर कोई भी तकलीफ असहनीय नहीं हो जाती.दर्द सहना उसके लिए कोई नयी बात नहीं थी.पहले भी वो दर्द सहता आया था जब उसकी बहुत सी गलतियों ने उसके जीवन पर एक गहरा प्रभाव डाला था और अब भी...जाने अनजाने में अपनों से ही मिला दर्द हो या अपनी ज़िन्दगी को अपने सामने बिखरते देखने का दर्द या फिर उस लड़की से बिछड़ने का दर्द जिसे वो दुनिया में सबसे ज्यादा चाहता था.

तबियत जब उसकी खराब होती थी, तब उसके आगे पुरे परिवार का जमावड़ा लग जाता था.सारे परिवार वाले उससे बहुत प्यार करते थे, और उसकी तबियत ख़राब होने की खबर सुनकर सब उससे मिलने आ जाते थे.नार्मल लड़कों की तरह उसकी तबियत कभी ख़राब नहीं होती थी, हल्का बुखार, खांसी, सर्दी तो वो बिना किसी से कुछ भी कहे झेल लेता था लेकिन उसके तबियत का ख़राब होने का मतलब होता था कुछ ज्यादा ही सिरिअस बात...वो तब बिस्तर पर अधलेटा सा पड़ा रहता था और अपने आसपास के लोगों को, उनकी बातों को, उनके हरकतों को देखते रहता था.उसके अन्दर इतनी हिम्मत नहीं होती थी की वो उठ कर चल फिर सके, उसे बिस्तर पर नॉर्मली लेटने की भी हिम्मत नहीं होती थी.उसे सांस की बीमारी थी, और बिस्तर पर सो जाने से, या लेट जाने से साँसे तेज़ चलने लगती..बहुत से तकियों के सहारे वो बिस्तर पर अधलेटा हुआ सा रहता था...तीस डिग्री के एंगल में....या दिवार के सहारे टिककर बैठा रहता और सब कुछ देखते रहता था. नानी-मामा-मामी-मौसी-माँ-पापा-बहन..सभी उसके इर्द गिर्द रहते और उसे वो पल बेहद अच्छा लगता.वो अक्सर अपने बिमारी के दिनों में सोचा करता की काश ऐसा हो की वो हमेशा बीमार रहे और परिवार के सभी सदस्य युहीं उसके नज़रों के सामने रहे..इतने लोगों के सामने भी वो किसी से कुछ बात नहीं करता था, चुपचाप बैठा रहता और सबकी बातें सुनता और खुश होते रहता...उसे अच्छा लगता था की उसकी बीमारी के बहाने ही सभी लोग एक ही कमरे में बैठ कर बातें कर रहे हैं, एक साथ हंसी-मजाक-गप्पे कर रहे हैं.अपनी बीमारी के दिनों में माँ और बहन के अलावा वो किसी से कुछ भी बात नहीं करता.

वो जब बिमार होता, तो उसके दोस्त भी आसानी से नहीं जान पाते की वो बिमार है..वो अपने दोस्तों को कुछ भी नहीं बताता था...जब बहुत दिन हो जाते और वो अपनी बिमारी की वजह से दोस्तों से मिलने नहीं जा पाता तो उसके दोस्त फोन कर के उसकी खैरियत मालुम करते, और वो हर बार दोस्तों के सवालों को ये कह कर टाल देता था की वो व्यस्त है, कुछ दिन बाद मिलेगा उनसे. लेकिन उसके सारे दोस्तों में सिर्फ वो लड़की एक थी, जिसके सामने वो कभी बहाने नहीं बनाता था, अपनी तबियत को लेकर कभी झूठ नहीं बोल पाता था..उस लड़की से वैसे कुछ छुपाने का फायदा भी नहीं था.वो उसकी बातें जान लिया करती थी.वो फोन करती और उसकी आवाज़ सुनते ही वो जान लेती थी की वो ठीक है या बिमार है.जब फोन के दूसरी तरफ लड़का कहता की वो बिमार है, उसकी तबियत ठीक नहीं तब लड़की तब घबरा सी जाती थी और फोन पर उसकी आवाज़ कांपने लगती थी...लड़के को लगता जैसे लड़की उसकी बीमारी की बात सुनकर रो रही है.

उन्ही दिनों लड़के के दिमाग में पता नहीं कैसे एक दफे ये बात घर कर गयी की अगर वो बुखार या फिर किसी भी बिमारी में उस लड़की को एक नज़र देख लेगा, तो वो बिलकुल ठीक हो जाएगा.एक शाम जब उसे ये महसूस हुआ की उसे हल्का बुखार है तो वो घर में किसी से ये बात कहने के बजाये साइकिल लेकर उस लड़की से मिलने चला गया.उसे पता था की बुखार में उसे साईकिल नहीं चलानी चाहिए,बहुत ज्यादा चांसेज रहते ऐसे कंडीसन में की उसकी सांस फिर से फूलने लगे...लेकिन उसे पक्के तौर पे ये यकीन था की अगर वो लड़की उसे एक नज़र उसे देख लेगी तो उसके नज़रों की गर्माहट से उसकी बीमारी गायब हो जायेगी.नवंबर की सर्द हवा चल रही थी और साइकिल चलाते वक्त उसका पूरा शरीर काँप रहा था.उसे एक पल ये भी महसूस हुआ की उसे चक्कर सा आ रहा है और वो रास्ते में ही कहीं गिर जाएगा, शायद उसका बुखार थोड़ा बढ़ गया था...और इस ख्याल से वो थोड़ा घबरा सा गया.उसे रास्ते में गिरने की ज्यादा परवाह नहीं थी, फ़िक्र उसे इस बात की थी की जब उसके घर वाले पूछेंगे की वो बुखार में कहाँ साईकिल चला कर जा रहा था तो वो क्या जवाब देगा....वो लड़की जब उससे सवाल करेगी तो वो क्या जवाब देगा उसकी बातों का?

उसने दूर से ही उस लड़की को देख लिया था और तब उसे देखते ही लड़के को लगा की अब उसे कुछ भी नहीं हो सकता.कम से कम जब तक वो लड़की उसके नज़रों के सामने है तब तक तो उसे कुछ भी नहीं हो सकता.उसे अब यकीन आ गया था की उसका बुखार भी उस लड़की के नखरों और इडीऑटिक बातों से परेसान होकर भाग जाएगा.वो लड़की अक्सर उसके चेहरे से अंदाज़ा लगा लेती थी की वो क्या महसूस कर रहा है.उस दिन भी उस लड़की ने सबसे पहले उससे यही सवाल किया था  "क्या हुआ, तबियत खराब है तुम्हारी?"

"नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं..तुम फ़ालतू सा वहम पालने लगी हो आजकल .." लड़के ने सवाल को टालना चाहा.

वो लड़की लेकिन इस सवाल से संतुष्ट नहीं हुई और एक डॉक्टर की तरह उसने लड़के की कलाई और फिर माथे को छू कर कहा..बुखार है तुम्हे.,.तुम क्यूँ फ़ालतू में घूमते रहते हो..बुखार है तो घर पे ही आराम करना चाहिए.

लड़का इस बात का कोई भी जवाब न दे सका.उसकी नज़रें इधर उधर जाने लगीं.उसने बहुत कोशिश की ,की बातों को दूसरी तरफ मोड़ सके लेकिन वो नाकाम रहा.लड़की अपने उस सवाल पर अड़ी रही की वो बुखार में साईकिल क्यों चला कर इतनी दूर उससे मिलने आया है.लड़की ने उसे फिर डांटते हुए कहा "मौसम बदलने का असर सबसे ज्यादा तुमपर होता है, और तुम हो की इतने लापरवाह..सर्दियाँ आ आ गयी हैं, और ऐसे में तुम्हे ख़ास ध्यान रखना चाहिए..."
लड़का उसकी इन बातों से अचानक बहुत इमोशनल हो गया, उसकी आँखों में एक दो बूंद मोती नज़र आने लगे थे....उस लड़के को ऐसी बातें सिर्फ उसकी माँ कहती थी, शायद इसलिए लड़के ने जब लड़की से ये बातें सुनी तो उसकी आँखों में अचानक आंसूं आ गए, जिसे उसने बड़ी चालाकी से लड़की से छुपा भी लिया था.
लड़के ने आखिर में ये कह कर लड़की के उस सवाल से पीछा छुड़ाया की घर से निकलते वक्त तो वो ठीक था,रास्ते में अचानक तबियत खराब सी लगने लगी.

लड़की उसके इस जवाब से संतुष्ट तो नहीं हुई लेकिन उसने लड़के से आगे कोई बहस भी नहीं की.
पास वाले मेडिकल स्टोर में वो लड़की गयी और उसके लिए कुछ दवाइयां लेते आई.., एक जेनरल स्टोर से एक बिस्कुट का पैकेट और एक पानी की बोतल भी वो खरीद लाई...और फिर लड़के को उसने अपने हाथों से दवाईयां खिलाते हुए हिदायत दी..."देखो, बाकी की दावा रात में सोने वक़्त खा लेना...और अगर ज्यादा तबियत ख़राब हो, तो घर में सबको बता देना....."
लड़की ने अपने पास लड़के को बहुत देर तक बिठाए रखा और एक डॉक्टर की तरह उसे हिदायतें दे रही थी... लड़के को लेकिन दवा की या किसी और डॉक्टर की अब कोई जरूरत नहीं थी, वो अब पहले से काफी बेहतर और अच्छा महसूस कर रहा था.उसे अब ये यकीन था की वो सही सलामत साइकिल चला कर घर जा सकता है, और उसे कुछ नहीं होगा..ना तो वो गिरेगा और नाही उसे कोई चोट लगेगी.
लड़की की आँखों में या उसकी छुअन में सच में कोई जादू है की जिसकी गर्माहट पाकर कोई भी ठीक हो सकता है, ये लड़का उस समय सोच रहा था.




आज की रात वो फिर से अच्छा महसूस नहीं कर रहा है.उसे अभी उस लड़की की और अपनी माँ की बहुत याद आ रही है.हालांकि वो अभी अपनी मौसी के घर पर है जिन्होंने बचपन में उसकी हर तरह से देखभाल की है....उसका इतना ख्याल रखा उसकी मौसी ने, जिसका की कोई हिसाब नहीं. कितनी ही रातें वो जागी हैं इस लड़के के कारण.वो लड़का अब बड़ा हो गया है और अपनी मौसी को नहीं बताना चाहता की उसकी तबियत खराब है..वो नहीं चाहता की वो उसकी वजह से और परेसान हो.वो नहीं चाहता की उसके वजह से कोई भी परेसान हो.उसे बस अपनी माँ की याद आ रही है और उस लड़की की, जिसके नज़रों में कोई जादू बसता था.वो अभी अपनी माँ और उस लड़की को बेतरह याद कर रहा है.फोन पर उसने दोनों ही से, अपनी माँ से और उस लड़की से बातें कर ली है....और अब उस लड़के को ये यकीन है की कल सुबह जब वो सो के उठेगा तो वो उस लड़की के जादू से (जो वो दूर रह कर भी कर सकती है) फिर से बेहतर और अच्छा महसूस करेगा.