Thursday, December 23, 2010

मीना कुमारी की शायरी (४) - उनकी आवाज़ में

कोई चाहत है न जरुरत है
मौत क्या इतनी खूबसूरत है

मौत की गोद मिल रही हो अगर
जागे रहने की क्या जरुरत है

जिंदगी गढ़ के देख ली हमने
मिटटी गारे की एक मूरत है

सारे चेहरे जमा हैं माजी के
मौत क्या दुल्हिनों की सूरत है

--- x x x ---


यह न सोचो कल क्या हो
कौन कहे इस पल क्या हो

रोओ मत, न रोने दो
ऐसी भी जल-थल क्या हो

बहती नदी की बांधे बांध
चुल्लू में हलचल क्या हो

हर छन हो जब आस बना
हर छन फिर निर्बल क्या हो

रात ही गर चुपचाप मिले
सुबह फिर चंचल क्या हो

आज ही आज की कहें-सुने
क्यों सोचें कल, कल क्या हो.

मीना कुमारी की शायरी के पहले के पोस्ट आप यहाँ पढ़ चुके हैं, अगर नहीं तो क्लिक कर के पढ़ लें..
आज भी सुनिए मीना कुमारी जी की ये नज़्म उन्ही के आवाज़ में..

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता

जब जुल्फ की कालिख में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

हंस हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुने टुकड़े
हर शख्स की किस्मत में इनाम नहीं होता

बहते हुए आंसू ने आँखों से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वो जाम नहीं होता

दिन डूबे हैं या डूबी बरात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

7 comments:

  1. मेरे लिए तो, पहले भी कहा है, अन्मोल एवं नमन योग्य है यह पोस्ट!!

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  2. "समस हिंदी" ब्लॉग की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को
    "मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये !

    ()”"”() ,*
    ( ‘o’ ) ,***
    =(,,)=(”‘)<-***
    (”"),,,(”") “**

    Roses 4 u…
    MERRY CHRISTMAS to U…

    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  3. यह गजल तो हम सभी के लिए मीनाजी की अदभुत धरोहर है

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  4. में
    खिलते हैं दिलों में फूल सनम सावन के सुहाने मौसम
    में
    होती है सभी से भूल सनम सावन के सुहाने मौसम में

    यह चाँद पुराना आशिक़ है
    दिखता है कभी छिप जाता है
    छेड़े है कभी ये बिजुरी को
    बदरी से कभी बतियाता है
    यह इश्क़ नहीं है फ़िज़ूल सनम सावन के सुहाने
    मौसम में।
    बारिश की सुनी जब सरगोशी
    बहके हैं क़दम पुरवाई के
    बूंदों ने छुआ जब शाख़ों को
    झोंके महके अमराई के
    टूटे हैं सभी के उसूल सनम सावन के सुहाने मौसम में
    यादों का मिला जब सिरहाना
    बोझिल पलकों के साए हैं
    मीठी सी हवा ने दस्तक दी
    सजनी कॊ लगा वॊ आए हैं
    चुभते हैं जिया में शूल सनम सावन के सुहाने मौसम

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  5. Bemisaal Shayri..koi chahat hai na jarurat hai..Dard ki intehaa hai..Best of Meena kumari ji.

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया