Thursday, April 1, 2010

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बारिश

कल शाम की हलकी बारिश में,
याद बहुत तुम आये थे..
कल काफी यादों के मेले थे..
टुकड़े उन यादों के,
बड़ी देर तक दिल में ठहरे थे.
कल मैं कुछ गुमसुम गुमसुम सा
कल मैं कुछ तनहा तनहा सा,
बड़ी देर तुम्हारी यादों में सोया था..

 कल शाम युहीं तन्हाई में बैठे हुए ये लिखा था मैंने....शायद पसंद आ भी जाये आपको ..

4 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. अच्छा लिखे हो अभिषेक..

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  3. अच्छा लिखे हो अभिषेक..

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