Wednesday, March 3, 2010

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मेरे आंसूं

समेट लिया है दामन में मैंने तेरी यादों को
फिर भी बरस जाते हैं आँखों से मेरे आंसूं

ख्यालों में दबे पाँव जब आती हो तुम
तब बड़े प्यार से मुस्कुराते हैं मेरे आंसूं

दूरियों का अहसास जब करता है मन को पागल
कसम से,जी भर रुलाते हैं मेरे आंसूं

दिल की बातें तुम तक पहुचआऊं कैसे
अक्सर कागज़ पे टपक जाते हैं मेरे आंसूं..

7 comments:

  1. बहुत अच्छा । बहुत सुंदर प्रयास है। जारी रखिये ।

    आपका लेख अच्छा लगा।

    हिंदी को आप जैसे ब्लागरों की ही जरूरत है ।


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  2. बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

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  3. @Kaviraaj,संजय भास्कर

    सुक्रिया आपने ब्लॉग पढ़ा मेरा....:)

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  4. osum !!

    loved this one :) :)

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  5. बहुत अच्छी है !

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  6. ख्यालों में दबे पाँव जब आती हो तुम
    तब बड़े प्यार से मुस्कुराते हैं मेरे आंसूं...
    क्या बात !!!!

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया