Monday, August 9, 2010

// // 23 comments

तुम्हारी यादों का हैंगओवर

सुबह तुम्हारी यादों के साथ जागा था..
कमरे में नज़र घुमाई तो देखा,
टेबल की हर चीज़ बिखरी पड़ी थी
तुम्हारी दी हुई किताबें, पेन,
तुम्हारी तस्वीरें और
तुम्हारे कान का एक झुमका
जो तुमने एक शाम चलते हुए
मेरे पॉकेट में रख दिया था
टेबल पर बिखरी पड़ी थीं.
तुमने जो डायरी दी थी,
वो भी आधी खुली हुई सी,
टेबल से लटक रही थी..
एक पल सोचा टेबल समेट दूँ..
धुल जो पड़ी है टेबल पे, उसे साफ़ कर दूँ..
तुम्हारे दिए हुए तोहफों को भी
हिफाज़त से उस अनोखे से बक्से में रख दूँ
जिसे तुमने मुझे दिया था
पर कुछ भी समेटने का दिल नहीं कर रहा था
तुम्हारी यादों का हैंगओवर उतरा नहीं था.

वहीँ नीचे फर्श पे ,
गुलाबी रंग का वो खत गिरा हुआ था
जिसमें तुमनें जाने कितनी बातें लिखीं थी
तुम्हारे सभी पागलपन वाले किस्से,गाने,उल-जुलूल शायरी
और मेरे लिए लिखी हजारों नसीहतें..
वो खत उस लेटर-पैड का पहला पन्ना था,
जिसे मैंने तुम्हारे लिए अर्चिस से खरीदा था
खत देते वक़्त तुमनें मुझसे कहा था,
इस खत को हिफाज़त से रखना..
इसमें लिखी हुई बातों को हमेशा याद रखना..

उस खत को एक लिफाफे में लपेट कर रख लिया था मैंने..
दस साल हो गए,
खत अब भी मेरे पास है.. उसी लिफाफे में रखा पड़ा है  
हाँ, लिफाफा कुछ पुराना हो गया है
जगह जगह से फट भी गया है वो
लेकिन खत के ऊपर कभी धुल नहीं जमने दिया उस लिफाफे ने
वो खत आज भी उतना ही नया है जैसे दस साल पहले था,
आज भी जब वो खत पढ़ता हूँ,
तुम्हारी हर एक बात याद आती है,
तुम्हारे लम्स की गर्माहट को महसूस करता हूँ
तुम्हारा चेहरा दिखाई देता है खत में

सुबह से अब तक
दफ्तर में अकेला बैठा
जाने कितनी बार पढ़ चूका हूँ तुम्हारे उस ख़त को,
जितनी बार भी पढ़ रहा हूँ ख़त को
हर बार तुम्हारी यादों का नशा और चढ़ते जा रहा है
पन्द्रह कप कॉफ़ी भी पी चूका हूँ अब तक
सोचा कुछ तो हैंगओवर उतरेगा,
पर ये तुम्हारी यादों का हैंगओवर है..
कैसे उतरेगा इतनी जल्दी

23 comments:

  1. हम्म ! किसकी यादों का हैंगओवर है ? हैं ??? बोलो बोलो !
    अच्छी कविता है. प्यार भरी सीधी-सादी सी.

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  2. pyaar kaa bukhaar aise kahan utarta hai

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  3. अब हम का बोलें... कुछ नहीं बोलते हैं जाओ... ग्रामर बहुत गड़बड़ है इस बार!!

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  4. नशा जितना गहरा, हैंग ओवर भी उतना गहरा। वाह।

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  5. अरे मेरे जुम्मन मियाँ..का लिखे हो यार...गज्जब ... केकर हैंग ओभर है रे?

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  6. हम ये नहीं पूछेंगे कि किसका हैंगओवर.. जितने सवाल यहाँ लोग पूछे हैं वाही दे दो तो बहुत है.. :P
    रुको, हैंग ओवर का एक और चेहरा जल्दी ही अपने ब्लॉग पर दिखाते हैं.. :)

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  7. i just read it somewhere yesterday - if you can't get out of it, get into it!

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  8. जिसकी यादों का हैंगओवर" इस कदर हो वाकई खुशनसीब ही होगा ,,

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  9. जिसकी यादों का हैंगओवर" इस कदर हो वाकई खुशनसीब ही होगा ,,

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  10. अच्छी कविता है. प्यार भरी सीधी-सादी सी.

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  11. This comment has been removed by the author.

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  12. bahut hee sundar kavita...jo man se nikalkar man ko chhoo jaye..badhayi...

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  13. कित्ती प्यारी और भावपूर्ण रचना ...बधाई.

    _____________
    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है...

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  14. सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  15. Sundar kavita to nahi kahungi...magar pyare aur hridayasparshi vichaar zarur mann ko chhu gaye...

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  16. बहुत ही सुन्दर और प्यारी सी रचना...जितना कुछ भी कहूं कम है...

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  17. बड़ा अच्छा हैंगओवर है आपका तो
    बधाई हो..

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  18. ऐसे हैंगओवर उतरते ही कहाँ हैं? आप सोच भी कैसे लिए?

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  19. bahot khubsurati se aur pyar se likhi hui pyari rachna...

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