Sunday, July 18, 2010

ये जो प्रभा है न ... :)

वो मेरे से करीब ४-५ साल छोटी है, हमारी मुलाकात ऐसे ही हो गयी,पहले तो हम दोस्त बने फिर शायद उसे ये अंदाज़ा होने लगा हो की मैं उससे बहुत बड़ा हूँ :P उसने मुझे अभि भैया कहना शुरू किया :) मेरे बस दो जुनिनर हैं जो मुझे इस नाम से(अभि भैया) बुलाते हैं, एक तो है श्रुति अगरवाल और एक है नीरज सिंह.बाकी सब दोस्त मुझे अभि या अभिषेक कह के बुलाते हैं और कुछ जूनियर हैं वो भैया या अभिषेक भैया कह के बुलाते हैं...खैर, ऐसे बहुत कम से लोग हैं जिन्हें मैं अपने परिवार जैसा मानता हूँ...ये लड़की उसमे से ही एक है... :)

ये लड़की जिसका नाम है प्रभा, बहुत ही नटखट है,बातुनी.. शरारती तो नहीं कहूँगा क्यूंकि समझदार है, बहुत ख्याल रखने वाली लड़की है..इससे बातें करूँ तो दिल को एक सुकून मिलता है...छोटी है ये लेकिन बहुत डांटती भी है मुझे :) और कभी कभी तो ये इतनी समझदारी की बात करती है की मन करता है बस इसकी बातें सुनता रहूँ..... :) मैं एक बात आज कन्फेस करना चाहूँगा, शुरू शुरू में जब मेरी इससे जान पहचान नहीं थी तो मुझे लगता था की ये लड़की बहुत मोडर्न टाइप की है, और फूल ऑफ  ऐटिटूड वाली लड़की है...लेकिन जल्द ही ये मेरी सोच पूरी तरह गलत साबित हुई.....दो लोगों के कारण मैंने ये मानना अब बिलकुल छोर दिया की "फर्स्ट इम्प्रेसन इज दी लास्ट इम्प्रेसन"...एक तो है ये प्रभा और दूसरा समित..समित के बारे में आप यहाँ पढ़ चुके हैं.....पहली मुलाकात में दोनों के प्रति मेरी राय कुछ ज्यादा नेक नहीं थी...मैंने दोनों को थोड़ा घमंडी भी सोचा था(माफ कर देना यार), लेकिन अब ये दोनों मेरी जिंदगी के एक अहम हिस्से बन चुके हैं...

पिछले कुछ महीनो तक, जब मैं काम में उतना व्यस्त नहीं हुआ करता था, तब इससे हर रोज जी-मेल पे बातें हुआ करती थी...अब भी होती है इससे बात लेकिन अब जी-टॉक पे चटियाने की फ्रीक्वन्सी थोड़ी कम हो गयी.. .ये तो है ही एक नंबर की पागल लड़की, कभी चैटिंग से दिल नहीं माना तो ऑफिस के फोन से ही शुरू हो गयी, फिर भले ऑफिस का फोन बिल कितना भी आये उससे इसे क्या..और वैसे उससे हमें भी क्या काम...हमें तो बातें करने से मतलब है जी..;) बातें करने का मन हुआ तो बस प्रभा के मोबाइल पे एक मिस कॉल दे दिया और उधर से ये हमें फोनिया देती है, फिर मैं क्या, ये २-३ और दोस्तों को को कान्फरन्स पे ले लिया करती थी और बातें हमारी चलती रहती थी..हाँ, कुछ महीनो पहले इसके ऑफिस में वो सब फोन कॉल की इन्क्वाइअरी शुरू हो गयी थी तो कुछ दिन तक ये फोन नहीं कर पाती थी, लेकिन अब फिर से फोन की बातचीत पहले जैसे ही जारी है, अंतर बस इतना है की अब कुछ १-२ महीनो से काम की थोड़ी ज्यादा व्यस्तता है तो बात उतनी नियमित रूप से हो नहीं पाती है..

आज  सुबह भी कुछ कारण से मैं थोड़ा परेसान था, परेशानी दो दिनों से है, कुछ काम से सम्बंधित.....सुबह आज जैसे ही अपना जी-मेल लोगिन किया तो देखा ये लड़की ऑनलाइन है, सबसे अच्छी बात ये है की मैं इससे सब बातें शेयर करता हूँ...काफी अच्छा महसूस होता है, आज भी इससे बात कर के काफी अच्छा महसूस हुआ, आज के अलावा एक और दिन था जब मैं काफी कशमकश में था की क्या करूँ...उस दिन प्रभा से मेरी करीब आधे घंटे से भी ज्यादा फोन पे बातें हुईं, शायद प्रभा को याद होगा किस मामले में, उस दिन भी बड़ा अच्छा महसूस किया था मैंने :) आज भी थोड़ी हलकी डांट सुना ही दी इसने, ये डांट तो इसकी खूबी है..असल में डांट भी नहीं कहूँगा उसे, क्यूंकि बहुत प्यारा बोलती है जो भी बोलती है ये जब गुस्से में रहती है..मैंने तो ऐसे ही मजाक में उसे डांट का नाम दे रखा है :) मेरी एक और दोस्त है शिखा, दोनों जब गुस्से में होते हैं तो एक सी ही बातें करतीं हैं :)


प्रभा मुझे बहुत अच्छी तरह जानती है, लेकिन कभी कभी ये ओवर-कान्फिडन्स भी दिखाती है ये कह के की "आप जो भी करोगे अच्छा ही करोगे" ;)  अब ये तो  ओवर-कान्फिडन्स वाली ही बात हुई न..अब मैं कोई टैलन्टड या गुणों से भरपूर व्यक्ति तो हूँ नहीं, तो ऐसे में इसकी ये सोच तो एक बड़ी ग़लतफ़हमी है न :) पता नहीं क्यों इसे इस बात की बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है की मैं बहुत ही ज्यादा गुणों से भरपूर व्यक्ति हूँ...ये गलत सोच इसकी कहाँ से आई, ये मुझे भी नहीं पता :P मैं तो एक बहुत ही सामान्य सा, साधारण सा व्यक्ति हूँ जो कुछ सपनो के पीछे लगातार भागे जा रहा है....जितना मैं सपनों के पीछे भागता हूँ, सपने उतना ही दूर होते जाते हैं मुझसे....अब तो ये एक बोझ सा लगता है की इतने सारे लोगों को मेरे से कितनी उम्मीदें हैं...डर लगता है कभी कभी की इन सब की उमीदों पे खरा उतर भी पाऊंगा या नहीं....

अरे मैं तो टोपिक से हटते जा रहा था...अपने बारे में बातें  शुरू करने लगा  :P खैर, प्रभा के बारे में ये पोस्ट लिखने को मैं बहुत पहले ही सोचा था, सोचा की उसके जन्मदिन पे ये पोस्ट उसे दिखाऊंगा...लेकिन उसके जन्मदिन पे नहीं लिख पाया, तो आज लिख रहा हूँ... :) कुछ कारणों से ये पोस्ट मैं अपने मुख्य ब्लॉग "मेरी बातें" पे पोस्ट नहीं कर रहा हूँ.....

ये कभी कभी बेवकूफी वाली बातें भी करती है..लेकिन इसकी सब बातें बहुत ही क्यूट और प्यारी सी लगती है..समझदार तो है ही लेकिन कभी कभी बिना सर-पैर वाली बातें भी करने लगती है ;) मुझे तो इसकी हर बात अच्छी लगती है, हर बात पे दिल खुश होता है :) बस यही दुआ करूँगा की ये जहाँ भी रहे, अच्छे से रहे, खुश रहे...हँसती रहे :)
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Saturday, July 10, 2010

Those Rain were special

Rains pour down,
Like the tears from my eyes, 
with every drop of rain, 
comes all your memories...
I'm alone in this rain,
with only sorrow and pain...

Those rain were special,
spectacular,
when you was with me,
Everything was so bright then ,
Rain was so beautiful, 
I remember how we talked,laughed,
walked in those rain,
The way the flower blossoms after rain,
The way the grass grows,
The way the skies clear and become brighter,
after rain, were so romantic..
Those days were bliss..

(Friends, please ignore mistakes, if any, in this post...this was written by me around 2 years back...I know my English is real bad..:P )
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