Thursday, April 22, 2010

बारिश और तुम्हारी यादें

अभी कल ही बंगलोर में बारिश हुई..तो कल शाम में ऐसे ही कुछ लिख दिया था ...अब मैं कोई कवी या शायर तो नहीं लेकीन जो भी थोडा बहुत लिखा है, आप सब के सामने पेश है...इन लब्जों में मेरे कुछ पल कैद हैं.ऐसे पल जो मैं कभी भुल नहीं सकता..

 कल फिर यहाँ बारिश हुई
कल फिर तुम याद आये,
और साथ ही याद आया
बारिश का वो सुहाना मौसम
जब हम भीगे हुए से
सड़को पे चलते थे...
पानी के कूदती तुम छप छप चलती थी..
बारिश की बूँदें तुम्हारे चेहरे को छु जाती थी
भीगा हुआ सा वो चेहरा तुम्हारा,
आज भी रातों जगाता है मुझे...

रिमझिम बारिश में हम घूमते,
इधर उधर फिर करते ,
और थक के उस पार्क में जा बैठते हम,
उस पार्क में एक कोने में लगी बेंच
आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर हैं हो जैसे
और उसी पार्क के गेट पे
आज भी वो आइसक्रीम की दुकान है,
जहाँ  हर बारिश में ,
तुम्हें  आइसक्रीम खाना बड़ा पसंद था..

आज  भी कभी कभी वो पेड़ याद आ जाता है
जो उस रास्ते पे हुआ करता था
जहाँ  हम मिला करते थे...
बारिशों में तो जैसे 
उस  पेड़ के फूलों में निखर आ जाता था..
तुम  उस पेड़ पे झूलती,उसके फूलों से खेलती 
और  कहती मुझसे
सावन से अच्छा कोई मौसम नहीं..

जब  कभी हम शाम की बारिश में फंस जाते
तुम  मुझे बताया करती ,
की  क्या सुहानी बात है इस बारिश में,
और  मैं तुम्हारी उन बातों में डूब जाया करता था..
बारिश के शामों में आसमान कितना हसीन दीखता है,
तुमसे ही जाना मैंने...

ये सब बातें, और भी कई बातें 
जो तुमने कही थी
याद है मुझे...
कैसे भुल सकता हूँ ये सब हसीन पल
की हर पल में तुम हो, तुम्हारी यादें हैं..
ये बारिशें अब अक्सर मुझे रुला जाया करती हैं..
इन बारिशों में तुम्हारी कमी बहुत खलती है..
तुम्हारी यादें आती हैं...
तुम याद बहुत आते हो..