Friday, April 2, 2010

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ऐ दोस्त

युही कभी तीन-चार लाइने लिख दी थी मैंने कभी.....खासकर के कुछ दोस्तों के नाम ये लाइने थी.....शायद पसंद आये आपको 

तनहाइयों में ये दिल अक्सर बेचैन रहता है,
तुमसे दूर रहना का गम भी रहता है.
बहुत बड़ी है ये अनजानी सी दुनिया ,
खो न जाऊं, डर लगता है
तुम्हारी दोस्ती का साथ है तो,
हर मंजिल पाने का अहसास होता है,
ऐ दोस्त तेरी बहुत याद आती है,
जब भी कभी दिल तनहा होता है.

7 comments:

  1. मेंन बात तो आप गोल कर गए कि लिखा किसके लिए था :)

    अब बता दीजिए

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  2. बहुत खूब....अच्छी अभी व्यक्ति ( अभिव्यक्ति)

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  3. वाह खूब अभिव्यक्त किया है भावों को आपने.

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  4. दोस्त बहुत कीमती होते हैं........"

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  5. aapki rchnaaen pdh kr uske vichaaron se men mnt mugdh ho gyaa esaa hi likhte rho jme rhoge. akhtar khan akela kota rajasthan

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