Wednesday, March 31, 2010

// // 6 comments

शुक्रिया

नमस्ते ,
    मैं प्रीती हूँ,  लन्दन में रह रही एक भारतीय हूँ.मुझे ये पता नहीं की अभिषेक ने क्या सोच के मुझे इस ब्लॉग का एक सदस्य बनाया.मेरी रूचि हमेशा पढने के तरफ रही, लिखने की कोशिश नहीं की मैंने कभी.वैसे मैं अभिषेक के कुछ कविताओं को बहुत अच्छा लिखा हुआ मानती हूँ.अब जब अभिषेक ने अपने दो ब्लॉग की सदस्यता मुझे दे दी है, तो कोशिश करुँगी कुछ तो अच्छा लिखूं.

ये नीचे लिखी हुई कविता मेरी नहीं है लेकिन कुछ कारणों से मुझे ये पसंद है.
   
जब कोई दूर रहे और बहुत पास रहे..
नींद सुखी रहे और बहुत प्यास रहे..
तुम वही ख्वाब जगाने चले आ जाया करो..
मेरी रातों को चरागों से सजा जाया करो...

अश्क गीले से मोती अभी कच्चे हैं...
ये ख्वाबों को समझ लेते हैं सच्चे हैं....
तुम वही रस्म निभाने चले आ जाया करो....
मेरी पलकों पे लैब अपने सजा जाया करो......

6 comments:

  1. बहुत अच्छा है दीदी....ऐसे ही और लिखते रहिये यहाँ :)

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  2. wooww di .... good one...
    and ya i must also thank abhi for giving me permission to write here though i dun knw still what to write :P

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  3. wah di...kya baat hai.......

    badhiyan.....waise mujhe nahin pata tha ki itne saayar type k log hain mere aas paas.......

    bahut hin accha.....

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  4. दिव्या,अभिषेक और ऋचा,
    तुम सब ने थोड़ी ज्यादा तारीफ कर दी मेरी
    मैंने ये शायरी नहीं लिखी
    कहीं पढ़ी थी मैंने

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  5. areey di ap b likhne lg gyi abhishek k blog pe :) :) :d gud gud

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया