Monday, November 28, 2011

चिट्ठी

तुम्हे भूल पाना कब आसान रहा है.जब भी कोशिश करता हूँ नाकाम ही होता हूँ.कोई अपने जिंदगी के सबसे खूबसूरत इग्यारह साल कैसे भुला सकता है, चाह के भी मुमकिन नहीं है.इन इग्यारह सालों में जिंदगी के हर छोटे बड़े फैसलों पर जिस शख्स के सहमति से मुहर लगती थी, उसे भुला पाना  बड़ा ही मुश्किल काम है.कुछ मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं, जो मेरी सच में फ़िक्र करते हैं, वो कहते हैं की अब तुम्हे भूल जाना ही मेरे लिए अच्छा है.लेकिन तुम कोई खिलौना तो नहीं, की अगर मेरे से अलग हो गयी तो मैं दिल बहलाने के लिए एक नया खिलौना लेते आऊं और तुम्हे बिलकुल भूल जाऊं? लोग कहते हैं की तुम्हे याद करूँगा, तो मुझे तकलीफ ही होगी.उन्हें मैं कैसे समझाऊं की की तुम्हे याद करने से हमेशा मुझे खुशी ही मिली है.जिस दिन तुम्हारी शरारती और कन्फ्यूज़्ड बातें याद आती है तो चेहरा खुद ब खुद खिल जाता है...उस समय दुःख,दर्द या तकलीफ कहीं आसपास भी नहीं फटकते..वे सुख के पल होते हैं जब मैं खुद को बेहद खुश और हल्का महसूस करता हूँ.
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यहाँ सर्दियाँ शुरू हो गयी हैं..मौसम बड़ा ही खूबसूरत हो गया है, एकदम वैसा ही जैसा की तुम्हे पसंद है.पुरे दिन हलकी बारिश होते रहती है..याद है न तुम्हे, जब भी सर्दियों में बारिश होती थी तो तुम बहुत खुश हो जाया करती थी.तुम्हारी दो फेवरिट जैकेट थी.एक तो वो 'कुछ कुछ होता है' फिल्म से इंस्पायर्ड 'गैप' वाली जैकेट और दूसरी ब्लैक वाली जैकेट जो तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद थी.तुम उस ब्लैक जैकेट को अक्सर पहनती थी और कहती थी.."देखो, इसमें मैं कितनी क्यूट लगती हूँ...जस्ट लाईक अ पेन्गुईन".मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ था जब बहुत सालों बाद फेसबुक पर तुम्हारी एक फोटो में किसी ने कमेन्ट में लिखा था -'आप बिलकुल पेन्गुईन के जैसी दिख रही हो'.उस समय मैंने सोचा की हो सकता है तुमने उसे ये बात कभी बताई हो और वो बस युहीं तुम्हे छेड़ने के लिए ये कमेन्ट लिख गयी.लेकिन अगर तुमने उसे ये बात कभी नहीं बताई तो तुम्हे खुद उसके उस कमेन्ट पर बेहद आश्चर्य हुआ होगा. 
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हमने एक लिस्ट बनाई थी, बहुत साल पहले.उस लिस्ट में हमने उन सब जगहों के बारे में लिखा था जहाँ हम साथ जाना चाहते थे.उनमे से एक जगह थी "ज़ुरिक".हमने ये तय किया था इन जगहों पर अगर हम जायेंगे तो साथ जायेंगे वरना कभी नहीं जायेंगे..लेकिन एक दफे पटना आने के क्रम में तुम ये वादा तोड़ते हुए ज़ुरिक चली गयी, और वहाँ से तुमने मुझे फोन किया था -"तेरे से किया प्रोमिस तोड़ रही हूँ, बता क्या कर लेगा'..तुमने फोन पर उस समय इतना इरिटेट कर दिया था की मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था और गलती से अगर उस समय तुम सामने  आ जाती तो मेरे पाँचों उँगलियों के निसान तुम्हारे नर्म,गुलाबी, मुलायम गालों पर छप जाते.फिर तुमने मुझे फोन पर सान्तवना देते हुए कहा की इंडिया आते वक्त तुम मेरे लिए वहाँ के चोकलेट लेते आओगी.तुमने अपना वादा तो पूरा जरूर किया लेकिन मेरे लिए बस एक चोकलेट लायी, और उसे मुझे देने के बाद मेरे से छीन कर खुद खा गयी.
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याद है एक दिन सुबह तुमने मुझे बड़ा लंबा ई-मेल किया था और बताया था की तुम्हारे शहर में बहुत बर्फ गिरी थी और शाम में तुम अपनी छोटी बहनों के साथ घर के सामने वाली बेंच पर बैठ के सर्दियों में चोकलेट और आइसक्रीम के डेडफुल कॉम्बीनेसन के मजे ले रही थी.उस दिन मेरे शहर में सुबह से ही बारिश हो रही थी, और मैं बहुत देर तक तुम्हारे मेल के बारे में सोचता रहा.मैं सपने देखने लगा की काश कभी ऐसा हो की मैं तुम्हे बिना बताये, तुम्हारे शहर में आ जाऊं और तुम्हारे घर के बाहर लगी किसी बेंच पर बैठ के तुम्हारे बाहर निकलने का इंतज़ार करूँ.तुम घर से बाहर कदम निकालो और धुप की किरण तुम्हारे चेहरे को धीरे से आकार छुए.मैं दूर से बस तुम्हे देखता रहूँ और फिर तुम्हे खबर किये बिना तुम्हारे पीछे पीछे पूरा शहर घूमता रहूँ, जहाँ भी तुम जाओ.फिर जब शाम में तुम अपनी फेवरिट कॉफी-शॉप में बैठ कर 'मिल्स एंड बन्स' टाईप कोई नॉवेल पढ़ रही हो तो मैं चुपके से तुम्हारे पास आकार तुम्हारे कानों में "आई लव यू" बोल के हल्के से तुम्हारे गालों को चूम लूँ.तुम्हारा इक्स्प्रेशन उस समय बिलकुल तुम्हारे स्टाईल का अपने आप में यूनिक वाला होगा.मैं वो पल महसूस कर सकता हूँ जब तुम 'ओ माई गॉड' चिल्लाकर कुछ पल मेरे तरफ अविश्वास से देखोगी, की क्या ये मैं ही हूँ और फिर मेरे गले लग जाओगी.


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Friday, November 25, 2011