Thursday, March 17, 2011

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तुम्हारे खत



रात कुछ काम से एक पुराना फ़ाइल फोल्डर खोला, मकसद तो था एक गुम हुआ रसीद ढूँढना...लेकिन फोल्डर खोलते ही तुम्हारे खतों पे नज़र चली गयी, जिसे मैंने बड़ा ही संभाल के उसी ब्लू रंग के पोलिथिन में रख दिया था,जिसमे तुमने एक टेडी बीअर मुझे गिफ्ट किया था.कुछ तेईस खत होंगे तुम्हारे, जो किसी भी तरह से अभी तक पुराने नहीं हुए..न कहीं से फटे हैं..अब भी लगता है की जैसे कुछ देर पहले ही तुमने वो खत लिख मुझे थमाया था..तुम्हारे लम्स की गर्माहट अब तक उन खतों में है.

याद है तुम्हे..तुमने मुझे दो लेटर पैड खरीद के दिए थे और दोनों में से तुमने कुछ चार पांच पन्ने फाड़ लिए थे...ये कह कर की तुम उन पन्नों में मुझे खत लिखोगी.तुम्हारे दिए वो दो लेटर पैड अब तक मेरे पास सही सलामत रखे हुए हैं.मैंने एक भी पन्ना खर्च नहीं किया.वो जो गुलाबी रंग का एक लेटर पैड था न, उससे अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत ही शुभ काम हुआ है.मुझे ये सोचकर बेहद खुशी हुई की अब भी तुम किसी न किसी तरह से मेरी मदद कर ही दिया करती हो.

तुम्हे खत में गाने लिखने की बीमारी थी....तुमने मुझे पहला खत कब लिखा था ये याद है न तुम्हे? चार पन्नों का वो खत था, जिसमे से दो पन्ने गानों से भरे पड़े थे.पहले पन्ने पे बड़े ही प्यार से तुमने एक गाने के दो लाईन लिखे थे -

"आँखों में कुछ आँसू हैं कुछ सपने हैं..आँसू और सपने दोनों ही अपने हैं..
दिल दुख है लेकिन टुटा तो नहीं है...उम्मीद का दामन छुटा तो नहीं है"

और गाने के इन दो लाईनों के बाद तुमने तरह तरह की बातों से मुझे समझाने की कोशिश की थी की बुरे दिन हमेशा नहीं रहते..असफलताओं से हमें घबराना नहीं चाहिए, उनका सामना करना चाहिए..मुझे उस वक्त बड़ी हंसी आ गयी थी जब मैंने तुमसे पुछा था की ये सब बातें तुमने खुद से लिखीं हैं? और फिर तुमने बड़े ही मासूमियत से जवाब दिया था की "मेरे पास इतना दिमाग कहाँ..ये सब तो मैंने अपनी दीदी से लिखवाया है..पढाई के लिए जब मैं दुसरे शहर जा रहा था तब भी तुमने मुझे एक ख़त लिखा था , उस ख़त के आखिर में भी दो गानों के कुछ लाईन थे, जिसे तुमने थोड़ा सा मोडीफाई किया था..
"आओ न आओ न, मेरे पास आओ न दोस्ती के रास्ते, आकर महकाओ न..
तुम जैसा कोई नहीं है, ये तुम नहीं जानते तुम हो तो स्वर्ग यहीं है, ये तुम नहीं जानते..."
और गाने के इन लाईनों के ठीक बाद तुमने लिखा था -
"रहे चाहे दुश्मन ज़माना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा.."
ये दोनों गानों को मैंने कितनी ही बार सुना है, लेकिन तुम्हारे ख़त में इसे पढने के बाद पता नहीं क्यों उस वक्त मेरे आँखों में आँसू आ गए थे.

उन दिनों तुम्हे अंग्रेजी में खत लिखने का बुखार चढ़ा था..और तुम्हारी वो अंग्रेजी पढ़ अक्सर मैं हँसने लगता था.मैं तुम्हे कहता भी था की क्या जरूरत है अंग्रेजी में ख़त लिखने की..समझने में दो घंटे लगते हैं...तुम कहती इस बात पर की अच्छा ही है न, मेरी तरह तुम्हारी अंग्रेजी भी परफेक्ट हो जायेगी....स्ट्रोंग हो जायेगी(और उस समय तुम्हारी अंग्रेजी कितनी स्ट्रोंग थी ये मैं अच्छे से जानता था).अंग्रेजी के शब्दों के साथ इक्स्पेरिमेंट करना तुम्हे बहुत ज्यादा पसंद था. कोई भी नए शब्द तुम कहीं देख लेती तो उसे सीधा अपने खत में इस्तेमाल कर लेती थी..ये जाने बिना की उसका मतलब क्या होता है..तुम अक्सर अंग्रेजी के नए नए शब्दों का अविष्कार ही कर लिया करती थी...

"apprepound" शब्द याद है न तुम्हे? ये भी उन शब्दों में से एक था जिसे तुमने ईजाद किया था...लगभग हर ख़त में जगह जगह तुम इस शब्द को अलग अलग तरीकों से इस्तेमाल करती थी...मेरे लाख पूछने पर भी तुमने इसका अर्थ मुझे नहीं बताया था.एक बार मैंने तुमसे कहा था जब की apprepound नाम के किसी शब्द का अस्तित्व नहीं है तो तुम मुझसे लड़ बैठी थी.दो दिन तुम मुझसे रूठी रही थी...इस तरह की बेतुकी हरकत तुम अक्सर किया करती थी, इसलिए मैंने कभी दोबारा तुम्हारे द्वारा इजाद किये गए शब्दों का मतलब ही नहीं पूछा...तुम्हे नाराज़ करना मैं अफोर्ड नहीं कर सकता था न...लेकिन कभी कभी तुम अंग्रेजी में ही कुछ बेहद अच्छे कोटेसन भी लिख भेजती थी, और तब मैं ये सोचने पर मजबूर हो जाता था की तुम्हारे पास भी दिमाग है...तुमने एक ख़त में लिखा था


"Never frown, even if you are sad because, you never know who is falling in love with your smile"

कॉलेज में जो तुम्हारी पहली चिट्ठी मुझे मिली थी..उसमे भी बहुत अच्छी अच्छी बातें तुमने लिखी थी....एक कोटेसन जो की मुझे बेहद पसंद आया था और जिसे मैंने तुम्हारे ही गिफ्ट किये हुए नोटपैड में बड़े बड़े अक्षरों में लिखकर अपनी मेज के ठीक सामने वाली दिवार पर चिपका दिया था...वो कोटेसन था -


"There was something special in the air, may be it was magic and there was something in your voice when you use to call my name..there was moment in my life that i can still remember and there are places in my heart that I can't forget."
तुम्हारे ही खतों में एक बार मुझे एक कविता मिली थी, और मैं बहुत दिन इस भ्रम में रहा की वो कविता तुमने खुद से लिखी है...तुमने कविता के नीचे अपना नाम जो लिख दिया था..वैसे तो मुझे यकीन था की तुमसे कवितायें हो ही नहीं सकती, लेकिन फिर कभी कभी लगता तुम्हारा शहर लन्दन काफी मैजिकल सा शहर है, कुछ भी मुमकिन है...हो सकता है तुम कवितायेँ लिखना शुरू कर दी हो वहां जाकर...ये तो बाद में मालुम चला की तुम मुझे 'इम्प्रेस' करने के लिए कविता के नीचे अपना नाम लिख दी थी...वो कविता थी - 

"The angels won't gave wings to me. they will to you..they will set you free..
I might change my belief someday,and I will proove myself to you...
You'll see the truth deep into my eyes,you'll know then these words are true..
And someday soon I'll realise,My luck to have a friend like you".

तुम्हारी चिट्ठियों में मुझे अक्सर ये नज़र आता था की बचपना अभी तक तुममे कायम है..चिट्ठी में बहुत सी तुम ऐसी बातें लिख दिया करती थी जिसे पढ़ मैं बहुत हँसता था, और यकीन मानों मैं जब भी परेसान होता तो तुम्हारी उन चिठियों को पढने लगता जिसमे तुम बहुत सी 'इललॉजिकल' बातें लिखती...उन्हें पढ़कर मैं किसी भी मूड में रहूँ, हंसी खुद ब खुद चेहरे पर आ जाती थी...जैसे तुम्हारी इस झेलू शायरी पर हंसी आई थी मुझे....

"आपको मिस करना रोज की बात है...याद करना आदत की बात है..
आपसे दूर रहना किस्मत की बात है..मगर आपको झेलना हिम्मत की बात है "..

इस शायरी के बगल में तुमने एक गन्दा सा कार्टून चिपका दिया था,जो की पता नहीं किस एंगल से तुम्हे इतना क्यूट दीखता था...कार्टून के स्टिकर के नीचे तुमने cutieee लिख रखा था.एक कोई फ़ालतू सा बिना सर पैर वाला जोक भी तुमने लिखा था...जो मुझे बहुत देर के बाद समझ में आया था, और जिसपर मुझे हंसी भी नहीं आई थी....उन दिनों खत में जब तुम कभी बहुत ज्यादा सीरिअस बातें लिख देती तो मुझे हंसी आ जाती थी(सीरिअसली), और मैं तुमसे कहता भी था की तुमपे ये सीरिअस टाईप बातें सूट नहीं करती..बचपना करते अच्छी दिखती हो..समय के साथ तुम्हारी सोच बढ़ने लगी, लेकिन वो बचपना तो अब तक कायम ही है.थोड़ा कम हुआ है, लेकिन है तो अब भी.

वैसे तो मुझे पुराने दिनों में पहुचाने के काफी रास्ते हैं...लेकिन सबसे अच्छा,आसान  रास्ता तुम्हारे ये तेईस खत ही हैं, जिसे पढ़ते मुझे लगता है की मैं फिर से उन्ही दिनों में पहुँच गया हूँ जब मैं तुम्हारे साथ घूमता था..तुम्हारे करीब था..तुम्हारे पास था.उस समय मेरी क्या भावनाएं थी तुम्हारे प्रति ये तो नहीं पता लेकिन तुम्हारी मासूम सी हंसी दिल को अजीब सा सुकून देती थी..तुम हँसती थी, नौटंकियां करती थी,बचपना दिखाती थी तो मुझे अच्छा लगता था..तब मैं खुश रहता था.अब तुम नहीं हो मेरे साथ..मेरे पास..लेकिन तुम्हारे ये खत अब भी मेरे पास हैं,जिसे मैंने एक अमानत के जैसे संभाल के रखा है.

कुछ आज से पांच साल पहले तक तुम्हारे लिखे खत मुझे मिलते रहे..अब नहीं मिलते तुम्हारे खत मुझे..ये एक तरह से अच्छा भी है..क्यूंकि तुम्हारे खत पढ़ के मैं उन रास्तों पे चलने लगता हूँ जहाँ खुद को तुम्हारे और करीब पाता हूँ..जहाँ तुम और ज्यादा मेरे अंदर बस सी जाती हो..लेकिन शायद अब समय है की उन रास्तों पे आगे न बढूँ..तो ऐसे में ये अच्छा ही है की तुम्हारे खत नहीं मिलते हैं मुझे अब.

यादों में डूबे डूबे कब सुबह के चार बज गए पता ही नहीं चला...बाहर तो अभी अँधेरा है, लेकिन हवा तेज बह रही है....ये हवा वैसी ही है जैसे उन दिनों के वसंत में बहती थी..क्या तुम्हारे शहर में भी ऐसी ही हवा बह रही है?

ये गाना उस समय हम दोनों की पसंद थी न..इस मौसम में ये गाना कमाल करती है - 




16 comments:

  1. बेहतरीन..तारीफ के लिए शब्द नहीं है मेरे पास..
    प्यार का जो अहसास होता है उसे बिलकुल उसी तरह से आपने लिखा है..!!
    बहुत अच्छा !!

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  2. दिल की बात सीधे दिल से निकल कर ब्लॉग पे :)
    सीधी ,सरल,सहज पर बहुत ही प्यारी अभिव्यक्ति.

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  3. सच में खत में जो बात होती है वो ईमेल में कहाँ? आपको एक बात बताऊँ? आप हंसोगे. जब मैं गुवाहाटी में थी २ साल तक तो घर जाना नहीं हुआ था. वहाँ इन्टरनेट की सुविधा तो थी ही, तो मैं पापा को उनके ऑफिस के मेल आई डी में ईमेल किया करती थी, उस समय मेरे पास मोबाइल भी नहीं था. और फोन करने के लिए बाहर जाना होता था वो भी लंबी कतार में. २ साल के बाद घर आई तो, सफाई के दौरान मैंने एक फाइल देखी, जिसमे मेरे पापा ने मेरे सारे उलटे-पुलटे ईमेल को प्रिंट करके संजो के रखा था. मैं बता नहीं सकती मुझे उस वक्त कैसा लग रहा था? सो खत बहुत अनमोल होते है. आप इन्हें ऐसे ही संभाल के रखियेगा.

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  4. आपने आज बहा डाला, सच कहा है खतों में, आँसू और सपने दोनो ही अपने हैं।

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  5. होली की ढेरों शुभकामनाएं.
    नीरज

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  6. हुजुर क्या क्या लिख दिया इन खतों के बहाने .....कहाँ से यादों की फैलें उलट पलट बैठे आपने...

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  7. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  8. कभी कभी यादों में डूबना बहुत अच्छा लगता है अभि ! शुभकामनायें होली की ! !

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  9. abhi ji khat dena ua fir lena aam si ek bat hai..lekin us khat ko samvalna...uski khusboo ko meshsus karna..bhut gehri baat hai...khat padhna or usme likhe syri ko bardaast krna..v koi saadharn baat nhi...ye wahi krsakte hai jinhe wo syri samjh na aaye....aapko holi or aapke khat ke lie bhut bhut subhkamnayen....

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  10. यादों में डूबे लम्हे ....होली की शुभकामनाएँ

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  11. सुन्दर यादें संजोयी हैं……………आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  12. वन्दना,
    बिलकुल तुम्हारे जैसी एक मेरे पास भी छोटी सी कहानी है ई-मेल प्रिंट करवाने की...बताऊंगा कभी, हो सके तो किसी और दूसरे पोस्ट में :) :)

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  13. दिल की बात सीधे ब्लॉग पर

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  14. Abhi, tumhara ye khat bahut hi pyara laga....komal narm ahsaso ko bikherta hua...bahut hi achchha...

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया