Sunday, May 30, 2010

दो कबिता

मुझे कुछ लिखना नहीं आता.ये अभिषेक ने मुझे क्यूँ लिखने कहा इस ब्लॉग में पता नहीं.आज पहली बार हिंदी में कुछ लिखने की कोशिश कर रही हूँ।

बहुत बड़ी है ये अनजानी दुनिया
खो जाने का डर लगता है.
तेरी दोस्ती का साथ है तो
हर मंजिल पाने का अहसास होता है
ऐ दोस्त तेरी बहुत याद आती है
जब कभी दिल तनहा होता है

one more poetry is there...

~~** FriendShip **~~



Friendship is just Like Love,
Something Special,
which you have, Which I have..
It will last forever..

I am glad I was with you,
all the way,
I am glad you lend me shoulder
to cry, take support.
you lend me helping hand,
whenever i needed it.

We laughed, on silly jokes,
we creid together in testing times,
We talked endlessly,
We talked pointlessly
We talked about each and every thing,

I know you're my best friend
and You'll be there
for me..
whenever I need you,

I'll hug you..
I'll walk with you..
I'll shut everyone up,
so that you can talk..
I'll jump the sky,
I'll do anything and everything
for you,
I'll be with you,
forever and ever..

-- your loving friend ABHISHEK

NOTE : This two poetry wasnt written by me as I am the most worst poet anyone can imagine :D This two poetry was written by ABHISHEK, the owner of this blog. Both the poem were written by him when we're in our grads. I guess around 2004.I am not going to edit any words here in this poetry, coz I dont have any idea how a poetry should look like,
But I just love this note which my sweet friend gave me at that time.

I just happened to come across some note in my dairy so I just blogged it here :)

And,

Sorry abhishek hindi mein utna hi kaise likhi hun main hi jaanti hun.coz internet pe hindi likhna is a toughiee yaar ,you know that. ab aadat hogi to aasan lagne lagegi.

as for time being, jhelo mujhe aur kya :D :D :D
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Tuesday, May 25, 2010

तुम जा रही थी

तुम जा रही थी..
स्टेशन के प्लेटफोर्म नंबर वन के
एक कोने में खड़ा,
मैं बस तुम्हें देखे जा रहा था..
जिंदगी फिसली जा रही थी आँखों के सामने मेरे..
बेबस खड़ा मैं,
बस देखे जा रहा था..
उसी रुमाल से,
जिसे तुमने दिया था कभी
अपनी आँखों के आंसू पोछ रहा था..
दिल में एक अजीब सा दर्द उठा उस वक्त..
जब तुम्हारे चेहरे पर नज़र गयी थी मेरी
तुम्हारा वो खिला चेहरा,
उस दिन खिला खिला नहीं लग रहा था मुझे
उदासी साफ़ झलक रही थी चेहरे पर तुम्हारी..
और बेबस खड़ा मैं
बस तुम्हें देखे जा रहा था...


एक शाम पहले
जब तुमसे आखरी बार मिलकर,
घर वापस आया था..
एक अजीब सी बेचैनी थी..
एक अजीब सी उदासी थी...
तुमने उस शाम
जो ग्रीटिंग्स कार्ड दिया था,
उसे हाथों में लेकर घंटों बैठा रहा
उस ग्रीटिंग्स कार्ड में रखे वो दो फूल
जिनमें तुम्हारे हाथों का स्पर्श था
और जिसे मैं महसूस कर रहा था
रात भर उन्हें हाथों में लेकर
जागा रहा था मैं
शाम की तुम्हारी बातों को
तुम्हारी शरारतों को
तुम्हारी मुस्कुराहटों को
याद करते हुए
कब सुबह हुई पता ही नहीं चला था.

सच में,
वो शाम
जब हम आखिरी बार मिले थे,
कितनी छोटी थी,
कितनी जल्दी बीत गयी थी...
कितनी बातें थी मन में,
जो तुमसे कहना चाहता था,
लेकिन वक़्त कहाँ था हमारे पास,
वो सारी बातें
जो अनकही रह गईं,
अब तक कचोटती हैं मन को

उसी शाम चलते चलते,
तुमने अचानक मेरा हाथ थाम लिया था
और कहा था मुझसे,
तुम उदास न होना, मैं वापस जल्दी आऊंगी...
ग्रीटिंग्स कार्ड में भी तुमने,
यही लिखा था..
और साथ में लिखा था तुमनें,
तुम्हारी मुस्कराहट मेरी अमानत है,
सम्हाल कर रखना इसे,
और हमेशा मुस्कुराते रहना.

उस शाम जब तुम जाने लगी थी...
एक पल सोचा रोक लूँ तुम्हे,
जो वादा उस शाम किया था तुमसे
तोड़ दूँ उसे
तुम्हारा हाथ थाम,कहीं दूर चल दूँ,
इस ज़माने से बहुत दूर कहीं,
जहाँ सिर्फ तुम और मैं हों..
और दूर दूर तक कोई न हो
पर मैं कमज़ोर था..
ये कर न सका..

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Friday, May 14, 2010

तुम बहुत याद आती हो

आज फिर उस पन्ने के तरफ धयान गया,
जिसपर बड़े प्यार से तुमने
लिखा था की
"फिर मिलेंगे"..
सहेज के रखा है  अब तक मैंने उस पन्ने को
की बस
वही तो एक वजह है
जिससे उम्मीद अब भी है
की तुम वापस आओगी,
अपना कहा निभाओगी.
की हम फिर मिलेंगे...

उसी पन्ने के एक कोने पे,
ये भी लिखा था तुमने
हमेशा मुस्कुराते रहना,
हर पल मैं तुम्हारे साथ रहूंगी,
हर पल तुम मेरे साथ रहोगे,
अपनी मुस्कराहट को तुम
कभी न खोना.
आज भी मुश्किलों के दिनों में
वो लिखी हुई बातें तुम्हारी
मेरे चेहरे पे एक प्यारी मुस्कान दे जाती है,
और उस पल
की जब मैं मुस्कुराता हूँ..
तुम बहुत याद आती हो...!

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