Sunday, June 6, 2010

// // 12 comments

एक नयी दुनिया बसाएं..


हम भी काश इन परिंदों की तरह,
आकाश में कहीं दूर चल चलें..
एक नया आसमान तलाशने..
एक नयी दुनिया बसाने..
जहाँ हर तरफ खुशी हो..
एक ऐसा जहाँ बनाये जहाँ,
नफरत  की कोई जगह न हो..
और प्यार कभी कम न हो..

12 comments:

  1. अच्छा लिखा नफ़रत की जगह ना हो
    प्यार कभी कम ना हो

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  2. हम नहीं हो सकते बेटा ई परिंदा लोग के जईसा… हम लोग अपना चारो तरफ पईसा का पिंजड़ा बना लिए हैं..अऊर पिंजड़ा में परिंदा उड़ान भूल जाता है...

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  3. ... बेहद प्रभावशाली

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  4. अरे वाह अभिषेक क्या सुन्दर लिखा है.

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  5. where is the time to hate
    when there is so little time to love :)

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  6. सही कहा शिखा जी :)

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  7. सुंदर भाव लिए रचना |बधाई
    आशा

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  8. very good lines abhishek ji

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  9. बहुत ही अच्छी रचना.

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