Sunday, January 18, 2009

// // 9 comments

कुछ बातें याद आती हैं...

कितनी बातें याद आती हैं...
तस्वीरों सी बन जाती हैं...

मैं कैसे इन्हें भूलूं..
दिल को क्या समझाओं

कितनी बातें कहने की हैं...
होठों पे जो सहमी सी हैं...

एक रोज़ इन्हें सुन लो..
क्यूँ ऐसे गम सुम हो...

क्यूँ पूरी हो न पायी दास्ताँ...
कैसे आई हई ऐसी दूरियां .. जावेद अख्तर 

9 comments:

  1. एक और अच्छी कविता....आप बहुत ही अच्छा लिखते हैं...

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  2. मेरा पसंदीदा गाना.. मगर यह मुझे बेहद उदास कर जाता है.. अतीत में ढ़केलने कि कोशिश करने लगता है..

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  3. u ve got a nice blog..!!
    in this time wen everything is about english, hats off to you for bringing our hindi to lime light

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया