Sunday, January 1, 2012

यादों में एक दिन : गिफ्ट


वो खड़ी थी, सड़क के दूसरी तरफ.आज वो मेरे से पहले पहुँच गयी थी, जो मेरे लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था.हमेशा वो मुझे कम से कम आधा घंटा तो इंतज़ार करवाती ही थी.वो सर से पांव तक गर्म कपड़ों में थी.बस उसका चेहरा दिखाई दे रहा था.मैंने देखा की वो बड़े गौर से ज़मीन की तरफ नज़रें गड़ाए कुछ देख रही है, या फिर शायद ज़मीन पर का कुछ लिखा पढ़ने की कोशिश कर रही है.उसकी ये आदत थी, की ज़मीन या दीवाल पर कभी कुछ अच्छा लिखा दिख जाता तो वो उसे बड़े ध्यान से पढ़ने लगती.

मैं सड़क पार करके उसके करीब आया...पहले तो मैंने कोशिश की ये देखने और समझने की, आखिर वो ज़मीन पर देख क्या रही है.लेकिन मुझे कुछ भी समझ नहीं आया..ना तो आसपास कोई कागज़ का टुकड़ा था और नाही ज़मीन पर कुछ लिखा हुआ था...
मैंने पीछे से उसे छुआ तो वो एकदम डर सी गयी और मुझे डांटने लगी - "क्या करते हो....मैं तो डर ही गयी थी बिलकुल..."
"ये तुम नीचे क्या देख रही हो इतने गौर से?" मैं उससे पूछा.
उसने बड़े मासूमियत से कहा - "अरे देखो न ये 'चीटी' कितनी क्यूट लग रही है और इसकी चाल कितनी क्यूट सी है, बस उसी को देख रही थी..?".
मेरा सर चकरा गया था.मैंने उसे डांटते हुए, चिढ़ाते हुए कहा - "तुम पागल हो, इसका सर्टिफिकेट हमेशा देना जरूरी तो नहीं है न...अब चलो.."

मेरे इस बात से उसका चेहरा उतर गया..वो बड़े मासूमियत से कहती है - "हाँ तुमको तो हम पागल ही दीखते हैं न...सिर्फ बस एक तुम्ही होशियार हो...देखो तो ये बेचारी चीटी कितनी क्यूट सी है..कभी इधर कभी उधर जा रही है...कित्ती कन्फ्यूज सी लग रही है...शायद ये अपने घर का रास्ता भूल गयी है....और तुमको ये पागलपन लगता है...सच कहता है सब...लड़का सब का दिल तो पत्थर का होता है".

उसके ऐसे सार्कैस्टिक बातों पर मुझे हमेशा हंसी आ जाती है..मैं सोचने लगा की कैसे किसी को चीटी की चाल क्यूट लग सकती है?कैसे कोई एक चीटी की चाल को इवैल्यूऐट कर सकता है.मन में सिर्फ एक ही विचार आया की अब भी ये कितनी ज्यादा मासूम है.

मैंने उसे छेड़ने के लिए फिर कहा ""एक तो सड़क पर तुम चीटी को देख रही हो और उसपर से उसका चाल भी तुम्हे क्यूट लग रहा है....दुनिया का कोई भी समझदार आदमी इसे पागलपन वाली बात ही कहेगा..."

वो फिर गुस्सा हो गयी - "सच में, इंजीनियरिंग पढते पढते तुम्हारा दिल एकदम मशीन टाईप का हो गया है....बिलकुल पत्थर...अभी भी एक साल बाकी है न इंजीनियरिंग का, संभल जाओ नहीं तो पास होने के बाद तुमको सब मशीन ही समझेगा...समझे?"

मुझे बहुत हंसी आ रही थी, और मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी को रोके रखा था.उसकी ऐसी इल-लॉजिकल बातो पर अक्सर मुझे हंसी तो आती ही थी साथ साथ प्यार भी बहुत आता था.सच कहूँ तो उसकी यही इल-लॉजिकल और स्टुपिड बातों ने शायद मुझे उसकी तरफ आकर्षित किया था, नहीं तो उससे खूबसूरत तो हजारों लड़कियां थी, और मेरे जान पहचान में भी उससे ज्यादा खूबसूरत लड़कियों की अच्छी खासी लिस्ट थी(सॉरी, नो ऑफेन्स इन्टेन्डड).

उसने जब देखा की मैं हँसे जा रहा हूँ, तो वो बच्चों से शकल बनाकर कहने लगी..."काश मेरे पास कोई मैजिक वैंड होता तो मैं इस चींटी को बड़ा बना देती और फिर इसे अपने साथ रखती..तब तुम इसको कुछ भी उल्टा पुल्टा बोलते तो ये तुम्हे काट खाती".

मैंने उसे फिर छेड़ा : "अच्छा, तुम इसे रखना चाहती हो, अभी तो तुम्हारे पास मैजिक वैंड नहीं है तो एक काम करो, इसे ऐसे ही रख लो...बड़ी चीटी या छोटी क्या फर्क पड़ता है"

"तुम पागल हो...इत्ती छोटी है ये...ऊँगली से भी 'चिपा' गयी तो बेचारी मर जायेगी".

"हाँ, फिर अगर ये मर गयी तो तुम्हारे सर पर जीव-हत्या का पाप भी चढ़ेगा न..." उसे चिढ़ाने का ये मेरा रामबाण था लेकिन इसने उल्टा असर किया..वो मुझे मारने के लिए अपना बैग उठा ली, मैं वहाँ से भाग निकला.

वो थोड़ा रूठ तो गयी थी, लेकिन ज्यादा वक़्त नहीं लगा उसे मानाने में.

हम एक रेस्टुरेंट में आ गए जो उसका पसंदीदा रेस्टुरेंट था.उस रेस्टुरेंट से उसकी और मेरी यादें जुड़ी हुई थी. जब वो कोल्कता से पटना पहली बार आई थी तो सबसे पहले उसी रेस्टुरेंट में उसने लंच किया था.और अगर कभी हमें बात करनी होती थी तो हम अक्सर वहीँ बैठा करते थे.वहाँ की कोल्ड कॉफी विद आइसक्रीम उसे बहुत पसंद थी.वो एक छोटा सा मजाक अक्सर करती थी..मुझसे कहती थी - "तुम अगर मुझे कोई जुगाड़ लगा कर ये कोल्ड-कॉफी मेरे शहर तक पहुंचा सकोगे, तो मैं जिंदगी भर तुम्हारे इशारों पे नाचूंगी.." वो जब भी कुछ ऐसा कहती थी तो मेरे लिए कुछ भी कहना बड़ा मुश्किल हो जाता था.

उस रेस्टुरेंट में हमारी एक फेवरिट टेबल थी.उस दिन बैठने के क्रम में बगल वाले टेबल पर रखे दो ग्लास उसके बैग से टकरा कर नीचे गिर गए.होटल का मैनेजर वहीँ घूम रहा था.जैसे ही ग्लास टूटने की आवाज़ आई तो उसे लगा की शायद किसी को चोट लगी गयी, वो तुरंत हमारे टेबल के तरफ आने लगा.इधर मैडम जी को ये लगा की ग्लास टुटा है इसलिए वो मैनेजर कुछ कहने आ रहा है..इसने सोचा की इससे पहले वो कुछ कहे, यही उसे कुछ सुना दे..अंग्रेजी में उस मैनेजर को पता नहीं इसने क्या-क्या बुरा-भला कहा.मुझे तो ज्यादा अंग्रेजी समझ में आती नहीं..जो भी थोडा-बहुत मेरे पल्ले पड़ा, उससे मुझे लगा की वो उसे कह रही थी : "तमीज नहीं है आप लोगों को टेबल लगाने की, इतने पास पास टेबल लगा कर रखा हुआ है..और गिलास भी ऐसे किनारे रखा जाता है क्या?".

वो बेचारा मैनेजर गुस्सा होने के बजाय इसे सॉरी बोलकर, माफ़ी मांगकर चला गया.अब इधर मुझे उसे छेड़ने का एक और हॉट-टॉपिक मिल गया था, जिसे मैं किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहता था.

जब वो आराम से बैठ कर और अपने मेक-अप से फ्री हो गयी थी(बैंग में मेक-अप किट रखती थी, जिसे समय-समय पर इस्तेमाल भी कर लेती थी), तब मैंने अपना पहला बाण छोड़ा : "अरे तुम अंग्रेजी में क्या बतिया रही थी...इतना फर्राटा से बोल रही थी..हमको तो 'यु' 'मी' 'नो' 'यस' के अलावा कुछ बुझाया भी नहीं".

वो फिर से मेरे पे झल्ला गयी थी और सामने टेबल पे चम्मच रखा हुआ था, उसने उसी को फेंक के मुझे मारा.चम्मज़ मेरे चेहरे के पास आकर लगा था मुझे, अच्छा हुआ की उसने धीरे से चम्मज़ फेंका था, और ये और भी अच्छा हुआ था की उसकी नज़र छुरी या फोर्क पर नहीं पड़ी थी.

कुछ देर बाद वेटर हम लोगों का आर्डर ले आया.उसे देखते ही ये फिर से भड़क उठी - "देखो तो ये लोग को बिलकुल तमीज नहीं है..सब कुछ एक साथ लेते आते हैं, इतनी भी तमीज नहीं की आइसक्रीम बाद में लाना चाहिए".
मुझे फिर से बड़ी जोर की हंसी आ रही थी और कुछ कहने को दिल कुलबुला भी रहा था, लेकिन अब अगर कुछ भी कहता तो वो नाराज़ हो जाती और फिर नए साल के पहला दिन उसका मूड अपसेट करने का अपराध मेरे सर आता...मैं चुप ही रहा.

शायद कुछ सिक्स्थ सेन्स जैसा भी उसमे था.वो कुछ चीज़ें को पहले से भांप लेती थी...मेरे पास बैग को देख कर वो बार बार मुझसे सवाल कर रही थी, की उस बैग में क्या है? और मैं हर बार उसके उस सवाल को टाल दे रहा था.लेकिन उसका शक धीरे धीरे बढ़ता गया.मैंने उसे कुछ भी नहीं कहा लेकिन उसे ये शक हो गया था की उस बैग में कोई तोहफा है जो शायद उसके लिए है.वो मेरे से बैग झपटना चाह रही थी, हर बार वो कोशिश कर रही थी और हर बार वो असफल हो रही थी...अंत में वो कामयाब हुई, लेकिन उसकी वजह भी मेरी असावधानी थी..वो कहावत है न की 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी'..वैसा ही कुछ हुआ था.इधर मैं वाश-रूम गया और उधर वो मेरे बैग में ताक-झाँक करने लगी.

जैसे ही मैं वापस आया वैसे ही उसने पूछा : "लाल वाला साड़ी बड़ा महंगा लगता है...कित्ते में ख़रीदा???और किसके लिए है...बहन के लिए या फिर आंटी के लिए?" मैं बस मुस्कुरा के रह गया.
वो फिर पूछती है : "बहन के लिए है न?"
मैंने कहा : "नहीं, वो साड़ी पहनती नहीं..एक लड़की के लिए ख़रीदा है...न्यू इअर का प्रेजन्ट".

"अच्छा? कौन सी लड़की के लिए??गर्लफ्रेंड बना लिए तुम क्या?" : वो एकदम शॉकड होकर पूछती है.

"हाँ, एक लड़की है, मेरे साथ पढ़ती थी..उसी के लिए ख़रीदा है...गर्लफ्रेंड है या नहीं, ये तो नहीं पता...शायद कुछ चांस बन जाए ये साड़ी गिफ्ट करने के बाद", मैंने हँसते हुए कहा.

उसके चेहरे से हंसी गायब थी...वो सीरिअस होकर कहती है "ओहो..तो जनाब इंजीनियरिंग में जाकर गर्लफ्रेंड-वर्लफ्रेंड भी बना लिए हैं...बेट्टा...पढाई करने गए हो...इश्कबाजी करोगे न तो हम सीधा जाकर आंटी को या तुम्हारी बहन को कह देंगे..फिर जब पिटोगे तो हमको मत कहना".

कुछ रुककर वो फिर पूछती है "अच्छा नाम क्या है उसका?कहाँ की है??पटना की या साउथ की?

मैंने कहा : "नाम जानकार क्या करोगी...बस मेरे साथ पढ़ती थी, इतना समझ लो.....वो भी कलकत्ता और बिहार मिक्स्ड है, जैसे तुम..अब इससे ज्यादा तुमको जानना भी नहीं चाहिए".

ये कहकर मैं हँसने लगा, और उसकी शकल पे गुस्से और इरिटेशन का मिला जुला भाव था.वो जबरदस्त इरिटेट हो चुकी थी...और बेहद गुस्से में थी...कुछ देर वो खामोश रही, फिर एकदम बच्चों के तरह का एक्सप्रेसन बना के कहती है - "अच्छा, मैं इतनी दूर से आई हूँ....तुम मेरे लिए कुछ नया साल का प्रेजेंट नहीं लाये???एक ग्रीटिंग्स भी नहीं?"

उसका वो प्यारा सा चेहरा देख और इतना मासूमियत भरा सवाल सुन कर मुझे उसपर अचानक बड़ा प्यार आ गया और खुद पर हल्का गुस्सा भी, की उसे मैं बेवजह तंग किये जा रहा हूँ...मैंने प्यार जताते हुए उससे कहा "अरे पागल, तुमको भूल सकते हैं क्या कभी हम??देखो तुम्हारे लिए गिफ्ट भी है, कार्ड भी और एक चिट्ठी भी".

अचानक से उसके चेहरे पे रौनक लौट आई...जैसे ही मैंने उसे वो पैकेट थमाया वो झट से उसे खोलने लगी..लेकिन पैकेट खोलने के बाद उसका चेहरा फिर से एकदम मुरझा गया..कहने लगी "पता नहीं किसके लिए तो साड़ी लाये हो..और मेरे लिए बस ये एक सड़ा हुआ ब्लैंक सी.डी..पता नहीं क्या फ़ालतू का चीज़ 'राईट' कर के दिए होगे."
"रखो अपने पास ही अपना गिफ्ट..मुझे नहीं चाहिए". उसने उस पैकेट को मेरे तरफ फेंक दिया.

"अरे एक तो कितना मेहनत से रात भर जाग कर अपने सबसे पसंदीदा शायर के द्वारा लिखे गए फिल्मों के गानों का एक कलेक्सन बनाया और तुम उसको ऐसे फेंक रही हो...पता है न कितने बड़े शायर हैं वो.....और तुम ये प्राइस्लस सी.डी को ऐसे फेंक रही हो....बत्तमीज..दिमाग विदेश में छोड़ आई क्या?"

उसका इरिटेशन अब चरम पर था...कहने लगी : "ख़ाक अच्छा शायर...कुछ खास नहीं है उनमे..वो तो मेरे दिमाग में भी वो सब बात आता है जो वो लिखते हैं...और उनके लिखने से पहले आता है..बस अंतर इतना है की मेरा कोई जान पहचान नहीं है फिल्म-इंडस्ट्री में नहीं तो उससे बड़े शायर हम होते...समझे...वो तो चोर हैं ...जो बात मेरे दिमाग में पहले आता है उसे वो चोरी कर लेते हैं और तुम जैसा पागल लोग उनको द ग्रेट शायर समझता है..बेवकूफ...नालायक..स्टुपिड"

अब मेरी हंसी रोके नहीं रुक रही थी.
उसने गुस्से में कहा - "तुम बैठो रहो यहीं...मैं अब जा रही हूँ...कभी भी मुझे इरिटेट करने का तुम मौका नहीं छोड़ते...आज न्यू इअर के दिन तुमने मेरे अच्छे खासे मूड का सत्यानाश कर दिया...पाप चढ़ेगा तुम पर...पाप....बात मत करना हमसे अब..."

मैंने उसका हाँथ पकड़ कर उसे रोका...बैठने के लिए कहा...वो बैठ तो गयी थी लेकिन मेरे तरफ न देख कर दूसरी तरफ देख रही थी...मैंने कहा उससे..."अच्छा यार, सॉरी. यु नो..तुम्हारे लिए भी एक स्पेशल गिफ्ट है...लेकिन पहले तुम कार्ड के पीछे जो लिखा है उसे पढ़ो..फिर तुमको वो गिफ्ट देंगे...वो भी बैग में ही रखा है."

उसने गुस्से में उस पैकेट से वो कार्ड निकला और उसे पलटा...कार्ड के पीछे लिखा हुआ था "देखो साड़ी बहुत महंगी है...दो महीने जबरदस्त सेविंग किये हैं तब खरीद पाए हैं...पसंद नहीं भी आये तो रख लेना और
पहनना...तुम इसमें अच्छी लगोगी"

ये पढते ही वो उछल पड़ी थी...I knew....I knew..तुम वो साड़ी मेरे लिए ही लाये थे...I was just knowing that....बदमाश हो तुम...मैं सच में डर गयी थी...की पता नहीं किस चुड़ैल के लिए तो तुम साड़ी लाये हो...लाओ मुझे बैग दो अपना.."

उसने जबरदस्ती मेरे से बैग छीन लिया और साड़ी निकाल के देखने लगी....
"ओ माई गॉड, इट्स सो ब्यूटीफल.......आई लव ईट....थैंक यु सो मच!!!!!थैंक यू फॉर मेकिंग मी फील लाईक प्रिंसेस ...."
"यु नो...तुम्हारा ये साड़ी अच्छा...कार्ड बहुत अच्छा...सी.डी बहुत अच्छा...तुम्हारे शायर अच्छे और यु तो बहुत बहुत बहुत अच्छे...आई जस्ट लव यु...."

उसने मुझे एक दोस्त की हैसियत से फिर से 'आई लव यु' बोल दिया था..और मेरी धड़कने फिर से बढ़ गयी थी...मैंने ने अभी तक उसे 'आई  लव यु' नहीं कहा था.