Sunday, July 3, 2011

// // 24 comments

काश

तुम खुश हो जाया करती थी
मेरी हर छोटी से छोटी बातों पर
मेरी बेतुकी कवितायों की भी तुम
तारीफें करती नहीं थकती थी
मेरी लिखी हर कविताओं में
छवि तुम्हारी होती थी
और तुम उन कविताओं को
सहेज कर अपने पिंक कलर के
डायरी में लिख लेती थी
काश, की उन कविताओं की तरह
मैं तुम्हे भी कहीं सहेज के रख पाता

24 comments:

  1. गहरा, कुछ और बतायेंगे श्रीमानजी।

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  2. kissi ko bahut yaad kiya ja rha hai !!!

    aapke iss post se hume yaad aya ki aapne ek baar humse kaha tha ki hume apni kahani btayee... m still waitin

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  3. kavita to achhi lagi.deep thought hai.ap kavita bhi likhte hain.

    vaisse apne kahi thi koi patna ke mandir ki post hai?wo nahi mili mujhe

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  4. @सपना भाभी..

    आपको मैंने दो ब्लॉग के लिंक भेजे थे.पहला वाला लिंक देखिएगा. वो मेरा मुख्य ब्लॉग है.इस ब्लॉग पे तो कभी कभी लिखता हूँ, ज्यादातर कवितायें या फिर युहीं कुछ और..

    ब्लॉग का लिंक फिर से दे रहा हूँ - "मेरी बातें"

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  5. सहेजा तो हुआ है ..देखो न यहाँ भी वही है :).
    प्यारी पंक्तियाँ.

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  6. धत..रुला दिया फ़ालतू में ही...:((

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  7. "काश, की उन कविताओं की तरह
    मैं तुम्हे भी कहीं सहेज के रख पाता"
    अरे बबुआ ये जो इतनी सारी कवितायेँ और ये ब्लॉग है (एक्सक्लूसिव) ये उसी सहेजने का परिणाम है!!

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  8. पिंक डायरी में और कौन कौन सी कवितायें हैं???

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  9. बहुत ही बढ़िया
    दुखद है पर दिल से लिखा हुआ है
    बहुत बेहतर है

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  10. कभी कभी इतना बढियां लिखते हो की तुम्हारा पुराना सब सरल-गरल भुला जाते हैं...

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  11. आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा , मैं बी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    मै नइ हु आप सब का सपोट chheya
    joint my follower

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  12. जिन्होंने आपके शब्द सहेजे उसको सहेजना आसान कहाँ होगा ... लाजवाब रचना है अभी जी ...

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  13. वाह अभि , कविता निकालने लगे डायरी से | आओ स्वागत है इस भावों की नगरी में | अच्छा लगा

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  14. कल ,शनिवार (३०-७-११)को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ,नई -पुराणी हलचल पर ...कृपया अवश्य पधारें...!!

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  15. कल ,शनिवार (३०-७-११)को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ,नई -पुराणी हलचल पर ...कृपया अवश्य पधारें...!!

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  16. ये तुम्हारी लिखी अब तक की सबसे अच्छी कविता है..

    आज मजाक नहीं उड़ाउंगा.

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  17. बहुत प्यारी कल्पना "काश तुम्हे सहेज कर रख पाता "
    बधाई
    आशा

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  18. pyar me kya tera kyap mera...pyaar ko saheja gaya hai kahin bhi...behtarin panktiyan...sadar badhayee aaur apne blog par amantran ke sath..

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  19. वाह...बहुत ही अच्‍छा लिखा है ...।

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  20. ameen....apka ye kaash....kaash poora ho jaye....!!

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया