Friday, May 14, 2010

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तुम बहुत याद आती हो

आज फिर उस पन्ने के तरफ धयान गया,
जिसपर बड़े प्यार से तुमने
लिखा था की
"फिर मिलेंगे"..
सहेज के रखा है  अब तक मैंने उस पन्ने को
की बस
वही तो एक वजह है
जिससे उम्मीद अब भी है
की तुम वापस आओगी,
अपना कहा निभाओगी.
की हम फिर मिलेंगे...

उसी पन्ने के एक कोने पे,
ये भी लिखा था तुमने
हमेशा मुस्कुराते रहना,
हर पल मैं तुम्हारे साथ रहूंगी,
हर पल तुम मेरे साथ रहोगे,
अपनी मुस्कराहट को तुम
कभी न खोना.
आज भी मुश्किलों के दिनों में
वो लिखी हुई बातें तुम्हारी
मेरे चेहरे पे एक प्यारी मुस्कान दे जाती है,
और उस पल
की जब मैं मुस्कुराता हूँ..
तुम बहुत याद आती हो...!

6 comments:

  1. ahm ahm ;)
    हम्म्म्म :-P
    अच्छा लिखा है... :-)

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  2. seems like its written for someone really very special :P :P

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  3. आम बोल चाल में हम लोग ई दुनो मुहावरा का परयोग खूब करते हैं..लेकिन ई दुनो को जोडकर जे आप कबिता लिखे हैं उ बेजोड है!!

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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