Sunday, June 27, 2010

अश्क पी जाता हूँ..

ऐसे ही बैठे बैठे दो लाइनें लिखा..

तुम्हारे चेहरे की हंसी देख,
अपने अश्क पी जाता हूँ मैं..
लब सी लेता हूँ..
वरना अभी तो,
ग़मों की बहुत दास्तान बाकी है !