Friday, June 24, 2011

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बारिश की बुँदे

बारिश की बुँदे
तुम्हारे चेहरे पे
बड़ी दिलकश लगती थी
बारिशों के मौसम में
सोंधी मिटटी की महक
और हलकी मद्धम बहती हवा
तुम्हे पागल बना देती थी
तुम अक्सर खो जाया करती
किन्ही ख्यालों में
दुनिया को भूल जाती थी
रूमानी हो जाती थी तुम
बारिशों में भींगना,
हथेलियों में बारिश की बूंदों को
कैद करने की नाकाम कोशिशें करना
घास पे गिर रहे बूंदों को
एकटक देखते रहना
और फिर नंगे पांव ही घास पे दौड जाना
तुम्हारे प्रिय शौक थे.
वाटरलोगिंग में घुटने तक पानी में
चल के जाना, नाव तैराना,
गर्म भुट्टे और 'चंदू के दूकान' की
पकौडियां खाना
तुम्हे बहुत पसंद था
बादलों को देख के तुम कहती -
ये बादल मेरे दोस्त हैं
मुझसे मिलने आते हैं
ये फुहार मुझे जिद कर के
पास बुलाते हैं
भीगने और नाचने के लिए
बारिशों में दिल खुश रहता है
ख्वाहिशें पूरी होती हैं
बारिशें बहुत खूबसूरत होती हैं.

तुम्हारी इन बातों को सुन
मैं भी मन ही मन कहता
हाँ, बारिशें बहुत खूबसूरत होती हैं,
बिलकुल तुम्हारी तरह.

12 comments:

  1. सच में बारिशें खूबसूरत होती हैं..23साल के लड़के की सर्जरी हुई थी दोपहर को..दोनो हिप जॉएंट्स बदले गए थे लेकिन रात की रिमझिम बरसती बूँदों को देखने का मोह न छोड़ पाया था...मशीनों..तारों..खून ..दर्द की तेज़ नशीली दवाओं से घिरे रोगी के पलंग को हिलाना भी खतरनाक था लेकिन एक सिस्टर का दिल पिघला और किसी तरह से पलंग का रुख खिड़की की तरफ कर दिया..सिस्टर ने उसके चेहरे की मुस्कान देख कर उसकी माँ को बाहर आकर बताया तो उसका चेहरा भी खिल उठा...

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  2. वाह क्या खूबसूरत कमेन्ट है :) दिल खुश हो गया :)

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  3. कबन पार्क, बारिश। कौन मिला वहाँ, पास में हैं हम भी, घर ले आइये, चाय और पकौड़ी तय रहा।

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  4. ज़िन्दगी में मुस्कुराना सीखिये
    फूल बंज़र में उगाना सीखिये

    खिडकियों से झांकना बेकार है
    बारिशों में भीग जाना सीखिए

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  5. barish hoti hi hai aesi ..bahut khubsuart....sabko apne me bigo leti hai....

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  6. @प्रवीण जी,
    हा हा भैया...वैसे तो फ़िलहाल कोई है नहीं, हाँ लेकिन कोई मिलती है तो कबन पार्क से सीधा आपके घर ही आऊंगा..चाय पकौड़ी के लिए ;) फिक्स रहा

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  7. भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन!!

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  8. wow abhi sir!very rommantic and touching!!
    cubbon park? ahaaaan :D

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  9. आपकी रचना पढने से पहले मैंने शेखर सुमन के ब्लाग देखा तो सोंचा क्यूँ न प्रेरणा का श्रोत भी देखूं
    अछि लगी रचना , बधाई ....

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  10. बारिश में मिट्टी की सौंधी खुशबू बहुत अच्छी लगती है |समसामयिक रचना बहुत अच्छी लगी |बधाई
    आशा

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  11. वाह!!!वाह!!! क्या कहने..प्यारी कविता।

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  12. वाह क्या खूबसूरत है :) दिल खुश हो गया :)

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