Friday, December 30, 2011

लव इन दिसम्बर (२)

दिसंबर-बारिश-सर्द हवा और चाय--है न एकदम तुम्हारे टाईप का डेडली कॉमबिनेसन...बस एक कोहरे की कमी थी, नहीं तो पूरा सेटिंग वैसा ही होता जैसा की तुम चाहती हो...यही हाल था आज बैंगलोर के मौसम का--कातिल...एक तो वैसे ही तुम्हारी यादों के हरकतों से मैं बड़ा परेसान रहता हूँ..जहाँ देखा नहीं की मैं अकेला हूँ वहाँ पीछे पीछे आ जाती हैं..और खास कर के ऐसे कातिल मौसमों में तो वो मेरे पीछे ही पड़ी रहती हैं....कैसे बताऊँ जब ऐसे कातिल मौसम और तुम्हारी यादों का कॉमबिनेसन साथ होता है तो मेरे लिए कितनी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं...सच कहूँ तो मैं बहुत इरिटेट सा भी हो जाता हूँ...अरे इन्हें इतनी भी तमीज नहीं की कुछ देर मुझे अकेला छोड़ दे.. ..दोनों हमेशा गलत वक्त पे आ धमकते हैं..अरे हफ्ते भर का थका हुआ था..कल शाम ये सोच के खुश हो रहा था की आज कुछ काम नहीं है और दिन भर आराम करना है...फ़िल्में देखनी है..सोना है...लेकिन इनसे तो मेरी खुशी बर्दाश्त ही नहीं होती न...सुबह सुबह ही एकदम से मुहं उठाये आ गयीं परेसान करने...खैर अब तो कोसने के अलावा मैं और कुछ कर भी नहीं सकता..ना चाहते हुए भी दिन भर इनके साथ पूरा शहर घुमा और तुम्हारी कई बातों को फिर से याद किया....कुछ बातें तो वैसी भी थी, जो मैंने तुम्हे कभी बताई नहीं....याद है तुम्हे, तुमने एक लिस्ट बनाई थी -MY 100 DREAMS AND WISHES..वो लिस्ट कहीं खोयी नहीं थी, उसे मैंने ही तुम्हारे बैग से चुरा कर अपने पास रख लिया था...सोचा की आज तुम्हारी वो सारी ख्वाहिशें पब्लिक कर दूँ..अरे, घबराओ मत..उन सौ विशेज में से मैं 10 सेंसर्ड विशेज पब्लिक करूँगा..देख लो--
तुम्हारी डाई-हार्ड ख्वाहिशें -  
१)तुम्हारा एक डांस शो आयोजित हो और जिसका लाईव टेलीकास्ट पुरे विश्व में हो(जोक ऑफ द इअर)
२)तुम्हे विश्व सुंदरी के खिताब से नवाजा जाए(आई रिअली कान्ट स्टॉप लाफिंग)
३)सलमान के साथ बैठ कर 'मैंने प्यार किया' देखना.(प्योर पागलपन)
४)टाईम मशीन के जरिये पुराने दिनों में जाना..और सलमान खान से मिलना और अपने लैपटॉप पे उसे उसकी भविष्य में आने वाली सारी फ़िल्में दिखाना.(सो वीएर्ड)
५)प्रिजन ब्रेक के सारे सीरीज थीअटर में देखना(स्ट्रेंज विश).
६)मिस्टर इंडिया वाला डिवाइस हथियाना, जो तुम्हे इन्विज़बल बना दे.(व्हाट मोर कैन आई एक्सपेक्ट फ्रॉम यु)
७)'बर्फ घिरी हो वादी में' जैसी कोई जगह जाना और वहाँ रात भर अलाव जला कर आग तापना..गप्पे करना...और लिट्टियाँ सेंकना,पकौड़ियाँ बनाना(जो तुम्हे आता नहीं)
८)मेरे साथ स्विट्ज़रलैंड घूमना और वहाँ के बारिशों में भींगना(रोमांटिक)
९)मुझे स्टेज पे गाना गाते हुए और गिटार बजाते हुए सुनना(नेक्स्ट टू इमपॉसीबल)
१०)किसी बर्फीले पहाड़ी के सबसे ऊँची चोटी पर मेरे साथ बैठना जहाँ चाय का दौर चलता रहे और मैं तुम्हे अच्छी अच्छी कवितायें सुनाता रहूँ(ऑफ कोर्स मेरी सड़ी हुए कवितायें नहीं,बड़े बड़े कवियों की अच्छी कविताएं)
अच्छा सुनो,...तुम जानती हो कभी कभी तो तुम ऐसी बातें कह देती थी और वो भी इतना कॉन्फ़िडेंट होकर की मुझे हमेशा भ्रम होता था की तुम्हे सच में तो भविष्य देखना नहीं आता..याद है तुम्हे जब मैं दूसरे शहर जा रहा था,  नए कॉलेज में दाखिला लेने तो तुमने मुझे दो खत दिए थे..पहले वाले खत में लिखा था -'इसे अभी पढ़ना' और दूसरे वाले में लिखा था -'इसे अपने नए कॉलेज पहुँच कर पढ़ना'.मैंने तो पहले सोचा की वो चिट्ठी भी उसी वक्त पढ़ लूँ, फिर क्या ख्याल आया की उसे पढ़ा नहीं..वहाँ जाने के बाद ही पढ़ा उस चिट्ठी को..पहली लाईन देख कर तो मैं हैरान रह गया था..तुमने लिखा था -"देखो मैं इस चिट्ठी के साथ बहुत सी बारिश भी भेज रही हूँ..जो मेरी कमी तुम्हे महसूस नहीं होने देंगी..देखना तुम वहाँ पहुंचोगे तो ये बारिशें तुम्हारा स्वागत करेंगी, मैंने कहा है इनसे."...  उस दिन वहाँ सही में बारिश हो रही थी और मूसलाधार..तुम्हे पता है पुरे साल वहाँ जबरदस्त बारिश होते रही..यहाँ तक की सर्दियों में भी..वहाँ के लोगों ने भी कहा की यहाँ आजतक इतनी बारिश कभी नहीं हुई.पहली बार ऐसा हुआ है.मुझे तो लगा की तुम्हारी बातों में सच में कोई जादू था, या वो होता न, की जिनका दिल साफ़ और पवित्र होता है, भगवान उनकी कोई भी बात नहीं टालते..वही हुआ होगा..और फिर तुमसे ज्यादा साफ़ और पवित्र दिल की लड़की मेरे नज़र में दूसरी कोई नहीं है.

याद है तुम्हे, वो दिसंबर के ही दिन थे, एक दिन मैं बड़ा परेसान था, और कारण सिर्फ तुम जानती थी....सुबह सुबह ही तुमसे बात हुई थी और तुमने बड़े विश्वास के साथ कहा था की देखना शाम तक तुम्हारा मूड एकदम अच्छा और फ्रेश हो जाएगा.उस दिन शाम में मैं युहीं बहुत देर तक सड़कों पर भटकता रहा, और फिर जब घर आया तो पता नहीं किस ख्याल से अपने एक दोस्त का ब्लॉग पढ़ने लगा..वो उस समय मेरा एकमात्र दोस्त था जो हिंदी भाषा में ब्लॉग्गिंग करता था.उसके लिखे एक पोस्ट ने वहीँ उसी वक्त मुझे उसका इंस्टेंट फैन बना दिया..उसकी बहुत सी बातें बड़ी अपनी सी लगीं, उस लड़के से पहले से दोस्ती थी लेकिन बहुत ज्यादा अच्छी नहीं, और उसका ये रूप तो मेरे लिए एकदम अनजान सा था...याद है न तुम्हे मैंने फोन पर वो पोस्ट तुम्हे पढ़ के सुनाया भी था.उसने उस पोस्ट में लिखा था --"  कुछ दिन पहले उसी शहर में रहने वाला एक मित्र पूछ बैठा था तुम्हारे बारे में, "क्या उसे अब भी याद करते हो?" "  ना !!"  तुरत जबान से निकल पड़ा.. आधे मिनट की चुप्पी के बाद मैंने कहा, "  अब यादों में डूबे रहना जमाने को प्रैक्टिकल नहीं लगता है.. मगर अब भी उसे जब याद करता हूं, तो बहुत शिद्दत से याद करता हूं.."

उस दिन उसकी ये पोस्ट मुझे कितनी पस्संद आई थी, ये मैं आजतक उसे बता नहीं सका.उसकी इस पोस्ट के बाद तो जैसे मैं उसके ब्लॉग का पोस्ट-मार्टम करने लगा.एक के बाद एक कई पोस्ट पढ़ने लगा...उसके ब्लॉगर प्रोफाइल पर भी नज़र गयी तो सामने लिस्ट आई उन ब्लोग्स की जिसे वो उस समय फोलो कर रहा था.युहीं  रैंडमली एक ब्लॉग खोला पढ़ने के लिए.ब्लॉग का नाम बड़ा सुन्दर सा था लेकिन ब्लॉग-लेखिका का नाम तो और भी ज्यादा सुन्दर लगा.उनका और तुम्हारा नाम एक ही था..मुझे अच्छा खासा इंटरेस्ट आने लगा..पोस्ट पढ़ने से पहले मैंने सोचा की एक बार जरा प्रोफाइल खोल के देख लूँ..मैं हैरान रहा गया था..तुम्हारा और उनका नाम ही एक नहीं था, तुम दोनों के शहर भी एक ही थे..उनकी जिस पोस्ट पे सबसे पहले नज़र गयी वो थी एक कविता, एकदम बर्फ जैसी कोमल और अच्छी कविता..जो सर्दियों में एक गर्माहट सी देती हैं..याद है न मैंने तुम्हे ये भी पढ़ के सुनाया था..उनके उस कविता के कुछ लाईन ऐसे थे -
तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है, 
बरसता है बर्फ के फाहों सा 
और फिर ...... 
बस जाता है दिल की सतह पर 
शांत श्वेत चादर सा
मुझे ये कविता बहुत पसंद आई थी और तुम्हे भी.मैंने उसी वक्त इस कविता को अपनी डायरी में लिख के रख लिया था.मुझे उस कविता पर बहुत कुछ लिखने को मन कर रहा था, लेकिन एक तो उनसे मैं बिलकुल अनजान था और वो मुझे बड़ी हॉट-शॉट इन्टर्नैशनल लेखिका लग रही थी, तो बिना कुछ कहे वापस चला आया....दोनों के ब्लॉग मैं रात में बड़ी देर तक पढते रहा और मुझे कितना सुकून मिला ये मैं बता नहीं सकता..याद है तुमने ये  कविता सुन कर क्या कहा था : "देखो, मेरे नाम का जादू है सब..मेरे नाम की सभी लड़कियां बड़ी टैलेंटेड टाइप होती हैं और बहुत बहुत ज्यादा फेमस भी बनती हैं"   .इसपर मैंने तुम्हे जवाब दिया था : "इसमें कोई शक नहीं, की तुम्हारे नाम वाली लड़कियां बहुत टैलेंटेड होती हैं, लेकिन इसके साथ साथ तुम्हारे नाम वाली सभी लड़कियां बहुत खूबसूरत भी होती हैं, जैसे की तुम".तुमने बात को दूसरी तरफ मोड़ दिया था और मेरे इस बात का तुमने कोई जवाब नहीं दिया.

जानती हो, वो जो ब्लॉग-लेखिका थीं न, उनसे बाद में बहुत ही अच्छा,खूबसूरत और गहरा रिश्ता बन गया और सबसे कमाल की बात देखो, पिछले दिसंबर के ही वो भी दिन थे की एक शाम वो पुरे मजाक के मूड में थीं और उनके निशाने पे था मैं...उस शाम बातों की शुरुआत तो उन्होंने बड़ी प्यारी प्यारी बातों से की...जैसे मुझसे कहने लगीं की -'मुझे पता दो उसका, मैं समोसे भेजवा दूंगी'...कभी कहती की 'उसे मेरा एड्रेस दे दो..हम दोनों मिलकर तुम्हारी बुराइयां करेंगे' तो कभी कहती की -'तुम भी चले आओ यहाँ, साथ में चाय वाय पियेंगे'..ये प्यारी प्यारी बातें तो बस उनके छोटे मोटे बाण थे, असली छेड़ने वाले बाण तो उन्होंने बाद में छोड़ने शुरू किये जिसका जवाब देना मेरे लिए बड़ा कठिन हो गया था और मैंने भी बातों को दूसरी तरफ मोड़ दिया(कह सकती हो शरमा कर), उनके वो सारे सवाल और बातें अधूरे ही रह गए.
                             .....


ना आमद की आहट और ना जाने की टोह मिलती है
कब आते हो...कब जाते हो ...

ईमली का ये पेड़ हवा में हिलता है तो
ईंटों की दीवार पे परछाईं का छींटा पड़ता है
और जज़्ब हो जाता है, जैसे..
सूखी मिट्टी पे कोई पानी के कतरे फेंक गया हो
धीरे धीरे आँगन में फिर धूप सिसकती रहती है
कब आते हो..कब जाते हो...

बंद कमरे में कभी कभी
जब दिए की लौ हिल जाती है तो..
एक बड़ा सा साया मुझको
घूँट घूँट पीने लगता है..
आँखें मुझसे दूर बैठ के मुझको देखती रहती हैं
कब आते हो...कब जाते हो
दिन में कितनी बार मुझे तुम याद आते हो ..


[गुलज़ार]
                             .....

आते हुए लहरों पे जाती हुई लड़की..



[ हू तू तू - फिल्म का नाम  | तू हू हू हू-हू हा हू - तुम्हारा  वर्जन ]