Friday, July 27, 2007

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दोस्त ---


दुआ करते हें हम सर झुकाए,
ए दोस्त, तू अपनी मंज़िल को पाये,
अगर कभी तेरी राहों में अँधेरा आये,
रौशनी के लिए खुदा हमको जलाये



दोस्तों से करो प्यार इतना कि,
और प्यार करने कि गुंजाईश ना राहे,
वो मुस्करा के हमें देख ले एक बार,
फिर जिन्दगी से कोई ख्वैश ना राहे।


बेदर्द कुछ दोस्त हो गए हैं हमारे,
जो हमारा इंतज़ार भी नही करते,
पहले तो हमसे बहुत बातें किया करते थे,
आजकल तो हमें याद भी नही करते




कुछ रिश्ते अनजाने में हो जाते हैं,
पहले दिल फिर जिन्दगी से जुड़ जाते हैं,
कहते हैं उस दौर को दोस्ती,
जिसमें दिल से दिल ना जाने कब मिल जाते हैं


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