Thursday, March 25, 2010

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दर्द

दर्द यूँ तो होता है हमें,
लेकिन दर्द कि कोई जुबान नहीं होती..
सबसे छुप छुप अकेले में रोया करते हैं
बातें ये दिल कि कहीं बयां नहीं होती..
पता नहीं क्यों महफ़िलो से शिकायत हो गयी,
तनहाइयों के देश में खुद को बसा लिया हमने..

6 comments:

  1. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  2. पता नहीं क्यों महफ़िलो से शिकायत हो गयी,
    तनहाइयों के देश में खुद को बसा लिया हमने..


    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  3. wah wah kya khub kaviata hai...choti hai lakin bahut dard hai isme...padhte padhte laga jaise mein khud k baare me hi padh raha hoon...kash koi jaye aur bataye usko ki hume kitna dard hota hai......

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  4. मजा आ गया पढ़ के :-)

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