Friday, June 24, 2011

बारिश की बुँदे

बारिश की बुँदे
तुम्हारे चेहरे पे
बड़ी दिलकश लगती थी
बारिशों के मौसम में
सोंधी मिटटी की महक
और हलकी मद्धम बहती हवा
तुम्हे पागल बना देती थी
तुम अक्सर खो जाया करती
किन्ही ख्यालों में
दुनिया को भूल जाती थी
रूमानी हो जाती थी तुम
बारिशों में भींगना,
हथेलियों में बारिश की बूंदों को
कैद करने की नाकाम कोशिशें करना
घास पे गिर रहे बूंदों को
एकटक देखते रहना
और फिर नंगे पांव ही घास पे दौड जाना
तुम्हारे प्रिय शौक थे.
वाटरलोगिंग में घुटने तक पानी में
चल के जाना, नाव तैराना,
गर्म भुट्टे और 'चंदू के दूकान' की
पकौडियां खाना
तुम्हे बहुत पसंद था
बादलों को देख के तुम कहती -
ये बादल मेरे दोस्त हैं
मुझसे मिलने आते हैं
ये फुहार मुझे जिद कर के
पास बुलाते हैं
भीगने और नाचने के लिए
बारिशों में दिल खुश रहता है
ख्वाहिशें पूरी होती हैं
बारिशें बहुत खूबसूरत होती हैं.

तुम्हारी इन बातों को सुन
मैं भी मन ही मन कहता
हाँ, बारिशें बहुत खूबसूरत होती हैं,
बिलकुल तुम्हारी तरह.

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