Saturday, August 6, 2011

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तुम बिन

दो तीन दिनों से जबरदस्त मूड स्विंग हो रहा है.जब कभी लगता है की मन बहुत दुखी है, ठीक उसी समय कहीं से कोई एक सपोर्ट सिस्टम आ कर मन को वापस अच्छे मुड में लेते आता है.दो दिनों से ये सपोर्ट सिस्टम खत,फिल्म,गानों या फिर टेडी के फॉर्म में सामने आ रहे हैं.रह रह कर कुछ पुरानी बातें, कुछ पुरानी तारीखें याद आती हैं, जिससे ऑटोमैटिक्ली चेहरे पे एक मुस्कान आ जाती है.फिर जब ये लगने लगता है की मन बहुत खुश है, तब पता नहीं कहाँ से कुछ उदासी के बादल सामने आ जाते हैं.पूजा जी ने एक बार जो लिखा था वो भी याद आता है - "होता है न जब आप सबसे खुश होते हो...तभी आप सबसे ज्यादा उदास होने का स्कोप रखते हो".दो दिनों से मेरे साथ ऐसा ही हो रहा है, जब तुम्हारी कोई भी बात याद आ रही है तो मन खुश हो जा रहा है, लेकिन ठीक थोड़े समय में ही कुछ और जुड़ी बातें याद आने से गहरे उदासी में चला जा रहा हूँ..फिर धीरे से कोई एक सपोर्ट सिस्टम आकार मुझे उस उदासी से खिंच ला रही है..दो दिनों से ये सिलसिला चलते आ रहा है.

उस दिन की भी सभी बातें एक एक कर के याद आ रही हैं.ठीक उसी सिरीअल में जैसा की उस दिन हुआ  सैंडविच-अ टेंडर अफेअर,पुस्तकम,लक्ष्मी कोम्प्लेक्स,ऑटो,अपना बाजार और फिल्म."apprepound" शब्द भी अच्छे से याद है..ये भी की कितनी बार कब कब तुमने इस शब्द का इस्तेमाल कैसे किया था..और ये भी की लाख पूछने पे तुमने इसका अर्थ नहीं बताया था.या फिर ये हो सकता है की तुम्हे खुद ही मालुम न हो, ऐसा कोई शब्द का कोई अस्तित्व ही न हो, उन शब्दों में से एक शब्द को जिसका आविष्कार तुमने किया था. 

कैल्गरी, कनाडा का एक शहर..पता नहीं कब से ज़ेहन में बसा हुआ है..वो भी बस उस एक फिल्म के कारण जिसे जब भी देखता हूँ तो न जाने मैं यादों के किन गलियारों में चला जाता हूँ.हम प्लान बनाया करते थे की एक दिन उस शहर में जायेंगे और उस गिफ्ट स्टोर का नाम खोज वहां से मैं तुम्हारे लिए ठीक वैसा ही कुछ तोहफा खरीदूंगा और फिर क्रिसलर के उसी कन्वर्टबल मॉडल(जो फिल्म में था) से उस नदी किनारे जायेंगे.कल ही रात वो फिल्म फिर से देखा मैंने..रिपीट मोड में-  तुम बिन..

अर्थ भी कितना सही है फिल्म का..ये गाना अंदर तक मुझे झकझोर देती है.लेकिन फिर भी लगता है की इसे सुनता रहूँ, लगातार..



..और मौका तो देखो, कल फ्रेंडशिप डे भी है!!