Saturday, November 6, 2010

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यादों में एक दिन

(काफी दिनों बाद इस ब्लॉग के तरफ ध्यान गया मेरा आज..मेरे कुछ पुराने नोट्स में से एक नोट्स यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ आज)



..अपना नया वाकमैन दिखाने के लिए वो हद बेचैन थी..बेचैन क्या थी, बस जलाना चाह रही थी की उसके पास वाकमैन है और मेरे पास नहीं. कोचिंग के बाद मुझे रुकने के लिए पहले ही उसने कह दिया था, और साथ में ये भी कह दिया था की शशांक को लेकर मेरे से मिलने नहीं आना..वो शशांक से इतना चिढ़ती क्यों है मुझे कभी पता नहीं चला...मुझे शशांक के साथ कोचिंग से बाहर आते देख उसने अजीब सी शक्ल बना ली थी..ये अजीब शक्लें बनाने में उसने तो पी.एच.डी कर रखी थी..शशांक के जाने के बाद उसके पास गया और उसके कुछ बोलने के पहले ही बोल दिया मैंने - यार क्या बात है..नयी ड्रेस..नया वाल्कमैन..नए शूज..अच्छी लग रही हो यार आज तुम तो.. तारीफें सुनना तो उसे सबसे ज्यादा पसंद है, और यही रामबाण सब इस्तेमाल करते हैं..चाहे उसके दोस्त हो, भाई बहन या मैं. 

इस बात को बीते कई साल हो गए, लेकिन आज भी ऐसे याद है जैसे अभी कुछ देर पहले की ही बात हो..लाल रंग का टॉप और जींस पहन कर वो आई थी. अपने कपड़े और स्टाइल का ख्याल तो ऐसे रखती थी जैसे बचपन से ही कोई मोडल हो. मेरे हर पसंद पे उसको ऐतराज़ था..शायद अब भी है. उस दिन मुझे देख उसने सबसे पहले यही कहा था "तुम तो एकदम पागल हो..ड्रेस सेन्स नाम की कोई चीज़ ही नहीं तुममें..फोर्मल्स के साथ भी कोई कभी कैप पहनता है..बुद्धू हो तुम". उसे मैं मजाक में बोल दिया करता था तुम तो विदेशी हो.हमेशा अपनी दीदी, भैया के बारे में बताती रहती हो जो लन्दन में रहते हैं...हम तो गरीब लोग हैं..यहीं पटना में सारा जिंदगी रहना है. वो मेरे इस मजाक से हद चिढ़ती थी. उस समय पता ही नहीं था की ये 'विदेशी' शब्द क्या गुल खिलायेगा.

बोरिंग रोड तो ऐसा इलाका है जहाँ सब स्टुडेंट्स ही दीखते थे. कपल्स भी आराम से दिख जाते थे. वो इस बात से चिढ़ती भी. उस दिन भी उसने कहा था - "ये लोग को कोई काम धाम नहीं है क्या..चिपक के बैठी रहती है सब अपने बॉयफ्रेंड के साथ..मन करता है दो थप्पर मारें कस के ". मैं उसकी इस बात पे हँसने लगता और उसे चिढ़ाने के लिए फिर से पूछ बैठता - अच्छा तुम्हारी दीदी का बॉयफ्रेंड नहीं है क्या? तुम बताती हो एक के बारे में?..वो फिर गुस्सा दिखाते हुए कहती "मेरी दीदी अच्छी लड़की है..उसका कोई चक्कर वक्कर नहीं है. ये सब बेकार लोगों के काम हैं..सुनो तुम भी कभी अपनी गर्लफ्रेंड मत बनाना..एक तो पैसा भी बर्बाद होगा इस सब के पीछे और घर पे आंटी, अंकल से मार भी खाओगे. इतना बोल कर वो अजीब तरह से हँसने लगी और मैं बस चुप चाप नज़रें नीची कर  हल्का हल्का मुस्कुरा रहा था.

वो बातें करते करते अजीब से एक्सप्रेसन बना लेती थी.आँखों को कुछ अलग ही तरह से घुमती..बात करते करते अपने बड़े बड़े झुमकों को भी कभी छु लेती थी..अपना गुस्सा हमेशा अपने बैग पे ही निकालती थी. हाथों से  हवा में कई शक्लें बना देती थी.."ओ शिट" भी इतने प्यार से बोलती की "ओ शिट' को भी उससे प्यार हो जाये..मैं हमेशा सोचता की कोई इतना क्यूट एक्सप्रेसन कैसे बना सकता है? बहुत सोचा इस बात पर लेकिन कभी मुझे  इस सवाल का जवाब नहीं मिला.

किस्मत ही कहिये या फिर कुछ और, उसे बारिश पसंद थी और हलकी सी बारिश की हलकी सी फुहार उस दिन भी हो गयी..पास के काम्प्लेक्स में जब हम बारिश से बचने के लिए छुपे तो वो कहने लगी - अरे चलो न..बूंदा बांदी तो हो रहा है..रुक क्यों गए?.  उस समय मुझे बारिश से नफरत सी थी..मैंने कहा - दिवाली आ गया है और अब भी बारिश हो जाती है कभी कभी..बेकार मौसम है ये बारिश.

"चुप रहो..बारिश से अच्छा कोई मौसम नहीं..तुमको अच्छा नहीं लगता तो बुराई भी मत करो" उसने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा.

"हाँ, तुम्हे तो अच्छा लगेगा ही न बारिश..तुम रहती हो मन रोड पे..पानी नहीं जमता वहां पर..और हम जहाँ रहते हैं वहां तो कभी कभी घुटना तक पानी लग जाता है.स्कूटर निकालना तक मुश्किल हो जाता है..पता है एक दिन कितना दूर तक घसीटना पड़ा था स्कूटर को"

"तुम पागल हो एकदम..राकेश भैया के घर के आगे भी तो पानी लगता है..देखो हम और रश्मि कैसे उस पानी में बाजार जाते हैं..कितना मजा आता है.हम तो बारिश रुकने का इंतज़ार करते हैं और मनाते हैं की बहुत सारा पानी लग जाये..कितना मजा आता है तुम क्या जानोगे..तुम तो हो ही बहुत बड़े बोर..ही ही ही "

मुझे वो इरिटेट करने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी..और जब न तब मेरा मजाक भी बना ही देती थी. मैं कुछ नहीं कहता..शायद मुझे उसका वो मजाक पसंद था. मैं चाहता की वो मेरा और मजाक बनाये. उन दिनों लड़कियों से मैं कम ही बात करता था. दो तीन लड़कियां जो दोस्त बन गयी थी, उनके अलावा और कोई लड़की से कभी बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई. ये दो तीन लड़कियां भी इस बात का मजाक बनाने से नहीं चुकती थी.. "वो कभी कह भी देती की तुम इतना ज्यादा शर्माते हो न की क्या कहूँ..पता नहीं अपने घर में भी चुप रहते हो हमेशा या कभी बोलते भी हो".

उसे इस बात की सबसे ज्यादा शिकायत रहती थी की बारिश का मौसम मुझे पसंद नहीं.खैर, अब उसकी ये शिकायत शायद न हो..क्यूंकि बारिश अब मुझे अच्छी लगती है. उस दिन भी जब हम काम्प्लेक्स में खड़े थे और मैं बारिश को गरिया रहा था तो इसपर वो कहती "जिस इंसान को बारिश की बुँदे पसंद नहीं उससे ज्यादा बोरिंग इंसान दूसरा कोई नहीं". मैंने कहा उससे - बारिश मुझे पसंद है लेकिन ऐसी नहीं..सोचो कोई खूबसूरत हिल-स्टेशन जैसा जगह हो.स्विटज़रलैंड टाइप...एक बहुत बड़ा सा लॉन हो, चारों तरफ बड़े बड़े पहाड़...लॉन के बीच एक बड़ी सी छतरी के नीचे एक टेबल, दो कुर्सी लगी हो, वहां बैठ के हम कोफ़ी पी रहे हो और तेज बारिश हो रही हो..कितना खूबसूरत लगेगा..

"ओह हाउ रोमांटिक..कितना खूबसूरत इमैजीनेशन है.तुम इसी लिए तो कुछ लिख भी लेते हो..इत्ता अच्छा इमैजिन करते हो..सच में कितना खूबसूरत लगेगा वो सीन..लेकिन तुम वहां कोफ़ी पीने अकेले पियोगे क्या या अपनी कोई गर्लफ्रेंड को साथ ले कर जाओगे. ही ही ही " ..उसने कहा

मेरी कौन गर्लफ्रेंड बनेगी रे..न शकल न सूरत..मेरी तो कभी गर्लफ्रेंड नहीं बन सकती..वैसे भी जब तुम हो ही तो तुम ही को ले चलूँगा अपने साथ हिल स्टेशन..कोफ़ी पीने..तुम्हारे रहते और किसको ले जाऊँगा..टॉप प्राइऑरटी तो तुम ही हो न...चलेगी न रे साथ में.?

हा हा..हाँ हाँ चलेंगे..  (उसकी नज़रें थोड़ी नीची हो गयीं..इधर उधर जाने लगीं..जैसे मेरे इस बात के लिए वो तैयार नहीं थी..वो शायद थोड़ा शर्माने लगी थी.. शायद जो मैं कहना चाह रहा था वो समझ गयी थी..)


12 comments:

  1. wow..so rommantic!!

    lovely post !!

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  2. ओह ..का रे बच्चा लाल तो ई सब हो चुका है पहिले ही ..चलो अच्छा किए बता दिए ..हमको तो गाना गाने का मन कर रहा है ..

    सुनाएं का ....लाओ कान दो इधर ..

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  3. तुमसे कल बात हुई थी, मुझे पता नहीं था तुम ये लिख भी दोगे.
    कुछ और नहीं कहूँगी मैं!

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  4. अजय भईया
    कान उधरे है...आप गाना गाना तो शुरू कीजिये. :)

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  5. @प्रीती दी..
    आपने ही तो कल याद दिला दिया था..सोच रहा था की लिखूं या न लिखूं..आखिर में लिख ही दिया.

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  6. अन्दाज़-ए-बयाँ गज़न का है।

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  7. wow.अभि ! कहते हैं दिल से निकला हर शब्द दिल छूता है यही बात इस पोस्ट पर एकदम सटीक बैठ रही है .पूरी पोस्ट सम्मोहित सी करती है .शुरू से आखिर तक पढते हुए एक मुस्कान सजी रहती है.
    बहुत ही प्यारी पोस्ट.

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  8. ohh so cute..n so lovely post!!!!

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  9. बहुत बढ़िया

    कभी यहाँ भी आइये
    www.deepti09sharma.blogspot.com

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया