Saturday, December 20, 2008



Meri Tasveer..

तेरी हर एक बेचैनी
मुझे रातों जगाती है......

मेरी यादों की महफिल में
बस एक तू ही तो आती है......

तेरी ऑंखें जो कहती है
वोह मेरा दिल समझता है.......

मेरे आसूयों की सरगर्मी......
को तू क्यूँ ना समझ पाई...



पल भर में तमाम उम्र की सोचें बदल जाती हैं..
जिन राहों पे चलते हैं वो राहें बदल जाती हैं..
करने को क्या नहीं करते लोग मोहब्बत में..
बस हमारे लिए ही रश्में बदल जाती हैं...

रेजा रेजा बिखरी है जिन्दगी,ना जाने कब से एक मोड पे रुकी है जिन्दगी..
दर्द दिल से उतर कर रूह मे समाने लगा है क्यों रेत की तरह बिखरी है जिन्दगी..
हर तरफ दुआओं का सिलसिला है ना जाने किस कोने मे ये रब छिपा है..
दुंड कर कोई कह्दो उसे इन हवाओ मे भी खुशबु बन कर बिखरी है जिन्दगी
..


साँस लेना भी कैसी आदत है
जीये जाना भी क्या रवायत है
कोई आहट नहीं बदन में कहीं
कोई साया नहीं है आँखों में
पाँव बेहिस हैं, चलते जाते हैं
इक सफ़र है जो बहता रहता है
कितने बरसों से, कितनी सदियों से
जिये जाते हैं, जिये जाते हैं
आदतें भी अजीब होती हैं


रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा
मैंने माजी से कई खुश्क सी शाखें काटीं
तुमने भी गुजरे हुये लम्हों के पत्ते तोड़े
मैंने जेबों से निकालीं सभी सूखीं नज़्में
तुमने भी हाथों से मुरझाये हुये खत खोलें
अपनी इन आंखों से मैंने कई मांजे तोड़े
और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
तुमने पलकों पे नामी सूख गयी थी, सो गिरा दी|

रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
काट के दाल दिया जलाते अलावों मसं उसे
रात भर फून्कों से हर लोऊ को जगाये रखा
और दो जिस्मों के ईंधन को जलाए रखा
रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने |