Sunday, June 27, 2010

// // 11 comments

अश्क पी जाता हूँ..

ऐसे ही बैठे बैठे दो लाइनें लिखा..

तुम्हारे चेहरे की हंसी देख,
अपने अश्क पी जाता हूँ मैं..
लब सी लेता हूँ..
वरना अभी तो,
ग़मों की बहुत दास्तान बाकी है !

11 comments:

  1. गम जिसने पी लिए उसने ज़िंदगी जी ली ...

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  2. ए बचवा, दू लाईन तुमरा है त बाकी का तीन लाईन कऊन लिखा है... बहुत बढिया है... किसी के हँसी पर अपना गम कुर्बान कर देना.. ई जज्बा का कोनो मोकाबला नहीं...जिओ!

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  3. bahut kboob...!

    but gum kiss baat ka...?

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  4. बहुत बढ़िया.

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  5. सारी लाइने बेहतरीन हैं.

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  6. बहुत सुन्दर रचना

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  7. क्या अभिषेक? !
    आप कुछ परेसान से दिख रहे हो क्या?

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  8. वैसे अच्छा लिखा है !!

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  9. @स्नेहा...
    चिंता मत करें..कुछ खास बात नहीं, ऐसे ही है ये :)
    @प्रिया भाभी,
    नहीं जी कुछ बात नहीं :) सब ठीक है :)

    बाकी सभी का धन्यवाद :)

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